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Delhi-NCR की जगी आस: आठ साल में पहली बार लोगों ने ली खुले में सांस, जानें कैसे आबोहवा हुई इतनी साफ

Sat, 17 Dec 2022 09:16 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 17 Dec 2022 09:16 PM IST
सार

दिल्ली की हवा सिर्फ 12 दिसंबर और ग्रेनो की छह व 12 दिसंबर को गंभीर स्तर पर रही, जबकि गुरुग्राम, गाजियाबाद, नोएडा व फरीदाबाद में हवा की गुणवत्ता औसत से बेहद खराब दर्ज की गई।

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Delhi-NCR air quality index is best in last eight years
दिल्ली एनसीआर में साफ हुई हवा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मौसमी दशाओं के अनुकूल होने से आठ साल में पहली बार दिल्ली-एनसीआर की हवा दमघोटू नहीं हुई। लोगों को वायु प्रदूषण से राहत मिली। इस बीच सतह पर चलने वाली हवा की रफ्तार पिछले सालों से ज्यादा रही। साथ ही, अक्तूबर में बारिश ने भी रिकॉर्ड तोड़ा। तापमान भी तुलनात्मक रूप से अभी तक ज्यादा है। दिलचस्प यह है कि इस साल पराली जलाने की घटनाएं भी कम दर्ज की गईं। इन सबके मिले-जुले असर से दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषक हांफते नजर आए और यह सर्दी वर्ष 2015 से लेकर अभी तक सबसे कम प्रदूषित रही। अमूमन वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) औसत से बेहद खराब स्तर में ही बना रहा। इसके बावजूद इस बीच कोई भी दिन ऐसा नहीं रहा, जब हवा अच्छी या संतोषजनक स्तर तक भी नहीं पहुंची, जबकि दक्षिण भारत के कई शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 से भी नीचे बना रहा।

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आबोहवा यूं रही साफ
सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर के 16 दिनों में दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सबसे ज्यादा और गुरुग्राम का सबसे कम रहा। दोनों शहरों में 295 और 239 एक्यूआई रहा। इस बीच दिल्ली की हवा सिर्फ 12 दिसंबर और ग्रेनो की छह व 12 दिसंबर को गंभीर स्तर पर रही, जबकि गुरुग्राम, गाजियाबाद, नोएडा व फरीदाबाद में हवा की गुणवत्ता औसत से बेहद खराब दर्ज की गई। अक्तूबर व नवंबर में दिल्ली का औसत एक्यूआई 142 रहा। वर्ष 2018 की तुलना में यह 18 फीसदी और 2016 की तुलना में 38 फीसदी कम है। 2016 के अक्तूबर-नवंबर अब तक के सबसे प्रदूषित दो महीने रहे हैं। 

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एनसीआर के शहरों की हालत भी बेहतर रही। गाजियाबाद में इन दो महीनों के प्रदूषण स्तर में 2020 की तुलना में 36 प्रतिशत की कमी आई। वहीं, ग्रेनो में 28 प्रतिशत, फरीदाबाद में 22 प्रतिशत की कमी आई है। इस दौरान गुरुग्राम में 15 प्रतिशत और नोएडा में 40 प्रतिशत की कमी आई। दिल्ली-एनसीआर में सबसे प्रदूषित क्षेत्र राजधानी रही। दूसरे नंबर पर गुरुग्राम और तीसरे पर गाजियाबाद रहा। दिसंबर, नवंबर और अक्तूबर में एक भी दिन में इस बार स्मॉग नहीं रहा। अमूमन दिल्ली-एनसीआर में छह से 10 दिन स्मॉग के रहते हैं। पांच सालों के पहली बार स्मॉग फ्री सर्दी रही। 2021 में नवंबर में दो और दिसंबर में एक बार स्मॉग रहा था।

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मौसम ने दिया साथ
इस साल अक्तूबर व नवंबर में दिल्ली में 115 एमएम बारिश हुई जो पांच सालों में सबसे ज्यादा है। दिसंबर के 15 दिनों में हवा की औसत रफ्तार करीब 13 किमी प्रति घंटा रही। नवंबर में हवा की औसत गति 12.4 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रही। वर्ष 2021 में हवा की गति 11 और 2020 में 11.5 किलोमीटर प्रति घंटे रही।

