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दिल्ली: लालकिला नुकसान मामले में दीप सिद्धू को मिली जमानत, जानिए जज ने फैसला देते हुए क्या कहा
Tue, 27 Apr 2021 12:23 AM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Tue, 27 Apr 2021 12:23 AM IST
सार
अदालत ने एक ही समान अपराध मामले में उसे गिरफ्तार करने पर पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह उसे एक मामले में जमानत पर बाहर आने से रोकने के प्रयास हैं। अदातल ने कहा यह आरोपी के अधिकारों का हनन है।
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लाल किले पर हिंसा का आरोपी दीप सिद्धू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अदालत ने ऐतिहासिक स्मारक लाल किले को नुकसान पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार दीप सिद्धू को जमानत प्रदान कर दी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने यह मामला दर्ज किया था। अदालत ने एक ही समान अपराध मामले में उसे गिरफ्तार करने पर पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह उसे एक मामले में जमानत पर बाहर आने से रोकने के प्रयास हैं। अदातल ने कहा यह आरोपी के अधिकारों का हनन है।
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तीस हजारी अदालत स्थित मुख्य मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट साहिल गुप्ता ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी से पहले ही 14 दिन रिमांड में पूछताछ हो चुकी है और वह करीब 70 दिन से न्यायिक हिरासत में है। उन्होंने कहा कि जब आरोपी को इसी तरह के आरोप में सत्र न्यायाधीश ने एक मामले में जमानत प्रदान कर दी है ऐसे में उसे जमानत न देना उसकी स्वतंत्रता का हनन होगा।
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अदालत ने अभियोजन पक्ष के जमानत न देने के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि स्पष्ट है कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और जब उसे 17 अप्रैल को सुबह जमानत प्रदान की गई और उसे जेल से रिहा होना था लेकिन जांच एजेंसी ने उसे तुरंत दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लिया जबकि दोनों मामलों में आरोप एक ही समान हैं। अदालत ने उसकी गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपी 9 फरवरी से जेल में है लेकिन पुलिस ने इस अवधि में कुछ नहीं किया।
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अदालत ने कहा कि यह सरासर पहले मामले में उसे मिली जमानत के आधार पर उसे जेल से बाहर आने से रोकने का प्रयास है। यह संविधान में व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है। अदालत ने इसे जांच अधिकारी की शातिर और भयावह कार्रवाई बताते हुए इसे आपराधिक प्रक्रिया के साथ धोखाधड़ी बताया है। अदालत ने कहा कि सिद्धू को जेल में रखने का कोई आचित्य नहीं है।
अदालत ने सिद्धू की जमानत 25,000 रूपये के व्यक्तिगत मुचलके व दो अन्य जमानत राशि पर मंजूर की है। राशि के जमानतदार के साथ इतनी ही राशि का व्यक्तिगत बांड प्रस्तुत करने पर जमानत दी। अदालत ने उसे गवाहों को प्रभावित न करने, जांच में सहयोग करने इत्यादि का भी आदेश दिया है।
इससे पहले बचाव पक्ष के अधिवक्ता अभिषेक गुप्ता ने तर्क रखा कि जांच एजेंसी का आचरण प्रथम दृष्टया अवैध और मनमाना था और यह नियम कानून का सरासर दुरुपयोग था। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को जमानत मिलते ही उसी दिन गिरफ्तारी से स्पष्ट है कि पुलिस बिना कारण उनके मुवक्किल को जेल में रखना चाहती है।