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मिसाल-बेमिसालः अस्पताल से 13 किमी दूर है घर, लेकिन पैरों में बंधी थीं कर्तव्य की ‘बेड़ियां’

Sun, 06 Sep 2020 05:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली   Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 06 Sep 2020 05:45 AM IST
सार

  • करीब छह माह कोविड मरीजों की सेवा करने के बाद घर पहुंचे डॉक्टर अजीत जैन
  • फर्ज निभाने और परिवार को संक्रमण से बचाने के लिए दूर रहने में ही समझी भलाई

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Doctor Ajit Jain returned home after serving covid patients for nearly six months
घर पहुचने पर हुआ कोरोना योद्धा का स्वागत.... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना के खिलाफ जंग में चिकित्सा जगत पहली पंक्ति में खड़ा है। परिवार की परवाह किए बगैर स्वास्थ्यकर्मी दिन-रात अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं डॉक्टर अजीत जैन, जो शनिवार को करीब छह माह बाद अपने घर पहुंचे।

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ऐसा नहीं कि उनका घर दूर था। महज 13 किलोमीटर दूर कमला नगर में उनका आवास है, लेकिन सेवा धर्म निभाने और परिवार को संक्रमण से बचाने के लिए वह परिवार से दूर रहे। आंखों में खुशी के आंसू लिए परिवार ने उनका स्वागत किया।
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डॉ. अजीत जैन ताहिरपुर के राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कोविड केयर नोडल अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। वह अस्पताल में कोरोना के मरीजों की देखभाल का जिम्मा संभालते हैं।
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लगातार 170 दिन काम करने के बाद जब वह घर पहुंचे तो उनका सम्मान ऐसे किया गया कि जैसे कोई सैनिक सीमा से जंग जीतकर लौटा हो। उनकी आरती उतारी गई और तिलक लगाया गया। 

सिर्फ एक बार निकले अस्पताल से बाहर
उन्होंने बताया कि अक्सर उनकी बेटी आरुषि जैन यही पूछा करती थी कि पापा घर कब आओगे। उनके अस्पताल में 17 मार्च को कोरोना के पहले 10 मरीज भर्ती हुए थे। तब से वह सिर्फ एक बार अस्पताल से बाहर निकले। उन्हें 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना था। अप्रैल और मई में काफी मरीज भर्ती होने लगे तो दिन-रात उनकी सेवा में रहना पड़ता था।

सिर्फ रात में 1 से 2 बजे की बीच ही 15 मिनट के लिए अपने परिवार से बात करते थे। इस दौरान अस्पताल को ही उन्होंने अपना घर बना लिया था। स्वस्थ होकर अपने घर लौटे मरीजों के वह लगातार संपर्क में हैं। यदि उन्हें कोई परेशानी होती है तो अस्पताल में बनाए गए पोस्ट कोविड केयर क्लीनिक में उनका इलाज किया जाता है। 1500 से ज्यादा मरीजों को छुट्टी दी जा चुकी है। एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से वह सभी मरीजों के साथ जुड़े रहते हैं। 

केजरीवाल कर चुके हैं सम्मानित
डॉ. जैन के मुताबिक, राजीव गांधी ही एक अस्पताल है, जिसमें सबसे कम मरीजों की मौत हुई। इससे पहले डॉ. जैन को कोरोना काल में बेहतरीन सेवाओं के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है।

बेटी बोली-परिवार को रहने लगी थी चिंता, अब खुश हैं..

डॉ. जैन की बेटी आरुषि और अदिति फरीदाबाद के मानव रचना संस्थान से बीडीएस की पढ़ाई कर रही हैं। बेटा अजिताभ जेईई व नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा है। दो दिन पहले ही उसने नीट की परीक्षा दी है।

बड़ी बेटी आरुषि बताती हैं कि जब उन्हें पता चला कि उनके पिता को कोविड का नोडल अधिकारी बनाया गया है तो उन्हें लगा कि उनके पिता जल्द ही घर आ जाएंगे, लेकिन दिन बीतते रहे। उन्हें अपने पिता की काफी चिंता होने लगी थी। आरुषि बताती हैं कि पूरे छह महीने एक डर जरूर बना रहा, लेकिन अब वह खुश हैं कि कुछ दिन की छुट्टी लेकर उनके पिता घर आ गए हैं।

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