दिल्ली प्रदूषण: अभी से करने होंगे रोकथाम के उपाय, जानिए केजरीवाल ने केंद्र को क्या दी पराली प्रबंधन की सलाह
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से अपील की है कि वह दिल्ली के आसपास के राज्यों को कृषि भूमि पर निशुल्क बायो डीकंपोजर छिड़काव करवाने को कहे, ताकि वायु प्रदूषण को कम किया जा सके बायो डीकंपोजर के छिड़काव से पराली जलाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
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राजधानी दिल्ली में प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार अभी से सचेत हो गई है और वायु गुणवत्ता को बिगड़ने से बचाने के संभावित उपायों पर मंथन शुरू कर दिया है। दरअसल हर साल अक्तूबर से अप्रैल के बीच दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब से खतरनाक और गंभीर स्तर तक पहुंच जाता है। इससे लोगों की जान पर बन आती है। इसके पीछे स्थानीय व मौसमी कारकों के अलावा पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना बड़ी वजह है।
हालांकि दिल्ली सरकार पराली जलाने को मुख्य वजह मानती है और यह मुद्दा हरियाणा और दिल्ली में अक्सर राजनीतिक टकराव के हालात बना देता है। ऐसे में सीएम अरविंद केजरीवाल ने प्रदूषण की रोकथाम के लिए अभी से इंतजाम करने की अपील की है ताकि आने वाली सर्दियों में दमघोटू हवा से बचा जा सके।
We appeal to the Centre to ask state govts to spray the bio-decomposer on farmland for free, it is very reasonable. The stubble need not be burnt again. I will meet the Union Environment Minister soon & request him for his personal intervention: Delhi CM Arvind Kejriwal pic.twitter.com/qXQNVmS754
— ANI (@ANI) September 13, 2021
केजरीवाल ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह दिल्ली के आसपास के राज्यों को कृषि भूमि पर निशुल्क बायो डीकंपोजर छिड़काव करवाने को कहे, ताकि वायु प्रदूषण को कम किया जा सके। बायो डीकंपोजर के छिड़काव से पराली जलाने की आवश्यकता नहीं रहेगी। बायोडीकंपोजर उसे गला देता है। उन्होंने कहा कि इस सबंध में वह शीघ्र ही केंद्रीय पर्यावरण मंत्री मिलेंगे और उनसे प्रार्थना करेंगे कि वह इस मामले में व्यक्तिगत तौर पर हस्तक्षेप करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता 10 अक्तूबर के आसपास खराब होने लगती है और नवंबर अंत तक गंभीर स्थिति तक पहुंच जाती है। इसकी मुख्य वजह पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना है। उन्होंने बताया कि पराली की समस्या का समाधान करने के लिए पिछले साल दिल्ली सरकार ने बाय डीकंपोजर छिड़काव कर बेहतरीन उपाय निकाला था।
इसे पूसा इंस्टिट्यूट ने बनाया। इस बायोडीकंपोजर के घोल को दिल्ली के आसपास के खेतों में छिड़का और बेहतर नतीजे देखने को मिले। ऐसे में हमारी मांग है कि केंद्र सरकार पड़ोसी राज्यों को ऐसी ही व्यवस्था करने के लिए कहे, ताकि राजधानी को गंभीर वायु प्रदूषण से बचाया जा सके।
Delhi's air quality will deteriorate again around 10th Oct & continue that way till Nov end, mainly due to stubble burning in neighbouring states. Last year, Delhi govt found a solution. Pusa Insititute made a bio-decomposer. It gave encouraging results: Delhi CM Arvind Kejriwal pic.twitter.com/qBA2LbCRJw
— ANI (@ANI) September 13, 2021
गौरतलब है कि वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली पूरी सर्दियों में रेड जोन में रहती है, चूंकि इस दौरान पड़ोसी राज्यों में धान कटाई के बाद बड़े पैमाने पर पराली जलाने की गतिविधियां होती हैं। खासकर हरियाणा-पंजाब में धान की बड़े पैमाने पर खेती होती है, ऐसे में किसानों के पास पराली उपचार का भी कोई और विकल्प नहीं है। हालांकि वहां की राज्य सरकारों ने पराली जलाने पर जुर्माने और केस दर्ज करवाने जैसे प्रावधान कर रखे हैं, बावजूद इसके इस समस्या पर लगाम नहीं लग सकी है।
दिल्ली में न पराई पराली जलाई जाती है और ना ही ईटों के भट्ठे चलते हैं, इसके बावजूद दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि फिर दिल्ली में प्रदूषण कीवजह आखिर क्या है। दरअसल दिल्ली में छोटी-बड़ी हजारों औद्योगिक इकाइयां हैं, जिनमें बड़ी संख्या में कोयला इस्तेमाल होता है। बदरपुर थर्मल पावर जैसे प्लांट हैं, दिल्ली में ढाबे हों या बड़े फाइव स्टार होटल, हर जगह तंदूरी खाना बनाने को लेकर कोई सवाल नहीं किया जाता। लाखों दोपहिया और चार पहिया वाहन हैं, हर दिन नई कारें सड़कों पर आ रही है। इनके अलावा एनसीआर के दिल्ली से सटे शहर भी गंभीर प्रदूषित इलाके हैं, चाहे वह गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी, भिवाड़ी हो या गाजियाबाद और बुलंदशहर।
