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Delhi NCR News: डिमेंशिया की पहचान अब शुरुआती स्तर पर संभव, विशेषज्ञों ने बताए स्क्रीनिंग टूल्स
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एचएमएसई व ईएएसआई जांच से समय रहते पहचान, हल्के लक्षणों को न करें नजरअंदाज : डॉ. ओम प्रकाश
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। डिमेंशिया के मरीजों में बीमारी की पहचान अक्सर तब होती है, जब याददाश्त व रोजमर्रा के कामकाज पर स्पष्ट असर दिखने लगता है। दिल्ली साइकियाट्रिक सोसायटी की ओर से आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि एचएमएसई (हिंदी मेंटल स्टेट एग्जामिनेशन) और ईएएसआई (एवरीडे एबिलिटीज स्केल फॉर इंडिया) जैसे स्क्रीनिंग टूल्स से शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान कर समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है।
आईएचबीएएस के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने बताया कि शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं, जिन्हें परिवार उम्र बढ़ने का सामान्य असर समझकर नजरअंदाज कर देता है, जिससे इलाज देर से शुरू होता है। एचएमएसई स्मरण शक्ति, ध्यान, भाषा व मानसिक क्षमता का आकलन करता है, जबकि ईएएसआई दैनिक कार्यों को कर पाने की क्षमता की जांच करता है।
डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि बार-बार बातें भूलना, एक ही सवाल दोहराना, परिचित लोगों या रास्तों को पहचानने में परेशानी व दैनिक कार्यों में कठिनाई होने पर बिना देरी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से बीमारी की रफ्तार धीमी की जा सकती है और जीवन गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। डिमेंशिया के मरीजों में बीमारी की पहचान अक्सर तब होती है, जब याददाश्त व रोजमर्रा के कामकाज पर स्पष्ट असर दिखने लगता है। दिल्ली साइकियाट्रिक सोसायटी की ओर से आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि एचएमएसई (हिंदी मेंटल स्टेट एग्जामिनेशन) और ईएएसआई (एवरीडे एबिलिटीज स्केल फॉर इंडिया) जैसे स्क्रीनिंग टूल्स से शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान कर समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है।
आईएचबीएएस के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने बताया कि शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं, जिन्हें परिवार उम्र बढ़ने का सामान्य असर समझकर नजरअंदाज कर देता है, जिससे इलाज देर से शुरू होता है। एचएमएसई स्मरण शक्ति, ध्यान, भाषा व मानसिक क्षमता का आकलन करता है, जबकि ईएएसआई दैनिक कार्यों को कर पाने की क्षमता की जांच करता है।
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डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि बार-बार बातें भूलना, एक ही सवाल दोहराना, परिचित लोगों या रास्तों को पहचानने में परेशानी व दैनिक कार्यों में कठिनाई होने पर बिना देरी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से बीमारी की रफ्तार धीमी की जा सकती है और जीवन गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।
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