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Delhi Fire: 'बचाओ-बचाओ, आग लग गई, कोई है... मेरे बच्चों को बाहर निकालो', टूटी सीढ़ी और रस्सी के सहारे बचाई जान
Mon, 27 May 2024 02:46 PM IST
शाहरुख खान
आशीष सिंह/ नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष सिंह/ नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 27 May 2024 02:46 PM IST
सार
शाहदरा के कृष्णा नगर इलाके में शनिवार देर रात चार मंजिला इमारत में भीषण आग लगी। सीढ़ी लगाकर 12 लोगों को निकाला गया। अग्निकांड में मां-बेटे समेत तीन की मौत हो गई।
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Delhi Krishna Nagar Fire
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शाहदरा जिले के कृष्णा नगर इलाके में शनिवार देर रात चार मंजिला इमारत में आग लग गई। पार्किंग में लगी आग की तपिश और धुआं ऊपरी मंजिलों पर पहुंचा तो सोते हुए लोगों की नींद खुली। अचानक वहां अफरा-तफरी मच गई। चीख-पुकार के बीच पुलिस व दमकल विभाग को सूचना दी गई। पड़ोसी भी मदद के लिए भागे। मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने के साथ इमारत में फंसे लोगों को निकालना शुरू किया।
इमारत के पिछले हिस्से और सामने की ओर सीढ़ी लगाकर धीरे-धीरे 12 लोगों को निकालकर अलग-अलग अस्पताल में भेजा गया। जीटीबी अस्पताल में पहले मां-बेटे को मृत घोषित किया गया। बाद में पहली मंजिल से एक और बुजुर्ग महिला का शव जली हालत में मिला। मृतकों की शिनाख्त प्रोमिला साध (66), महिला अंजू शर्मा (39) और इनके बेटे केशव शर्मा (18) के रूप में हुई है। वहीं अस्पताल में तीन लोगों की हालत गंभीर है। बाकी सात को मामूली चोटें आई हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
पड़ोसियों ने सीढ़ी और रस्सी लगाकर बचाई लोगों की जान
बचाओ-बचाओ, आग लग गई है, कोई है... बचाओ.... मेरे बच्चों को बाहर निकालो। शनिवार रात करीब ढाई बजे जब मनीषा ने यह आवाज सुनी, तो आनन-फानन पति राजेश के साथ घर से बाहर आईं। बाहर निकलते ही देखा कि सामने वाला घर आग के आगोश में है।
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लोग इधर-उधर भाग रहे हैं। आग की लपटे उनके घर तक भी पहुंच रही हैं। यह भयानक मंजर था कृष्णा नगर के पश्चिमी आजाद नगर की गली नंबर एक का। यहां शनिवार देर रात को मकान नंबर 219 में भीषण आग लग गई थी।
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इमारत के पिछले हिस्से और सामने की ओर सीढ़ी लगाकर धीरे-धीरे 12 लोगों को निकालकर अलग-अलग अस्पताल में भेजा गया। जीटीबी अस्पताल में पहले मां-बेटे को मृत घोषित किया गया। बाद में पहली मंजिल से एक और बुजुर्ग महिला का शव जली हालत में मिला। मृतकों की शिनाख्त प्रोमिला साध (66), महिला अंजू शर्मा (39) और इनके बेटे केशव शर्मा (18) के रूप में हुई है। वहीं अस्पताल में तीन लोगों की हालत गंभीर है। बाकी सात को मामूली चोटें आई हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
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पड़ोसियों ने सीढ़ी और रस्सी लगाकर बचाई लोगों की जान
बचाओ-बचाओ, आग लग गई है, कोई है... बचाओ.... मेरे बच्चों को बाहर निकालो। शनिवार रात करीब ढाई बजे जब मनीषा ने यह आवाज सुनी, तो आनन-फानन पति राजेश के साथ घर से बाहर आईं। बाहर निकलते ही देखा कि सामने वाला घर आग के आगोश में है।
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लोग इधर-उधर भाग रहे हैं। आग की लपटे उनके घर तक भी पहुंच रही हैं। यह भयानक मंजर था कृष्णा नगर के पश्चिमी आजाद नगर की गली नंबर एक का। यहां शनिवार देर रात को मकान नंबर 219 में भीषण आग लग गई थी।
देखते ही देखते एक व्यक्ति धुएं से जूझते हुए उनसे मदद की गुहार लगा रहा है। ऐसे में मनीषा तुरंत पति के साथ अपने घर की दूसरी मंजिल पर पहुंचीं और टूटी सीढ़ी और रस्सी का सहारा देकर आग लगे घर की दूसरी मंजिल पर टिका दी।
