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Delhi: यमुना के तटों पर प्राकृतिक विरासत को मिलेगा नया जीवन, फिर विकसित किया जाएगा अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क
Sun, 05 Oct 2025 06:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 05 Oct 2025 06:09 AM IST
सार
डीडीए यमुना के बाढ़ क्षेत्र और खास तौर पर आईटीओ ब्रिज से एनएच-24 के बीच के क्षेत्र में अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क को फिर से विकसित करेगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली की प्राकृतिक विरासत को संजोने और यमुना के तटों को नया जीवन देने के लिए डीडीए ने 61.56 लाख की तीन नई परियोजनाएं शुरू की हैं। डीडीए यमुना के बाढ़ क्षेत्र और खास तौर पर आईटीओ ब्रिज से एनएच-24 के बीच के क्षेत्र में अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क को फिर से विकसित करेगा।
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यह परियोजना सीधे तौर पर दिल्ली की प्राकृतिक विरासत को संवारने और शहर को अधिक हरियाली देने के लिए है। इसमें यमुना किनारे आर्द्रभूमि के साथ घास के मैदान, दुर्लभ और स्थानिक पौधों वाले मैदानी वन विकसित करने का लक्ष्य है जो दिल्ली की जैव विविधता को मजबूत करेंगे। डीडीए के विवेक विहार हॉर्टिकल्चर डिवीजन ने कुल 61,56,101 रुपये की तीन प्रमुख बागवानी परियोजनाओं के ऑनलाइन टेंडर जारी किए हैं। 13 अक्तूबर को दोपहर तीन बजे तक टेंडर भरे जाएंगे और 14 अक्तूबर को इनकी तकनीकी बोलियां खोली जाएंगी।
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अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क होगा आकर्षण
डीडीए ने कुल तीन काम के टेंडर जारी किए हैं जिसमें दो परियोजनाएं सीधे यमुना के बाढ़ क्षेत्र में पूर्वी-पश्चिमी तट अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क के विकास से जुड़ी हैं। इसमें आईटीओ-बैराज से एनएच-24 तक अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क को हरियाली से भरपूर आकर्षक बनाने की योजना है।
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एनएच-24 से सीडब्ल्यूजी फ्लैट्स के बीच बड़े पैमाने पर हरित वन क्षेत्र बढ़ाए जाएंगे। यहां पौधे लगाने के लिए अच्छी मिट्टी, यमुना की रेत, गड्ढों की खुदाई, पॉलीथिन बैग, मौसमी बीज, पौधों के तेजी से विकास के लिए पोषण देने वाले बोन मील, नीम तेल और एनपीके उर्वरक की सप्लाई होगी। इसके लिए कुल 48,94,271 रुपये खर्च किए जाएंगे। इस काम को 90 दिन के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।
कालिंदी अविरल नर्सरी होगी विकसित
तीसरी परियाेजना के तहत कालिंदी अविरल एक्सटेंशन में नर्सरी विकसित की जाएगी। इसके रखरखाव के लिए डीडीए ने 12,61,830 का बजट रखा है। नर्सरी में गमले, पॉलीथिन बैग और पौधों की सप्लाई होगी। डीडीए ने ठेकेदारों के लिए सख्त नियम रखे हैं। केवल डीडीए में पंजीकृत ठेकेदार ही काम कर सकेगा। डीडीए के अधिकारियों ने कहा कि एलजी वीके सक्सेना बाढ़ क्षेत्र में जैव विविधता विकसित करने को लेकर बेहद गंभीर हैं। वे नियमित रूप से इसकी जानकारी लेते हैं।