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Delhi NCR News: डीवीबी पेंशनर्स का फूटा गुस्सा, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी
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डीवीबी पेंशनर्स का फूटा गुस्सा, मांगें पूरी नहीं होने आंदोलन की चेतावनी दी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली विद्युत बोर्ड (डीवीबी) के पूर्व कर्मचारियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के संगठन पेंशन फाइटर्स ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंका है। संगठन ने दिल्ली पुलिस को 15 दिनों का नोटिस सौंपते हुए 22 जुलाई को टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) के कार्यालय पर धरना देने का ऐलान किया है।
पेंशन फाइटर्स के महासचिव सैयद खालिद अकबर, अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा और संयोजक सुनील गुप्ता ने आरोप लगाया है कि टीपीडीडीएल प्रबंधन एक जनवरी 2006 से कई काडरों की मूल पेंशन का गलत निर्धारण कर रहा है। इसके विपरीत, अन्य उत्तराधिकारी कंपनियों (जैसे बीएसईएस, दिल्ली ट्रांस्को लिमिटेड और आईपीजीसीएल) ने इस विसंगति को सुधार कर सही पेंशन लागू की है। उनका कहना है कि नियमों और आदेशों की गलत व्याख्या के कारण उन्हें अपने ही समकक्षों की तुलना में लगातार कम पेंशन मिल रही है, जिससे उन्हें हर महीने भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। संगठन पिछले 2-3 वर्षों से लगातार प्रबंधन के साथ बैठकें और लिखित प्रतिवेदन दे रहा है, लेकिन टीपीडीडीएल हर बार केवल टाइम स्टडी के नाम पर मामले को टालता आ रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली विद्युत बोर्ड (डीवीबी) के पूर्व कर्मचारियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के संगठन पेंशन फाइटर्स ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंका है। संगठन ने दिल्ली पुलिस को 15 दिनों का नोटिस सौंपते हुए 22 जुलाई को टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) के कार्यालय पर धरना देने का ऐलान किया है।
पेंशन फाइटर्स के महासचिव सैयद खालिद अकबर, अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा और संयोजक सुनील गुप्ता ने आरोप लगाया है कि टीपीडीडीएल प्रबंधन एक जनवरी 2006 से कई काडरों की मूल पेंशन का गलत निर्धारण कर रहा है। इसके विपरीत, अन्य उत्तराधिकारी कंपनियों (जैसे बीएसईएस, दिल्ली ट्रांस्को लिमिटेड और आईपीजीसीएल) ने इस विसंगति को सुधार कर सही पेंशन लागू की है। उनका कहना है कि नियमों और आदेशों की गलत व्याख्या के कारण उन्हें अपने ही समकक्षों की तुलना में लगातार कम पेंशन मिल रही है, जिससे उन्हें हर महीने भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। संगठन पिछले 2-3 वर्षों से लगातार प्रबंधन के साथ बैठकें और लिखित प्रतिवेदन दे रहा है, लेकिन टीपीडीडीएल हर बार केवल टाइम स्टडी के नाम पर मामले को टालता आ रहा है।
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