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सादिया देहलवी को सच्ची दिल्ली-वाली के रूप में याद रखेगी दिल्ली

Fri, 07 Aug 2020 06:16 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Fri, 07 Aug 2020 06:16 PM IST
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Delhi will remember Sadia Dehalvi as true Delhi-wali
Sadia Dehalvi - फोटो : सोशल मीडिया
कैंसर से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार दिल्ली की मशहूर लेखिका, इतिहासकार और समाजिक कार्यकर्ता सादिया देहलवी बीते बुधवार दुनिया को अलविदा कह गईं। उनके निधन की जानकारी मिलने पर उनको चाहने वालों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी सादिया देहलवी के असामयिक निधन पर दुख जताया है। उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली उनको हमेशा आम लोगों के इतिहासकार और सच्ची दिल्ली-वाली के रूप में याद रखेगी।
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सादिया देहलवी का लंबे समय से दिल्ली के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। बुधवार को उन्होंने अपने घर पर अंतिम सांस ली। वह अपने बेटे अरमान अली देहलवी के साथ निजामुद्दीन पूर्व में रहती थीं। साहित्यिक परिवार में जन्मीं सादिया ने महिलाओं की उर्दू पत्रिका बानो का संपादन किया था। उनके दादा हाफिज यूसुफ देहलवी ने 1938 में एक उर्दू साहित्यिक मासिक पत्रिका शमा की शुरुआत की थी। जहां से उन्हें लिखने का शौक हुआ।
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सादिया का नजदीक से जानने वालों का कहना है कि वह खाने की शौकीन थीं इसलिए उन्होंने 2017 में दिल्ली के व्यंजनों के इतिहास पर एक किताब जैस्मीन एंड जिन्स - यादें और व्यंजनों की मेरी दिल्ली लिखी। इसको खूब पसंद किया गया। वह दिवंगत लेखक सुखवंत सिंह की करीबी दोस्त थीं। इसका जीता जागता उदाहरण सुखवंत सिंह की लिखी किताब नॉट ए नाइस मैन टु नो है। इसके जिल्द पर सुखवंत सिंह ने साजिया की तस्वीर छापी थी। बाद में साजिया ने अम्मा एंड फैमिली सहित कई डॉक्यूमेंट्री और टेलीविजन कार्यक्रमों का निर्माण भी किया। इसके अलावा पटकथा लेखन में भी उन्हें महारत हासिल थी। उनके निधन पर कई खास लोगों ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है।
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- सादिया देहलवी को कैंसर ने जरूर हरा दिया, लेकिन उनकी बेबाक छवि हमेशा याद रहेगी। सादिया पूरी तरह से स्वतंत्र विचारों वाली महिला थीं। जिन्होंने इस पूरे समाज को भरपूर प्यार दिया और लोगों को सपने देखना सिखाया। ऐसे दिल्ली वाले अब शायद ही दोबारा देखने को मिलेंगे।

- अभिनंदिता दयाल माथुर, समाजसेवी

- सादिया ने इतने कम वक्त में दुनिया को अलविदा कहकर अपने चाहने वालों का दिल तोड़ दिया है। लेकिन सादिया को जो लोग जानते और मानते हैं, उनको यह पता है कि वह स्वयं स्वच्छंद सोच रखने वाली महिला थीं और दूसरों से भी यही अपेक्षा रखती थीं कि वह भी स्वतंत्र सोच रखे। 

-  नीलांजना रॉय, लेखिका

- मेरी अजीज दोस्त सादिया देहलवी इस तरह अचानक दुनिया छोड़ कर चली गईं, इस बात से स्तब्ध हूं। उनके साथ एक समारोह में बिताए पलों को याद कर रहा हूं। इनके साथ मेरी कुछ तस्वीरें हैं, जिन्हें देख रहा हूं। उन्होंने अपनी बात को हमेशा बेबाकी के साथ रखी। जिसके कारण दुनिया उनसे प्यार करती है।
 - सलमान निजामी, लेखक

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