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दिल्ली : सेप्टिक टैंक में सफाई के लिए उतरे दो मजदूरों की मौत, परिजनों का हंगामा

Sat, 27 Mar 2021 03:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 27 Mar 2021 03:27 AM IST
सार

  • पटपड़गंज के पर्ल ग्रांड बैंक्वेट हॉल में हादसा; अभी कारण का खुलासा नहीं
  • नहीं थे सुरक्षा उपकरण; पुलिस ने दर्ज किया लापरवाही का मामला

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 Delhi News : Two people died while cleaning septic tank
प्रेमचंद और लोकेश... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र स्थित पर्ल ग्रांड बैंक्वेट हॉल में बृहस्पतिवार रात सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे लोकेश (35) और प्रेमचंद (45) की मौत हो गई। दोनों मजदूर त्रिलोकपुरी 8 ब्लॉक में परिवार के साथ रहते थे। दमकल की टीम ने उन्हें टैंक से निकालकर पास के अस्पताल पहुंचाया, जहां दोनों को मृत घोषित कर दिया गया।

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उनके परिजनों ने बैंक्वेट हॉल मालिक पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पुलिस ने लापरवाही का मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों की मौत जहरीली गैस से हुई या डूबकर, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में होगा।
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जिला पुलिस उपायुक्त दीपक यादव के मुताबिक, मूलत: दौसा स्थित अलुदा गांव निवासी प्रेमचंद चार भाइयों, पत्नी और 15 व 12 साल के दो बेटों के साथ रहते थे. उधर, लोकेश पिता बाबू व अन्य परिजों के साथ रहते थे। दोनों दिहाड़ी मजदूर थे। बृहस्पतिवार रात करीब साढ़े दस बजे पुलिस व दमकल विभाग को गाजीपुर गांव स्थित पर्ल बैंक्वेट हॉल में दो मजदूरों के सेप्टिक टैंक में डूबने की सूचना मिली।
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मौके पर मिले राहुल ने बताया कि वह बैंक्वेट हॉल में साफ-सफाई करता है। भूतल स्थित सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए उसने शाम साढ़े सात बजे दो लोगों को बुलाया था। दोनों साढ़े नौ बजे टैंक में घुसे और करीब आधे घंटे तक कोई हलचल नहीं हुई तो वह गया। काफी आवाज लगाने पर भी कोई जवाब न मिला तो उसने पुलिस को सूचना दी।

दमकल विभाग ने उपकरणों के जरिये काफी मशक्कत के बाद दोनों को निकाला तो उनके शरीर पर कीचड़ लगा था। पास के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पूछताछ में राहुल ने बताया कि सेप्टिक टैंक में उतरने से पहले मजदूरों को कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिया गया था।

राहुल ने पुलिस को बताया कि टैंक की सफाई के लिए उसकी लोकेश से बात हुई थी। उन्हें सफाई के लिए तीन हजार रुपये मिलने थे। नियम के मुताबिक, सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई करने वाले मजदूरों के पास ऑक्सीजन मास्क, हेलमेट, ग्लव्स आदि सुरक्षा उपकरण होने चाहिए, लेकिन इन दोनों के पास कुछ नहीं था।


भाई चंद्र प्रसाद का कहना है कि प्रेमचंद का मन बृहस्पतिवार शाम सेप्टिक टैंक की सफाई करने जाने का नहीं था। लोकेश के जिद करने पर वह चले गए। लोकेश उनके घर जाकर प्रेमचंद को ले गए थे।

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