वह रोते हुए बताती हैं कि उन्होंने सबसे पहले तीन से चार बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला लेकिन, डर यह था कि यह टूटी हुई सीढ़ी है, कहीं इससे लोग नीचे न गिर जाएं। ऐसे में कुछ लोगों को नीचे खड़े होकर मोर्चा संभाला। उसके बाद महिलाओं और कुछ पुरुषों को निकालने में मदद की। उनके पति राजेश अपनी चोट दिखाते हुए बताते हैं कि अगर दोनों तरफ से दरवाजे खुले होते, तो मृतकों की भी जान बचाई जा सकती थी।
जान बचाने की गुहार लगाते रहे लोग
बचाव में शामिल 20 वर्षीय मनन साद भावुक होकर कहते हैं कि अक्सर वह आग की चपेट में आए लोगों से मिलते रहते थे। लेकिन, वह रात मनहूस रात थी, जब अपनी आंखों के सामने लोगों को जिंदगी बचाने की गुहार लगाते देखा। उन्होंने बताया कि लोगों ने अपने दरवाजों पर ताले लगा रखे थे, इससे कई दरवाजे खुल नहीं रहे थे। ऐसे में वह लोहे की रोड लेकर आए और दरवाजों को तोड़ा। इसके बाद कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। यही नहीं, लोगों ने बालकनी में कपड़ों को सुखाने के लिए रस्सी लगा रखी थी। इससे लोगों को वहां से निकलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में उन्होंने रस्सी काटी। जिससे लोग सीढ़ी का सहारा लेकर उनकी छत पर आए।
बचाव में शामिल 20 वर्षीय मनन साद भावुक होकर कहते हैं कि अक्सर वह आग की चपेट में आए लोगों से मिलते रहते थे। लेकिन, वह रात मनहूस रात थी, जब अपनी आंखों के सामने लोगों को जिंदगी बचाने की गुहार लगाते देखा। उन्होंने बताया कि लोगों ने अपने दरवाजों पर ताले लगा रखे थे, इससे कई दरवाजे खुल नहीं रहे थे। ऐसे में वह लोहे की रोड लेकर आए और दरवाजों को तोड़ा। इसके बाद कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। यही नहीं, लोगों ने बालकनी में कपड़ों को सुखाने के लिए रस्सी लगा रखी थी। इससे लोगों को वहां से निकलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में उन्होंने रस्सी काटी। जिससे लोग सीढ़ी का सहारा लेकर उनकी छत पर आए।
चाचा के घर रुक जाते तो नहीं होते हादसे का शिकार
घटना का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पार्किंग की जगह पर लगी आग चौथी मंजली तक पहुंच गई थी। सीढ़ियों पर धुआं भर गया, लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। ऐसे में चौथी मंजिल में रहने वाले लोगों ने छत का दरवाजा तोड़कर घर से सटे दूसरे घर की छत पर रस्सी लगाकर छलांग लगा दी। घटना में घायल राखी ने बताया कि वह बिल्डिंग के सबसे ऊपर की मंजिल में रहती हैं। जब उन्होंने लोगों की रोने की आवाज सुनी, तो जैसे ही घर का दरवाजा खोला वैसे ही धुएं का गुबार उनके घर के अंदर आ गया। पुरा घर धुएं से भर गया, बच्चे रोने लगे। समझ नहीं आया कहां जाएं। ऐसे में वह अपने बच्चों को लेकर छत पर गईं, वहां उन्होंने रस्सी के सहारे अपने बच्चों को दूसरी छत पर फेंक दिया। इसके बाद वह और उनके पति उस छत पर कूद गए। ऐसे में उन्हें सिर पर चोट भी आई है। उनके पति प्रदीप कुमार बताते हैं कि वह परिवार के साथ अपने चाचा के घर गए हुए थे। अगर वह उस रात वहीं रुक जाते तो हादसे का शिकार नहीं होते।
घटना का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पार्किंग की जगह पर लगी आग चौथी मंजली तक पहुंच गई थी। सीढ़ियों पर धुआं भर गया, लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। ऐसे में चौथी मंजिल में रहने वाले लोगों ने छत का दरवाजा तोड़कर घर से सटे दूसरे घर की छत पर रस्सी लगाकर छलांग लगा दी। घटना में घायल राखी ने बताया कि वह बिल्डिंग के सबसे ऊपर की मंजिल में रहती हैं। जब उन्होंने लोगों की रोने की आवाज सुनी, तो जैसे ही घर का दरवाजा खोला वैसे ही धुएं का गुबार उनके घर के अंदर आ गया। पुरा घर धुएं से भर गया, बच्चे रोने लगे। समझ नहीं आया कहां जाएं। ऐसे में वह अपने बच्चों को लेकर छत पर गईं, वहां उन्होंने रस्सी के सहारे अपने बच्चों को दूसरी छत पर फेंक दिया। इसके बाद वह और उनके पति उस छत पर कूद गए। ऐसे में उन्हें सिर पर चोट भी आई है। उनके पति प्रदीप कुमार बताते हैं कि वह परिवार के साथ अपने चाचा के घर गए हुए थे। अगर वह उस रात वहीं रुक जाते तो हादसे का शिकार नहीं होते।
