Economic Survey Delhi : शिक्षा और स्वास्थ्य में अव्वल, इन्फ्रा में भी सुधार; वाहनों की संख्या में मामूली बढ़त
दिल्ली सरकार स्कूल व उच्च शिक्षा से लेकर तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक बजट देकर अव्वल साबित हो रही है। आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2022-23 में 21 फीसदी बजट खर्च किया गया।
विस्तार
दिल्ली सरकार स्कूल व उच्च शिक्षा से लेकर तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक बजट देकर अव्वल साबित हो रही है। आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2022-23 में 21 फीसदी बजट खर्च किया गया।
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक की राज्य बजट विश्लेषण रिपोर्ट से स्पष्ट है कि छतीसगढ़ 18.2 फीसदी, हिमाचल प्रदेश 17.6 फीसदी शिक्षा पर खर्च कर रहे हैं। जबकि शिक्षा पर खर्च करने के मामले में राष्ट्रीय औसत 13.3 फीसदी रहा है। दिल्ली सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में साल दर साल खर्च करने में इजाफा किया है। दिल्ली में साक्षरता की दर 86.2 फीसदी है, जो 2011 की जनगणना के अनुसार अखिल भारतीय स्तर की 73 फीसदी की दर से काफी अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार, यूडीआईएसई रिपोर्ट 2021-22 के अनुसार दिल्ली में शिक्षा के सभी स्तरों पर सकल नामांकन अनुपात (जीडीआर) और शुद्ध नामांकन अनुपात (एनईआर) अखिल भारतीय स्तर की तुलना में कहीं ज्यादा है। इस तरह से दिल्ली में बच्चे न केवल स्कूल में प्रवेश लेते हैं, बल्कि शिक्षा पूरी भी करते हैं। वर्ष 2022-23 के दौरान सरकारी और सरकार सहायता प्राप्त स्कूलों में नामांकन का हिस्सा दिल्ली के सभी स्कूलों के कुल नामांकन का 41.61 फीसदी रहा है। दिल्ली में 5488 मान्यता प्राप्त विद्यालय है जिनमें 46.29 लाख बच्चों का नामांकन है। दिल्ली सरकार के कुल 1240 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय हैं जो दिल्ली में चल रहे कुल स्कूलों का 22.59 फीसदी है।
छह वर्षों में सीटों की क्षमता में बढ़ोतरी
उच्च शिक्षा निदेशालय के प्रतिभा सह माध्यम से जुड़े वित्तीय सहायता स्कीम के तहत आकलन वर्ष 2021-22 के 10650 विद्यार्थी लाभान्वित हुए। हालांकि, यह योजना अभी दिल्ली उच्च और तकनीकी शिक्षा सहयोग स्कीम (दिल्ली उच्च शिक्षा सहायता ट्रस्ट के तहत) के रूप में संशोधित किए जाने के लिए प्रस्तावित है। यह प्रस्ताव अभी कैबिनेट की मंजूरी के लिए सौंपा गया है। प्रशिक्षण और तकनीकी विश्वविद्यालयों में छह वर्षों में सीटों की क्षमता में बढ़ोतरी हुई है। सीटों की संख्या 2018-19 में 7432 से बढ़कर 19293 हो गई है।
बच्चों के लिए प्रोजेक्ट बॉयस शुरू
सरकार की ओर से सभी स्कूलों में तीसरी से 12वीं तक की कक्षाओं के बच्चों के लिए प्रोजेक्ट वॉयस शुरू किया जा रहा है, ताकि वे बोलकर विचारों को अभिव्यक्ति दे सकें। जीबी पंत इंटीग्रेटेड कांप्लेक्स का निर्माण 526 करोड़ की अनुमानित लागत से किया जा रहा है। इससे डिप्लोमा और डिग्री कार्यक्रमों में 300 विद्यार्थियों को समायोजित करने के लिए 193641 वर्गमीटर क्षेत्र जुड़ेगा। इसके लिए वित्तीय बोली खोली जा चुकी है और कार्य आवंटित कर दिया गया है।
चार अस्पताल होंगे तैयार
