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डॉक्टरों को काट रहे कुत्ते, रैबीज वैक्सीन तक नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 27 Sep 2017 09:24 PM IST
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इलाज की आस में हर कोई अस्पताल की दहरी तक पहुंचता है। लेकिन शायद आपको यकीन न हो कि मरीजों को जीवन देने वाले डॉक्टरों का जीवन खुद संकट में है। ये हाल कहीं और के नहीं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली के हैं।
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जहां चिकित्सा क्षेत्र में हर दिन नए रिकॉर्ड बनाए जाते हैं। हर दिन लाखों मरीजों की भीड़ चार दर्जन से भी ज्यादा सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचती है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम कब तक काम चलाऊ बना रहेगा।
दरअसल, कनॉट प्लेस स्थित लेडी हॉर्डिंग मेडिकल कॉलेज के इस अस्पताल में लंबे समय से रैबीज वैक्सीन नहीं है। जबकि अस्पताल परिसर में अवारा कुत्तों की भरमार है। गौर करने वाली बात यह है कि इस अस्पताल के एक नहीं, बल्कि तीन महिला डॉक्टर कुत्तों की शिकार बन चुकी हैं। वैक्सीन नहीं है तो लगवाने के लिए इन्हें डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल जाना पड़ता है।
दरअसल, कनॉट प्लेस स्थित लेडी हॉर्डिंग मेडिकल कॉलेज के इस अस्पताल में लंबे समय से रैबीज वैक्सीन नहीं है। जबकि अस्पताल परिसर में अवारा कुत्तों की भरमार है। गौर करने वाली बात यह है कि इस अस्पताल के एक नहीं, बल्कि तीन महिला डॉक्टर कुत्तों की शिकार बन चुकी हैं। वैक्सीन नहीं है तो लगवाने के लिए इन्हें डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल जाना पड़ता है।
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कई बार लिख चुके हैं शिकायत
रेजीडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विवेक चौकसे बताते हैं कि रैबीज वैक्सीन लंबे समय से अस्पताल में नहीं है। डॉक्टरों को काटने के बाद आरएमएल में ले जाकर वैक्सीन लेना पड़ा। कई बार प्रबंधन को भी शिकायत की जा चुकी है। लेकिन डॉक्टरों की सुरक्षा पर गंभीरता कतई नहीं दिखाई दे रही।
रेजीडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विवेक चौकसे बताते हैं कि रैबीज वैक्सीन लंबे समय से अस्पताल में नहीं है। डॉक्टरों को काटने के बाद आरएमएल में ले जाकर वैक्सीन लेना पड़ा। कई बार प्रबंधन को भी शिकायत की जा चुकी है। लेकिन डॉक्टरों की सुरक्षा पर गंभीरता कतई नहीं दिखाई दे रही।
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संक्रमण के शिकार हो रहे हैं डॉक्टर
अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि वैक्सीन न होने की वजह से उन्हें संक्रमण का शिकार तक होना पड़ रहा है। अक्सर मरीजों को सुई लगाते वक्त डॉक्टरों को लग जाती है। जिसकी वजह से डॉक्टरों को हेपेटाइटिस इम्यूनोग्लोबिन एक इंजेक्शन है, जिसकी डोज लेना जरूरी है। तभी संक्रमण से बचा जा सकता है।
लेकिन अस्पताल में फिलहाल यह डोज भी उपलब्ध नहींहै। बड़ी मजबूरी यह है कि टीका लगवाने के लिए डॉक्टरों को पहले अपने निदेशक कार्यालय जाना होता है और वहां से आरएमएल के निदेशक के नाम लेटर लेना पड़ता है। ऐसे में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के दावे कैसे किए जा सकते हैं?
अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि वैक्सीन न होने की वजह से उन्हें संक्रमण का शिकार तक होना पड़ रहा है। अक्सर मरीजों को सुई लगाते वक्त डॉक्टरों को लग जाती है। जिसकी वजह से डॉक्टरों को हेपेटाइटिस इम्यूनोग्लोबिन एक इंजेक्शन है, जिसकी डोज लेना जरूरी है। तभी संक्रमण से बचा जा सकता है।
लेकिन अस्पताल में फिलहाल यह डोज भी उपलब्ध नहींहै। बड़ी मजबूरी यह है कि टीका लगवाने के लिए डॉक्टरों को पहले अपने निदेशक कार्यालय जाना होता है और वहां से आरएमएल के निदेशक के नाम लेटर लेना पड़ता है। ऐसे में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के दावे कैसे किए जा सकते हैं?