घटना के बाद लोगों का लगा रहा आना-जाना
घटना स्थल को देखने के लिए लोगों का दिन भर तांता लगा रहा। दुर्घटना में घायलों के रिश्तेदार व तीमारदार अपनों की तलाश में भटकते दिखे। शाहदरा से आए हेमंत ने बताया कि उनकी बहन यहां रहती थी, कल से उनका फोन नहीं लग रहा है। जिससे वह यहां आए हैं। उन्होंने बताया कि यहां आकर पता चला की घर पर आग लग गई है। वह मायूस होकर बोलते हैं कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि अब वह कहां जाएं। अस्पताल गए थे, लेकिन अभी तक किसी का पता नहीं चला है।
घटना स्थल को देखने के लिए लोगों का दिन भर तांता लगा रहा। दुर्घटना में घायलों के रिश्तेदार व तीमारदार अपनों की तलाश में भटकते दिखे। शाहदरा से आए हेमंत ने बताया कि उनकी बहन यहां रहती थी, कल से उनका फोन नहीं लग रहा है। जिससे वह यहां आए हैं। उन्होंने बताया कि यहां आकर पता चला की घर पर आग लग गई है। वह मायूस होकर बोलते हैं कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि अब वह कहां जाएं। अस्पताल गए थे, लेकिन अभी तक किसी का पता नहीं चला है।
भयावह मंजर में फरिश्ते बनकर आए जोमैटो के कर्मचारी
कृष्णा नगर में शनिवार रात जिस समय आग लगी थी, उस समय इसी बीच 7-8 जोमैटो के कर्मचारी खाने की डिलीवरी करने के लिए जा रहे थे। उन्होंने देखा कि गली में हाहाकार मचा हुआ है। आनन-फानन में वह अपनी बाइक और स्कूटी छोड़कर आग में फंसे लोगों को बचाने के लिए भागे। अपनी जान की परवाह किए बिना इमारत में फंसे लोगों को बचाने में जुट गए। इसके लिए उन्होंने अपने सारे ऑर्डर निष्क्रिय कर दिए थे। चश्मदीद नीरज ने बताया कि इन्होंने सीढ़ी के माध्यम से वहां फंसे लोगों को बाहर निकाला। वह बच्चों को अपनी गोद में उठाकर व कंधों पर उठाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकल रहे थे। लगभग 12 लोगों को बचाने के बाद वह चले गए। उन्होंने कहा कि वहह फरिश्ते थे, जो भगवान ने भेजे थे।
कृष्णा नगर में शनिवार रात जिस समय आग लगी थी, उस समय इसी बीच 7-8 जोमैटो के कर्मचारी खाने की डिलीवरी करने के लिए जा रहे थे। उन्होंने देखा कि गली में हाहाकार मचा हुआ है। आनन-फानन में वह अपनी बाइक और स्कूटी छोड़कर आग में फंसे लोगों को बचाने के लिए भागे। अपनी जान की परवाह किए बिना इमारत में फंसे लोगों को बचाने में जुट गए। इसके लिए उन्होंने अपने सारे ऑर्डर निष्क्रिय कर दिए थे। चश्मदीद नीरज ने बताया कि इन्होंने सीढ़ी के माध्यम से वहां फंसे लोगों को बाहर निकाला। वह बच्चों को अपनी गोद में उठाकर व कंधों पर उठाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकल रहे थे। लगभग 12 लोगों को बचाने के बाद वह चले गए। उन्होंने कहा कि वहह फरिश्ते थे, जो भगवान ने भेजे थे।
कंबल में लपेटकर बचाई बच्चे की जान
अन्य चश्मदीद ने बताया कि मकान में आग तेजी से फैल रही थी। कोई रास्ता हाथ न आने पर उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक बच्ची को कंबल से लपेटकर नीचे फेंका। कंबल बीच में ही तारों पर अटक गया, इससे वह बच्चा बच तो गया, लेकिन उसे छोटी-मोटी चोट भी आई। वहीं, दाईं ओर वाले फ्लैट की चौथी मंजिल पर रहने वाले अंकित ने नम आंखों से बताया कि उनके परिवार ने रातभर बालकनी में खड़े होकर पड़ोसियों की जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने गीले कंबल तैयार किए हुए थे।
अन्य चश्मदीद ने बताया कि मकान में आग तेजी से फैल रही थी। कोई रास्ता हाथ न आने पर उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक बच्ची को कंबल से लपेटकर नीचे फेंका। कंबल बीच में ही तारों पर अटक गया, इससे वह बच्चा बच तो गया, लेकिन उसे छोटी-मोटी चोट भी आई। वहीं, दाईं ओर वाले फ्लैट की चौथी मंजिल पर रहने वाले अंकित ने नम आंखों से बताया कि उनके परिवार ने रातभर बालकनी में खड़े होकर पड़ोसियों की जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने गीले कंबल तैयार किए हुए थे।