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बाढ़ का खतरा: हरियाणा से छोड़ा गया लाखों क्यूसेक पानी, आने वाले दो दिन दिल्ली के लिए बेहद अहम
Thu, 29 Jul 2021 05:13 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Thu, 29 Jul 2021 05:13 PM IST
सार
गुरुवार को दिल्ली में यमुना का जलस्तर बढ़कर 203.37 मीटर पहुंच गया है। गौरतलब है कि दिल्ली में यमुना का जलस्तर अगर 204.50 मीटर तक पहुंच जाए तो इसे चेतावनी का चिन्ह माना जाता है।
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यमुना का जलस्तर (फाइल फोटो)
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
पहाड़ों में हो रही भारी बारिश से नदियों में पानी का जलस्तर बढ़ने लगा है। ऐसे में हथिनी कुंड बैराज पर करीब 1 लाख 60 हजार क्यूसेक पानी बह रहा है। ये पानी 72 घंटे के भीतर दिल्ली पहुंच जाएगा। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि इस पानी से किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। लेकिन कहीं न कहीं ये आशंका जरूर जताई जा रही है कि यमुना का जलस्तर बढ़ने से दिल्ली के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है।
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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक गुरुवार को दिल्ली में यमुना का जलस्तर बढ़कर 203.37 मीटर पहुंच गया है। गौरतलब है कि दिल्ली में यमुना का जलस्तर अगर 204.50 मीटर तक पहुंच जाए तो इसे चेतावनी का चिन्ह माना जाता है।
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बता दें कि इससे पहले 22 सितंबर 2010 को यमुना का जलस्तर 207.18 मीटर तक गया था। यमुना पल्ला से दिल्ली में एंट्री करती है। इससे पहले 1978 में भारी बारिश के चलते नदी का जलस्तर बढ़ गया था जिससे दिल्ली में बाढ़ के हालात बने थे।
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मानसून के इस सीजन में पहली बार यमुनानगर स्थित हथिनी कुंड बैराज पर पानी एक लाख क्यूसेक के पार हुआ है। जानकारी के अनुसार, बुधवार को हथिनी कुंड बैराज से 1 लाख 60 हजार क्यूसेक के करीब पानी छोड़ा गया है। इसके 24 घंटों में पानीपत जिला में प्रवेश करने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि हथिनी कुंड बैराज पर पानी को रोका नहीं जाता। यहां से पानी को सिर्फ डायवर्ट करने का काम किया जाता है। अगर पहाड़ों मेें बारिश ऐसे ही होती रही तो पानी खतरे के निशान को छू सकता है।
जिससे हरियाणा के यमुना के साथ लगते जिलों यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है। वहीं क्षेत्र के यमुना के साथ लगते गांवों में ग्रामीणों ने अपने स्तर पर यमुना के जलस्तर पर नजर रखनी शुरू कर दी है। वहीं गांव नगला पार के किसान राममेहर कौशिक की मानें तो यमुना नदी में 3 लाख क्यूसेक पानी से भी कोई खतरा नहीं है। सिर्फ यमुना में की गई खेती को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि इससे क्षेत्र का वाटर लेवल बढ़ेगा।