राजधानी की स्वास्थ्य सेवाएं अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर होने का दिल्ली सरकार ने दावा किया है। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, अस्पतालों में इस साल 2637 नए बिस्तर जुड़ेंगे। 11 अस्पतालों का निर्माण कार्य चल रहा है। इनमें मादीपुर, सिरसपुर, विकास पुरी और ज्वालापुरी स्थित अस्पताल इस साल बनकर तैयार हो जाएंगे। आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के मुताबिक मादीपुर, विकासपुरी और ज्वालापुरी में तैयार हो रहे अस्पतालों में 691-691 बिस्तर होंगे।
इनमें पहले से 200-200 बिस्तर मौजूद हैं। इसके अलावा सिरसपुर में 2716 बिस्तर का अस्पताल तैयार हो रहा है। यह अस्पताल दो चरणों में बनेगा। पहले चरण में इस साल 1164 बिस्तर मिलेंगे। चारों अस्पतालों को 2024 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सिरसपुर में तैयार हो रहे अस्पताल के बनने के बाद बाहरी दिल्ली के लोगों को नरेला या जहांगीरपुरी जाने की जरूरत नहीं रहेगी। 15 अन्य अस्पतालों में सुधार व विस्तार का कार्य किया जाएगा। इससे करीब छह हजार अतिरिक्त बिस्तर बढ़ेंगे।
शिशु मृत्यु दर देश से आधी
दिल्ली में शिशु मृत्यु दर देश के मुकाबले आधी है। दिल्ली में शिशु मृत्यु दर 1.2 फीसदी है, जबकि देश में यह आंकड़ा 2.8 फीसदी है। मई 2020 में नवजात मृत्यु दर 0.9 फीसदी रही जो भारत में 2 फीसदी थी। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर दिल्ली में 1.4 फीसदी है। देश में यह आंकड़ा 3.2 फीसदी है।
16% खर्च कर रही सरकार
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सरकार स्वास्थ्य पर कुल योजना व्यय का 16.17 फीसदी खर्च कर रही है। 31 मार्च 2023 तक दिल्ली में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में 92 अस्पताल, 39 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 1658 औषधालय, 124 प्रसूति गृह और उप केंद्र, 46 पॉली क्लीनिक, 1040 नर्सिंग होम, 405 विशेष क्लीनिक, स्वैच्छिक संगठन, 19 मेडिकल कॉलेज शामिल थे।
बढ़ा कर संग्रह
कर संग्रह में वर्ष 2022-23 के दौरान 18 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021-22 में दिल्ली ने 3270 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष दर्ज किया था, जो साल 2022-23 में बढ़कर 14457 करोड़ रुपये हो गया है। इसके अलावा राजस्व प्राप्तियों पर ब्याज भुगतान का अनुपात 2012-13 में 11.20 फीसदी पर था, जो घटकर 2022-23 में 5.21 फीसदी रह गया है।
कोरोना काल से पहले की तरह बसों में नहीं बढ़े यात्री
एक साल में बस यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी के बाद भी डीटीसी और क्लस्टर बसें काेरोना काल से पहले का आंकड़ा नहीं छू सकीं हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18, 18-19 व 19-20 की तुलना में 2022-23 में सवारियों की संख्या काफी कम है। डीटीसी के बेड़े में 3937 व क्लस्टर में 3293 बसें हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 में औसत रोजाना 41.41 लाख यात्रियों ने सफर किया।
वहीं, वित्तीय वर्ष 2021-22 में डीटीसी के बेड़े में 3762 और क्लस्टर के बेड़े में 3310 बसें थीं। इसमें से डीटीसी की 85.27 प्रतिशत, जबकि क्लस्टर की 99.1 प्रतिशत बसों का परिचालन में इस्तेमाल हुआ। इस वर्ष औसत रोजाना 25.49 लाख यात्रियों ने सफर किया। ऐसे में वर्ष 2021-22 की तुलना में वर्ष 2022-23 में लगभग 16 प्रतिशत अधिक यात्रियों ने रोजाना औसत सफर किया।
निजी वाहनों का इस्तेमाल
कोरोना काल से पहले 2017-18, 2018-19 व 2019-20 में हर साल औसत 41.51, 42.39 व 51.02 लाख यात्रियों ने सफर किया। कोरोना काल के बाद बहुत से लोग निजी वाहनों का इस्तेमाल करने लगे हैं।
