शाहीन बागः रात में पुलिस के पहुंचते ही बजाया इमरजेंसी अलार्म, सबसे पहले उखाड़ा गया
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सोमवार रात करीब 2:30 बजे पहुंचे भारी पुलिस बल का इरादा भांपते ही प्रदर्शनकारियों ने इमरजेंसी अलार्म बजा दिया। इसके बजते ही कुछ लोग घरों से निकलकर धरनास्थल की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस भी चौकस थी। उन्हें सुरक्षा कर्मियों ने रास्ते में ही रोक लिया। धरना दे रही महिलाओं ने इसके बाद कई बार अलार्म बजाया, लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली।
इसके बाद प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने सबसे पहले अलार्म का तार काटकर माइक उखाड़ दिया था। इसके बाद पूरे प्रदर्शनस्थल पर बुलडोजर चलवा दिया। इस दौरान पुलिस की प्रदर्शनकारियों से तीखी नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने पूरी कार्रवाई मंगलवार सुबह का उजाला होने से पहले ही खत्म कर दी।
101 दिन से रास्ता घेरकर बैठे प्रदर्शनकारियों को पहले से ही पुलिस की कार्रवाई की आशंका थी। उन्होंने धरनास्थल पर एक इमरजेंसी अलार्म लगवा रखा था। तय किया गया था कि इस अलार्म को आपात स्थिति में बजाया जाएगा। इसकी आवाज सुनते ही शाहीन बाग से लेकर ओखला तक के लोग तत्काल धरनास्थल पर पहुंच जाएंगे। एक बार बटन दबाने पर यह अलार्म करीब एक मिनट तक बजता था। कई बार प्रदर्शनकारियों ने इस अलार्म का इस्तेमाल कर भीड़ जुटाई थी। मंगलवार को पुलिस ने ऐसी रणनीति अपनाई कि भीड़ वहां तक नहीं पहुंच पाई।
दो प्रदर्शनकारी थे कोरोना वायरस की चपेट में
प्रदर्शनकारियों के तमाम दावों के बावजूद धरने में शामिल दो लोग कोराना वायरस की चपेट में थे। इनके संक्रमण की गिरफ्त में आने के बाद उनमें आपस में ही प्रदर्शन को समाप्त करने के लिए बहस तेज हो गई थी। उधर, लॉकडाउन के बाद सोमवार रात कर्फ्यू की घोषणा के बाद दिल्ली सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक पर प्रदर्शन खत्म कराने का दबाव था। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनस्थल को खाली कराने का फैसला लिया।
लाखों लोग रोज हो रहे थे परेशान
शाहीन बाग का रास्ता 101 दिन से बंद होने की वजह से फरीदाबाद से नोएडा जाने वाले लाखों लोगों को रोज कई किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा था। कई लोगों की तो इसके कारण नौकरी भी चली गई। स्कूली बच्चे भी खासे परेशान थे। उनकी बोर्ड परीक्षा की अभिभावकों की दुहाई तक को प्रदर्शनकारियों ने अनसुना कर दिया था। अब इलाके के लाखों लोगों ने राहत की सांस ली है।
सुप्रीम कोर्ट के वार्ताकार भी रहे नाकाम
शाहीन बाग के रास्ते को खाली कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को वार्ताकार नियुक्त किया था। इन्होंने छह दफा शाहीन बाग पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को रास्ता खाली कराने के लिए समझाया, लेकिन वे नहीं माने। प्रदर्शनकारियों की जिद के कारण वार्ताकार हर बार नाकाम ही लौटे। उन्होंने इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी।
प्रदर्शन का सफरनामा
15 दिसंबर 2019 : जेएनयू का स्कॉलर शरजील इमाम (अब देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार) अपने कुछ साथियों के साथ सड़क किनारे धरने पर बैठा था।
18 दिसंबर : शाहीन बाग की स्थानीय महिलाएं धरने में शामिल। पुलिस ने कालिंदी कुंज और सरिता विहार की ओर से सड़क पर बेरिकेड लगा दिया।
20 दिसंबर : सड़क के एक हिस्से पर प्रदर्शनकारियों ने कब्जा किया।
22 दिसंबर : नोएडा से आने वाली सड़क पर भी प्रदर्शनकारियों ने कब्जा कर लिया। दिल्ली की सत्ताधारी आप के विधायक अमानतुल्लाह ने प्रदर्शनकारियों को दिया समर्थन।
चर्चा में रहीं ये बातें
- शाहीन बाग की बुजुर्ग महिलाओं को प्रदर्शनकारियों ने ‘दादियां’ पुकारना शुरू किया। ये सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं।
- देशद्रोह के आरोपी शरजील इमाम का विवादित वीडियो सामने आया। इसमें उसने देश से असम को काटने की रणनीति बताई थी। इससे प्रदर्शन को चर्चा मिली।
- शरजील की गिरफ्तारी का शाहीन बाग में जमकर हुआ विरोध।
- दिल्ली के विधानसभा चुनाव में गृह मंत्री अमित शाह का शाहीन बाग को करंट वाला बयान खूब चर्चित रहा।
- भाजपा नेताओं के विवादित बोलों ने शाहीन बाग में माहौल गर्माया।
- चुनाव के दौरान दो बार शाहीन बाग धरनास्थल के निकट गोली चली।
- सरिता विहार के लोग शाहीन बाग का रास्ता खाली कराने के लिए धरने पर बैठे, लेकिन पुलिस ने समझाकर हटा दिया।
- 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू के दौरान प्रदर्शनस्थल के पास चाय की दुकान पर पेट्रोल बम से हमला।
- कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के मुद्दे पर प्रदर्शनकारी गुटों में बंटे।
- मंगलवार तड़के पुलिस ने शाहीन बाग को खाली करा दिया।