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डीजल कैब पर बैन से बैकफुट पर बीपीओ इंडस्ट्री, जानिए वजह

Wed, 04 May 2016 10:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Wed, 04 May 2016 10:15 AM IST
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Diesel cab on the back foot from the ban on the BPO industry,
बीपीओ

दिल्ली-एनसीआर में डीजल कैब पर बैन से साइबर सिटी का बीपीओ सेक्टर बैकफुट पर आ गया है। बीपीओ में काम करने वालों की आवाजाही का सबसे बड़ा माध्यम कैब है। यहां चलने वाली करीब 30 हजार कैब में 65 फीसदी डीजल इंजन वाली हैं।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डीजल कैब के पहिए पूरी तरह से थम गए हैं। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद से आने-जाने वाले बीपीओ कर्मचारियों को अपने कार्यालय और फिर घर तक पहुंचने का संकट खड़ा हो गया है।
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सबसे अधिक परेशानी तो नाइट शिफ्ट वालों को होने लगी है। रात की शिफ्ट में करीब 20 हजार महिलाएं गुडग़ांव के बीपीओ में काम करती हैं। उन्हें घर छोडने में दिक्कत आने लगी है। डीजल कैब पर बैन बीपीओ सेक्टर के लिए एक और बड़ी मुसीबत है। इस सेक्टर के जानकारों का कहना है कि बीपीओ कंपनियों को समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें।

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बीपीओ में 75 हजार से अधिक महिला कर्मचारी

Diesel cab on the back foot from the ban on the BPO industry,
डीजल टैक्सी बैन - फोटो : ANI

उनके लिए सबसे बड़ी दिक्कत नाइट शिफ्ट को लेकर है। यहां के बीपीओ में यूएसए शिफ्ट में काम सबसे अधिक होता है। ऐसे में रात के समय कैब के अलावा बीपीओ कंपनियों के पास और कोई साधन नहीं हैं।

आईटी-बीपीओ विशेषज्ञ सचिन गुप्ता का कहना है कि यूएसए शिफ्ट शाम 6:30 बजे से शुरू होती है और रात 3:30 बजे समाप्त होती है। उनका कहना है कि रात साढ़े तीन बजे कर्मचारियों को ड्रॉप करने के लिए कैब के अलावा कोई और साधन नहीं है। यही बात बीपीओ कंपनियों को काफी परेशान कर रही है। 

गुडग़ांव का बीपीओ सेक्टर पिछले एक दशक से परेशान है। बीपीओ कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें वैश्विक दबाव पहले से ही झेलना पड़ा रहा है। बीच-बीच में इस प्रकार के आंतरिक दबाव से स्थिति दयनीय होती जा रही है।

एक बीपीओ कंपनी में अधिकारी शैलेन्द्र कुमार का कहना है कि सीएनजी कैब का काफी अभाव है। इस कारण कंपनी कर्मचारियों को दिल्ली-एनसीआर के शहरों से गुडग़ांव लाना और छोडना काफी मुश्किल हो गया है।

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