दिल्ली-नेपाल के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश, 60 के लाख मोबाइल बरामद
-पुलिस ने नेपाली नागरिक समेत सात आरोपियों को 311 मोबाइलों के साथ दबोचा
-चोरी, लूट व झपटमारी के मोबाइलों को दिल्ली का गैंग भेज रहा था नेपाल
-बड़ी संख्या में आईफोन मिले, आईएमईआई नंबर बदले बिना नेपाल में हो रहा इस्तेमाल
-हवाला के जरिए मोबाइलों की पेमेंट भेज देते थे नेपाल के मोबाइल रिसीवर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली पुलिस की इंटर स्टेट सेल ने चोरी, लूट, झपटमारी और अन्य तरीकों से उड़ाए गए मोबाइल फोन को नेपाल भेजने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। मुख्य आरोपी व एक नेपाली नागरिक सहित सात आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जिनकी पहचान गैंग सरगना नरेश कुमार (30), मुकेश कुमार (38), नरेश कुमार (27), राजन उर्फ अजीत (28), राम सिंह (58), गोपाल पाठक (31) और रोहित उर्फ काके (23) के रूप में हुई है। राम सिंह नेपाल का रहने वाला है और वह ही मोबाइलों को बस के जरिये नेपाल के रिसीवरों के पास भेजता था। मोबाइल के रिसीवर हवाला व अन्य गैर कानूनी तरीकों से गैंग लीडर नरेश को रुपये भेजते थे। आरोपियों के पास से 60 लाख रुपये के 311 मोबाइल बरामद किए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आईफोन बताए जा रहे हैं।
अपराध शाखा इंटर स्टेट सेल के पुलिस उपायुक्त राजेश देव ने बताया कि 25 मई को सेक्टर-9, फरीदाबाद निवासी गुंजन नामक युवती से स्कूटी सवार युवक ने कनॉट प्लेस इलाके में मोबाइल झपट लिया था। पुलिस ने आरोपी रोहित उर्फ काके को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने जो खुलासा किया उससे पुलिस भी सन्न रह गई। आरोपी ने बताया कि वह चोरी के मोबाइल अपने साथियों को बेचता है और वह आगे इनको नरेश को बेच देते हैं। नरेश उन्हें नेपाल निवासी राम सिंह को देता है। राम सिंह सभी मोबाइल को इकट्ठा कर उन्हें बस के जरिये नेपाल भेजता है। वहां नेपाल के रहने वाले तीन रिसीवर मोबाइल लेकर उन्हें ठिकाने लगा देते थे। इसके बाद पुलिस की कई टीमों ने ताबड़तोड़ छापामारी कर नरेश कुमार, मुकेश, नरेश को करोलबाग, राजन को नबी करीम इलाके और राम सिंह को दिल्ली के मजनू का टीला व गोपाल पाठक को करावल नगर से गिरफ्तार कर लिया गया।
बरामद मोबाइलों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में 60 लाख रुपये कीमत बताई जा रही है। आरोपी नरेश कुमार ने बताया कि वह गैंग का सरगना है। रोहित झपटमारी करता है और अन्य आरोपी चोरों, झपटमारों आदि लोगों से मोबाइल खरीदकर नरेश को बेचते थे। नरेश सस्ते दामों में मोबाइल खरीदकर राम सिंह को देता था और राम सिंह मोबाइल का एक पैकेट बनाकर हफ्ते में नेपाल में रिसीवरों के नाम अलग-अलग पैकेट बनाकर भेज देता था। नेपाल से इन मोबाइल के बदले नरेश को मोटी रकम आ जाती थी। हर एक मोबाइल पर नरेश को एक हजार रुपये का फायदा होता था।
हर सप्ताह 150 से 200 मोबाइल भेजे जा रहे थे नेपाल
नेपाल में आईफोन की बड़ी डिमांड है। इसलिए मोबाइल रिसीवर आईफोन के अच्छे पैसे भी देते थे। आईफोन के आईएमईआई नंबर को क्रेक नहीं किया जा सकता है। चोरी के आईफोन भारत में चलाने पर पकड़े जाने का खतरा होता है, लेकिन नेपाल समेत आसपास के पड़ोसी देशों में आरोपी जल्दी पकड़ में नहीं आते हैं। करीब दो साल से नरेश हर सप्ताह 150 से 200 मोबाइल नेपाल भेज रहा था।
20 हजार रुपये थी राम सिंह की सैलरी
राम सिंह को तीन रिसीवरों ने नरेश से मोबाइल लेकर नेपाल भेजने के लिए ही दिल्ली में रखा हुआ था। वह राम सिंह को प्रतिमाह 20 हजार रुपये सैलरी देते थे। प्रतिदिन दिल्ली से नेपाल बस जाती हैं। इसलिए राम सिंह इन बसों में अलग-अलग नामों से पैकेट बनाकर भेजता था। पैकेट मिलते ही रिसीवर नरेश को पेमेंट भेज देते थे।
बरामद फोन के आईएमईआई नंबर जल्द दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर
आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबर के आधार पर पुलिस उनके मालिकों तक पहुंचने का प्रयास करेगी। जो मोबाइल उनके मालिक से लिंक नहीं हो पाएंगे उनके आईएमईआई नंबर दिल्ली पुलिस अपनी वेबसाइट पर डालेगी, जिन लोगों के मोबाइल चोरी, लूट या झपटे गए हैं वह वेबसाइट पर देख सकते हैं। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके मोबाइल लौटा दिए जाएंगे।