पराली भी कम जली
इस साल पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में पराली जलाने के मामलों में 37 फीसदी कमी आई। सफर के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार पराली जलाने की अवधि 53 दिनों की रही। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 56 दिनों का रहा। इस बार पराली ने पीएम 2.5 में 4.1 टन की हिस्सेदारी की। वर्ष 2020 की तुलना में यह 37 फीसदी और 2020 से करीब 50 फीसदी कम है।

विशेषज्ञ बोले....
इस बार हवा की रफ्तार आठ-14 किलोमीटर प्रतिघंटा रही। पिछले वर्ष के दौरान यह साढ़े पांच किलोमीटर प्रतिघंटा रही। उत्तर पश्चिमी हवा चलने से भी हालात में सुधार आया। पश्चिमी विक्षोभ अमूमन तीन-चार दिनों तक रुकने के बाद दूसरे राज्यों की तरफ रुख कर लेते हैं। पिछले वर्षों के दौरान हवा की कम रफ्तार व तापमान में अंतर कम होने से अधिक प्रदूषण रहा। - कुलदीप श्रीवास्तव, प्रमुख, प्रादेशिक मौसम पूर्वानुमान केंद्र, भारतीय मौसम विभाग

हवा की रफ्तार और न्यूनतम व अधिकतम तापमान में अंतर बढ़ने से हवा की गुणवत्ता में सुधार आया। इससे प्रदूषकों का बिखराव आसानी से होने से हवा साफ हुई। - दीपांकर शाहा, पूर्व अतिरिक्त निदेशक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

इस बार अक्तूबर में अच्छी बारिश हुई। इसके बाद बारिश नहीं हुई और पराली जलाने की घटनाएं भी कम हुई हैं। हवा की गति भी तेज रही। तापमान सामान्य रहने पर सतही हवाएं निचले स्तर पर चलीं। स्मॉग इसीलिए बना और प्रदूषण भी कम रहा। फिर भी, अभी बड़े स्तर पर काम करने की जरूरत है। - अनुमिता रॉय चौधरी, कार्यकारी निदेशक, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवारमेंट

दिसंबर के 16 दिनों का एक्यूआई
शहर 2022 2021
दिल्ली 295 324.56
फरीदाबाद 267 299.37
गाजियाबाद 250 299.06
ग्रेटर नोएडा 294 298.56
गुरुग्राम 239   289.75
नोएडा 252 295.5

2020 में दिसंबर के 16 दिनों का एक्यूआई
दिल्ली-330.56
फरीदाबाद-318.06
गाजियाबाद-378.62
ग्रेटर नोएडा-366.68
गुरुग्राम-277.87
नोएडा-352.62

दुनिया के कई शहरों में एक्यूआई काफी कम
दुनिया के कई शहर ऐसे हैं जहां दिल्ली-एनसीआर से कई गुना बेहतर वायु गुणवत्ता है। ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में शुक्रवार को एक्यूआई शून्य दर्ज किया जाना, इस बात का प्रमाण है। वहीं, देश में भी कई शहरों की तुलना में दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। देश के कुछ शहरों की एक्यूआई 40 से भी कम दर्ज किया गया।

17 दिसंबर का एक्यूआई
वैश्विक स्तर पर
कैनबरा, ऑस्ट्रेलिया-0
मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया-1
डेनवर, अमेरिका -4
न्यूयॉर्क, अमेरिका-5
टोरंटो, कनाडा-12

 

देश में स्थिति
चामराजनगर, कर्नाटक : 42
दामोह, मध्यप्रदेश-31
चिकमगलूर, कनार्टक-37
गडग, कर्नाटक, 44
हासन, कर्नाटक, 47
कोझीकोड, केरल, 40
मदिकेरी, कर्नाटक-30
मैहर, मध्य प्रदेश-39
मैसूर, कर्नाटक-45
शिमोगा, कर्नाटक-43
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