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दिल्ली की हवा में फिर घुलेगा प्रदूषण का जहर, पड़ोसी राज्य जला रहे पराली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 24 Sep 2018 11:38 AM IST
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पराली
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कुछ महीने में सर्दियां आ जाएंगी और एक बार फिर इस मौसम में दिल्ली की आबोहवा खराब होने की संभावना बढ़ गई। दिल्ली में में सर्दियों में प्रदूषण के बढ़ने की एक बड़ी वजह पराली मानी जाती है। लेकिन तमाम रोक व प्रयासों के बाद भी पड़ोसी राज्यों से पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
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हरियाणा प्रदूषण बोर्ड के सदस्य एस. नारायण ने जानकारी दी है कि सिर्फ करनाल में अब तक पराली जलाने के 61 मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से 26 पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 35 किसानों से 90 हजार वसूले चा चुके हैं। हरियाणा ही नहीं पंजाब प्रदूषण बोर्ड के सदस्य करुनेश गर्ग ने भी अपने राज्य में दो पराली की घटनाओं की पुष्टि की है।
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सीपीसीबी स्थित वायु गुणवत्ता के पूर्व प्रमुख डी. शाहा ने कहा, मानसून के तुरंत बाद किसान रबी की फसल के लिए खेतों को तैयार करने के लिए पराली जलाना शुरू कर देते हैं। उनका कहना है कि ऐसे में समय में चूंकि मानसून लौट रहा होता है तो हवाएं पश्चिमोत्तर होती हैं। इस तरह पराली से होने वाला प्रदूषण दिल्ली समेत अन्य राज्यों में पहुंचता है।
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सीपीसी के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल भी अक्तूबर में दिल्ली की वायु गुणवत्ता में कमी होनी शुरू हो गई थी और तीसरे हफ्ते तक स्थिति भयावह थी।
पराली से जुड़े तथ्य
stubble burning
कितना नुकसानदेह है पराली
-एक टन पराली जलाने पर 60 किलो कार्बन मोनो ऑक्साइड निकलता है
- 1,460 किलो कार्बन डाई ऑक्साइट का उत्सर्जन होता, 199 किलो राख निकलती है
- 3 किलो सूक्ष्म कण और दो किलो सल्फर डाइ ऑक्साइड का भी उत्सर्जन होता है
पिछले साल भी हजारों किसानों ने जलाई पराली
- पिछले साल हरियाणा में पराली जलाने के 12,657 मामले सामने आए
- पंजाब में पिछले साल 43,814 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं
- हालांकि इन सबके बावजूद 2016 के मुकाबले 2017 में पराली जलाने के मामलों में 46% कमी आई
सरकार पराली को रोकने के लिए कर रही क्या कोशिशें
-हरियाणा सरकार 30 गांवों पर विशेष निगरानी कर रही है
-1,151 करोड़ रुपये हरियाणा ने पराली प्रबंधन को दिए
-एक टन पराली जलाने पर 60 किलो कार्बन मोनो ऑक्साइड निकलता है
- 1,460 किलो कार्बन डाई ऑक्साइट का उत्सर्जन होता, 199 किलो राख निकलती है
- 3 किलो सूक्ष्म कण और दो किलो सल्फर डाइ ऑक्साइड का भी उत्सर्जन होता है
पिछले साल भी हजारों किसानों ने जलाई पराली
- पिछले साल हरियाणा में पराली जलाने के 12,657 मामले सामने आए
- पंजाब में पिछले साल 43,814 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं
- हालांकि इन सबके बावजूद 2016 के मुकाबले 2017 में पराली जलाने के मामलों में 46% कमी आई
सरकार पराली को रोकने के लिए कर रही क्या कोशिशें
-हरियाणा सरकार 30 गांवों पर विशेष निगरानी कर रही है
-1,151 करोड़ रुपये हरियाणा ने पराली प्रबंधन को दिए