रात्रि बस सेवाओं में बढ़ोतरी
महिलाओं की सुरक्षा के लिए डीटीसी ने रात्रि सेवा में बढ़ोतरी की है। 27 रूटों पर 88 बसें चल रही हैं। इनमें 30 महिला विशेष बसें 30 रूटों पर व्यस्त समय में चलाई जा रही हैं।
वाहनों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी
राजधानी में वित्तीय वर्ष 2021-22 की तुलना में वाहनों की संख्या में वर्ष 2022-23 में 0.34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 31 मार्च 2023 तक दिल्ली में कुल वाहनों की संख्या 79.45 लाख थी। दिल्ली सरकार ने 10 वर्ष के डीजल और 15 वर्ष के पेट्रोल वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया है। इस वजह से दिल्ली में वर्ष 2022-23 तक 62,59,214 वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया। वर्ष 2022-23 के दौरान प्रति 1000 की आबादी पर वाहनों की संख्या 473 रही, जबकि वर्ष 2021-22 में यह 472 थी। वाहनों की संख्या की बात करें तो दिल्ली में सात प्रतिशत कारें व जीप, 67 प्रतिशत दोपहिया और 26 प्रतिशत परिवहन सेवा, मालवाहक आदि से संबंधित वाहन हैं।
परिवहन सेवाओं में किया जा रहा सुधार
परिवहन विभाग ने सभी सार्वजनिक सेवाएं फेसलेस करने की पहल की है। वर्तमान में 47 सेवाएं (12 आरसी, 17 परमिट व फिटनेस, 16 डीएल सेवाएं) फेसलेस हैं। दो अन्य सेवाएं वाहन को बदलने के लिए एलओआई जारी करना और पीएसवी बदलने के लिए प्रमाणपत्र जारी करना। इन दोनों सेवाओं को भी जल्द फेसलेस किया जाएगा।
वन क्षेत्र 23.06% बढ़ा
नई दिल्ली। राजधानी में हरित क्षेत्र बढ़ रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण में सामने आया है कि कुल भौगोलिक क्षेत्र 23.06 प्रतिशत हरित क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली सरकार पारिस्थितिकी और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है। देश के सात प्रमुख बड़े शहरों में दिल्ली का वन क्षेत्र सबसे अधिक 342 वर्ग किलोमीटर है। राज्यों के बीच कुल भौगोलिक क्षेत्र के प्रतिशत हिस्से के रूप में सर्वाधिक वृक्षाच्छादन 9.91 प्रतिशत की दृष्टि से दिल्ली दूसरे स्थान पर है। 13.16 प्रतिशत के साथ पहला स्थान चंडीगढ़ का है।
206 दिन अच्छी श्रेणी में रही हवा
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक वर्ष 2023 में अच्छी हवा (उत्तम, संतोषजनक व मध्यम श्रेणी मिलाकर) के दिनों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस दौरान 206 दिन हवा अच्छी श्रेणी में रही, जबकि वर्ष 2018 में यह संख्या केवल 158 दिन थी। वर्ष 2023 में भी सभी हित धारकों के निरंतर और ठोस प्रयासों ने कुछ वर्षों की तुलना में दिल्ली में सामान्य वायु गुणवत्ता मापदंडों को बेहतर बनाने में मदद की।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि दिल्ली में वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी सड़कों के निर्माण की तुलना में अधिक तेजी से हो रही है। बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियों के अलावा, एनसीआर और पड़ोसी राज्यों में सर्दियों के दौरान कृषि अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण की समस्या और बढ़ जाती है। यह भी सामने आया है कि दिल्ली के पर्यावरण पर विभिन्न मौसम संबंधी घटनाओं का भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। गर्मियों में राजस्थान से आने वाली धूल भरी आंधी से वायु की गुणवत्ता पर और भी ज्यादा दुष्प्रभाव पड़ता है।