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गुरुग्राम की दो बेटियों ने किया देश का नाम रोशन, एक बनी गूगल डूडल, दूसरी लिम्का बुक में हुई दर्ज

Sat, 16 Nov 2019 05:04 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 16 Nov 2019 05:04 PM IST
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Divyanshi Singhal and Sangeeta Bahl made Gurugram proud by google doodle and limca book
संगीता बहल (बाएं), दिव्यांशी सिंघल (दाएं) - फोटो : सोशल मीडिया

गुरुग्राम की दो बेटियों ने गुरुवार को देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया। बाल दिवस पर जहां सात साल की दिव्यांशी सिंघल की पेंटिंग को गूगल ने डूडल बनाया तो वहीं संगीता बहल (53) सबसे अधिक उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली महिला बन गई हैं। उनके इस कीर्तिमान को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया है। 

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बड़ी भावुक है दिव्यांशी की पेंटिंग
दिव्यांशी छुट्टियों में अपनी नानी के घर लखनऊ गई हुई थी। वहां उनसे अपनी नानी के घर पर खड़े पेड़ों को कटते देखा। इस घटना के बाद वह बहुत भावुक हो गई क्योंकि उसे स्कूल में पेड़ों को बचाना सीखाया गया था। उसे बताया गया था कि पेड़ काटने से ही दुनिया में ऑक्सीजन की कमी हो रही है। 
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इस पर दिव्यांशी की मां ने उसे एक ड्रॉइंग शीट दी और कहा, तुम्हारे दिमाग में पेड़ कटने के बाद जो भी आ रहा है उसे इस पर बनाकर दिखाओ। उसने अपनी ड्रॉइंग में पेड़ों को जूते पहने और उन पर पंख भी लगा दिए ताकि जब उन्हें काटा जाए तो वह वहां से अपनी जान बचकर भाग पाएं। 
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दिव्यांशी की मां ने अपनी बेटी की इस तस्वीर को गूगल द्वारा आयोजित कॉम्पिटिशन 'द वॉकिंग ट्री' में भेज दी। जिसमें दिव्यांशी की पेंटिंग को 1.1 लाख पेंटिंग्स में से सबसे शानदार मानी गई। इस पर गूगल ने बाल दिवस के मौके पर दिव्यांशी की पेंटिंग को डूडल में जगह दी। साथ ही दिव्यांशी को राष्ट्रीय विजेता बनने पर गूगल पांच लाख रुपये की कॉलेज और 2 लाख रुपये की स्कूल स्कॉलरशिप देगा।


47 की उम्र में भी देश का नाम रौशन कर चुकी हैं संगीता 
संगीता बहल ने इससे पहले भी देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने 47 की उम्र में पिछले साल 29,035 फुट ऊंची माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था। संगीता ने बताया कि माउंट एवरेस्ट के शीर्ष से दुनिया बेहद सुंदर नजर आती है। उन्होंने अपनी सफलता को लेकर बताया कि उन्हें यहां तक पहुंचने के लिए बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इस कठिन चढ़ाई के लिए बेहतर ट्रेनिंग के साथ साथ मानसिक मजबूती की भी बहुत जरूरत होती है।

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