मौसमी परिस्थितियां भी अहम वजह
हवा की गति : हवा की रफ्तार का प्रदूषण पर बहुत प्रभावी असर होता है। हवा की गति जितनी अधिक होती है प्रदूषण के साफ होने का स्तर भी उसी अनुपात में बढ़ता है।
हवा की दिशा : हवा की रफ्तार की ही तरह हवा की दिशा भी एक कारक है। खास तौर पर उत्तर-पश्चिम की ओर चलने वाली हवा के कारण पंजाब-हरियाणा के खेतों से आनेवाला पराली का धुआं भी दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ाता है। दिसंबर-जनवरी में पूर्वी दिशा की ओर से हवा बहती है और इस कारण दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण मैदानी इलाकों की ओर बढ़ता है।
तापमान: प्रदूषण का निर्णायक कारण तापमान भी होता है। उत्तर भारत में ठंड के मौसम में प्रदूषण अपने सर्वोच्च स्तर पर होता है। इसी तरह से दिन की तुलना में रात का वक्त प्रदूषण के लिहाज से अधिक बुरा होता है। तापमान कम होने की स्थिति में जमीन से प्रदूषण का स्तर फैल नहीं पाता और यह वातावरण में ही व्याप्त रहता है।
बारिश और आर्द्रता: प्रदूषण को साफ करने का अहम कारक बारिश और आर्द्रता भी है। बारिश तेजी से हवा को साफ कर देती है। आर्द्रता के कारण सर्दी के मौसम में कुहासा बनने लगता है और फॉग प्रदूषण के लिहाज से बुरा होता है।
पश्चिमी विक्षोभः प्रदूषण को कम करने या स्थिर करने के लिहाज से पश्चिमी विक्षोभ महत्वपूर्ण होता है। इसके कारण हिमालय क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी होती है। पर्वतीय इलाकों से हवा जब मैदान की तरफ बढ़ती है तो गति में कमी आती है। हालांकि, पर्वतीय क्षेत्र से आनेवाली हवाओं की रफ्तार दिल्ली-एनसीआर की हवा को भी आगे बढ़ते हुए साफ करती जाती है।
दिल्ली सरकार ने किए प्रदूषण की रोकथाम के उपाय
1. स्माग टावर का उद्घाटन
दिल्ली में वायु प्रदूषण के खिलाफ जंग के लिए सीएम अरविंद केजरीवाल ने गत 23 अगस्त को कनाट प्लेस में देश के पहले स्माग टावर का उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि इस तकनीक को दिल्ली सरकार ने अमेरिका से आयात किया है। यह टॉवर 24 मीटर ऊंचा है और एक किलोमीटर दायरे की हवा को साफ करेगा। हर सेकेंड में 1000 क्यूबिक मीटर हवा को साफ करेगा और पीएम 2.5, पीएम 10 के स्तर को कम करेगा। स्माग टावर दूषित हवा को अपने अंदर खीचेंगा और साफ हवा को 10 मीटर की ऊंचाई पर छोड़ेगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले जनवरी 2020 में केंद्र सरकार को आनंद विहार में प्रदूषण कम करने के लिए एक स्माग टावर बनाने और दिल्ली सरकार को तीन महीने में कनाट प्लेस में इस तरह की एक और टावर स्थापित करने का निर्देश दिया था। अगस्त में शीर्ष अदालत ने इन टावरों के निर्माण को पूरा करने में समय सीमा से चूकने पर केंद्र और राज्य सरकार को फटकार भी लगाई थी।
2. ई-वाहन नीति
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशानुसार दिल्ली में ई-वाहन नीति अधिसूचित की जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि 2024 तक जितने भी वाहन खरीदे जाएं, उनमें कम से कम 25फीसदी इलेक्ट्रिकहों। सब्सिडी का प्लान बनाया गया है। कोई दोपहिया या तीन पहिया वाहन खरीदता है तो करीब 30 हजार, जबकि चार पहिया वाहन पर करीब 1.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। वाहनों पर कोई रोड टैक्स, पंजीकरण शुल्क नहीं लगेगा। दिल्ली सरकार ने यह भी तय किया है कि अगले छह माह बाद जो भी वाहन किराये पर लिए जाएंगे, वे इलेक्ट्रिक होंगे। इसके साथ ही राजधानी क्षेत्र में चल रहे तमाम मौजूदा वाहनों को चरणबद्ध तरीके से ई-वाहनों में शिफ्ट करने की योजना है।
नीति के प्रावधान
- निजी कार, स्कूटर, बाइक ही नहीं, बल्कि ट्रक, टेंपो, बस और थ्री व्हीलर को भी ई-वाहन में ही शिफ्ट करें।
- मेट्रो फीडर बस सर्विस और डिलीवरी फ्लीट यानी ओला-उबर सरीखी कैब सर्विस को भी इलेक्टिक वाहन में बदला जाएगा।
- इलेक्टिक वाहनों के लिए चार्जिंग और स्वैपिंग स्टेशन भी जल्द तैयार करने को कहा गया है।
दिल्ली में वाहनों का प्रदूषण कम करने के लिए दिल्ली सरकार 2015 से सम-विषम फार्मूला लेकर आई। इसके तहत एक दिन सम नंबर वाले और दूसरे दिन विषम नंबर वाले ही सड़कों पर उतरेंगे। इससे हर दिन आधे वाहन ही सड़कों पर आए और वायु प्रदूषण पर कुछ हद तक अंकुश लगा।