गजब! जेल में बंद इच्छाधारी बाबा को नहीं ढूंढ़ पाई पुलिस
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दिल्ली पुलिस का हाल भी गजब है। जिस आरोपी को पुलिस ढूंढकर अदालत में पेश करने में नाकाम रही वह बीते चार साल से जेल की सलाखों के पीछे था।
आरोपी की तलाश न कर पाने की वजह से हाईकोर्ट में एक केस की सुनवाई कई बार टाली जा चुकी है और पुलिस ने उसे फरार घोषित कर रखा था।
वहीं, जब पुलिस को आरोपी के जेल में होने की सूचना मिली तो वह सन्न रह गई। इस बात को लेकर कोर्ट ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
बाबा की गिरफ्तारी पर लूटी थी वाहवाही
शिव मूर्ति द्विवेदी उर्फ इच्छाधारी बाबा पिछले करीब चार वर्ष से जेल में है, लेकिन दिल्ली पुलिस की अमर कॉलोनी थाने वाले उसे बाहर ढूंढ़ती फिर रही थी।
यही नहीं, पुलिस ने हाईकोर्ट में रिपोर्ट दाखिल कर दी कि बाबा का पता नहीं चल रहा है। अदालत ने जब बाबा के खिलाफ वारंट जारी कर दिए तब जेल में जाकर उसे तामील कराया।
दिलचस्प बात यह है कि इसी इच्छाधारी बाबा की गिरफ्तारी पर दिल्ली पुलिस ने खूब वाहवाही लूटी थी और उसकी गिरफ्तारी को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया था।
देह व्यापार का गिरोह चलाता था बाबा
बाबा को साकेत थाना पुलिस ने कॉमनवेल्थ गेमों से पहले वर्ष 2010 में गिरफ्तार कर एक बड़े देह व्यापार गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया था। तब से बाबा तिहाड़ जेल में है। बाबा पर करीब सात मामले दर्ज थे। उनमें से एक मामला गढ़ी क्षेत्र का था।
चोरी और चोरी के सामान प्राप्त करने के इस मामले के खिलाफ बाबा ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। जेल में होने के कारण वह अदालत में पेश नहीं हो पाया।
अदालत ने कई बार सुनवाई स्थगित की और पुलिस को नोटिस जारी कर उसका पता लगाने को कहा। पुलिस ने रिपोर्ट में कहा कि गढ़ी स्थित बाबा के निवास पर वह नहीं मिला।
एक वारंट ने खोल दी पुलिस की पोल
न्यायमूर्ति सुनील गौड़ ने बाबा के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिए। अब पुलिस पर वारंट तामील करवाने की जिम्मेदारी आई तो पुलिस अधिकारी भी हरकत में आ गए।
बाबा को ढूढ़ निकाला और जेल में पहुंच कर वारंट की तामील करवाई। सोमवार को जेल प्रशासन ने बाबा को कोर्ट में पेश किया। बाबा के मिल जाने पर अदालत ने उसके खिलाफ जारी वारंट को रद्द कर दिया।
लेकिन पुलिस इस बात का स्पष्टीकरण नहीं दे पाई कि आखिर उसे बाबा के जेल में होने का पता क्यों नहीं चला?