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Delhi NCR News: स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान अब होगी और आसान
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-एक निजी अस्पताल में अब एमआरआई गाइडेड वैक्यूम-असिस्टेड ब्रेस्ट बायोप्सी तकनीक की शुरुआत
-स्तन कैंसर का लगेगा शुरुआती दौर में पता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण की पहचान अब और जल्दी व आसान तरीके से होगी। राजधानी स्थित एक निजी अस्पताल में अब एमआरआई गाइडेड वैक्यूम-असिस्टेड ब्रेस्ट बायोप्सी तकनीक की शुरुआत हुई है। इससे स्तन कैंसर का पता शुरुआती दौर में हो सकेगा। यह तकनीक खासतौर पर उन मामलों में उपयोगी है, जिसका पता मैमोग्राफी या अल्ट्रासाउंड जैसी सामान्य जांच में नहीं लगाया जा सकता। एमआरआई गाइडेड वैक्यूम-असिस्टेड बायोप्सी एक कम चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया है। इसमें बड़े ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती और मरीज को कम दर्द व जल्दी रिकवरी का फायदा मिलता है। इस तकनीक से स्टेज जीरो या डीसीआईएस (डक्टल कार्सिनोमा इन सिचू) जैसे शुरुआती मामलों की सटीक पहचान संभव हो पाती है। अस्पताल की विशेषज्ञ डॉक्टर ज्योति के अनुसार, कई महिलाओं में स्तन का ऊतक सघन होता है, जिसके कारण शुरुआती स्टेज में कैंसर छिपा रहता है। ऐसे मामलों में एमआरआई आधारित जांच अधिक संवेदनशील और भरोसेमंद मानी जाती है। नई तकनीक की मदद से बेहद छोटे और शुरुआती बदलावों को भी पकड़ा जा सकता है।
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-स्तन कैंसर का लगेगा शुरुआती दौर में पता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण की पहचान अब और जल्दी व आसान तरीके से होगी। राजधानी स्थित एक निजी अस्पताल में अब एमआरआई गाइडेड वैक्यूम-असिस्टेड ब्रेस्ट बायोप्सी तकनीक की शुरुआत हुई है। इससे स्तन कैंसर का पता शुरुआती दौर में हो सकेगा। यह तकनीक खासतौर पर उन मामलों में उपयोगी है, जिसका पता मैमोग्राफी या अल्ट्रासाउंड जैसी सामान्य जांच में नहीं लगाया जा सकता। एमआरआई गाइडेड वैक्यूम-असिस्टेड बायोप्सी एक कम चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया है। इसमें बड़े ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती और मरीज को कम दर्द व जल्दी रिकवरी का फायदा मिलता है। इस तकनीक से स्टेज जीरो या डीसीआईएस (डक्टल कार्सिनोमा इन सिचू) जैसे शुरुआती मामलों की सटीक पहचान संभव हो पाती है। अस्पताल की विशेषज्ञ डॉक्टर ज्योति के अनुसार, कई महिलाओं में स्तन का ऊतक सघन होता है, जिसके कारण शुरुआती स्टेज में कैंसर छिपा रहता है। ऐसे मामलों में एमआरआई आधारित जांच अधिक संवेदनशील और भरोसेमंद मानी जाती है। नई तकनीक की मदद से बेहद छोटे और शुरुआती बदलावों को भी पकड़ा जा सकता है।