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‘8100’ रुपये ने भी डुबोई कांग्रेस की लुटिया!

Tue, 20 May 2014 11:39 AM IST
Updated Tue, 20 May 2014 11:39 AM IST
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due to 8100 rupee congress lost in haryana

कांग्रेस का किला जमींदोज करने में भ्रष्टाचार और महंगाई के साथ-साथ राज्य सरकार की वादाखिलाफी ने भी आग में घी का काम किया। श्रमिक संगठनों का आरोप है कि उनके लिए किए गए वायदों से सरकार मुकर गई, जिसके परिणामस्वरूप मजदूर वर्ग ने चुनाव में अपना गुस्सा निकाला।

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श्रमिक संगठनों के इस विश्लेषण को दबी जुबान से कांग्रेस के नेता भी स्वीकार कर रहे हैं। हिंद मजदूर सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष एसडी त्यागी का कहना है कि जब मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कंपनियों में न्यूनतम वेतन 8100 रुपये नहीं करना था तो उन्होंने गोहाना रैली में इसकी घोषणा ही क्यों की।
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आप किसी भी श्रमिक से पूछ लीजिए वह इस मसले पर सबसे ज्यादा दुखी है। क्योंकि 80 फीसदी लोगों को तो यहां हर माह पांच हजार रुपये में गुजारा करना पड़ रहा है। इसका गुस्सा श्रमिकों ने लोकसभा चुनाव में निकाल दिया।

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श्रमिकों की अनदेखी पड़ी भारी

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इसी प्रकार श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शिवचरण लाल शर्मा ने घोषणा की थी कि कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष की जाएगी। लेकिन इसे भी पूरा नहीं करवाया जा सका।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रदेश सचिव बेचू गिरी के मुताबिक यदि 8100 रुपये वाली गलती अब भी नहीं सुधारी गई तो विधानसभा में सत्ताधारी पार्टी के लिए परिणाम और खराब हो सकते हैं।

श्रम राज्य मंत्री के शहर में ईएसआई का बुरा हाल है। अस्पतालों में श्रमिकों को न डॉक्टर मिल रहे हैं और न दवा। फिर मजदूर क्या करें।

मंत्री प्रस्ताव रखें तो समर्थन करने को तैयार: कौशिक

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यह मानता हूं कि पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ लहर थी। लेकिन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की नीयत पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। उन्होंने तो 8100 रुपये न्यूनतम वेतन करने की घोषणा कर दी थी, लेकिन लगता है कि नीचे के लोगों ने उसे लागू नहीं होने दिया।

वैसे यह काम श्रम मंत्री शिवचरण लाल शर्मा का है। वह मुख्यमंत्री को श्रमिकों की समस्याओं का निदान करने के लिए प्रस्ताव दें तो हम सभी विधायक उनका समर्थन करने को तैयार हैं।

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