'दिल्ली एक राज्य ही नहीं बल्कि देश की राजधानी भी, उसकी विशेषता अलग'
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हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल के बीच विवाद मामले में केंद्र सरकार के अधिकारों को सर्वोच्च माना है। अदालत ने दिल्ली को मात्र प्रदेश के तौर नहीं बल्कि देश की राजधानी के रूप में भी आंक कर उसकी अलग से व्याख्या की है।
अदालत ने फैसले में राजधानी की विशेषता और उसके महत्व पर भी अलग से प्रकाश डालते हुए केंद्र को प्रमुखता दी है। खंडपीठ ने कहा कि दिल्ली में प्रशासन की जिम्मेदारी राष्ट्रपति पर है।
अदालत ने कहा कि दिल्ली एक प्रदेश ही नहीं है बल्कि देश की राजधानी भी है। यह देश के जातीय, सांस्कृतिक और सामाजिक-राजनीतिक विविधता को दर्शाती है और दुनिया के बाकी हिस्सों का एक झलक दिखाने के रूप में काम करती है।
अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार के लिए दिल्ली अति महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां बड़े स्तर पर महत्वपूर्ण संस्थान जैसे राज्य के प्रमुख, राष्ट्रीय विधायिका, राष्ट्रीय कार्यकारिणी, शीर्ष न्यायपालिका, सशस्त्र बलों के प्रमुख, अर्द्ध सैनिक बल, विदेशी राजनयिक मिशन, अंतरराष्ट्रीय संगठन, महत्वपूर्ण शिक्षा एवं सांस्कृतिक संस्थान इत्यादि हैं।
'जातीय, सांस्कृतिक और सामाजिक-राजनीतिक विविधता को दर्शाती है दिल्ली'
खंडपीठ ने अनुच्छेद 239एए (जो दिल्ली के संबंध में विशेष प्रावधान देता है) की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रशासन की जिम्मेदारी राष्ट्रपति पर है और यह उपराज्यपाल के जरिये अधिनियमित की गई है।
खंडपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ द्वारा दिए विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश व केंद्र शासित प्रदेशों में अधिकारों का काफी अंतर है। केंद्र शासित राज्यों में नियुक्त उपराज्यपाल की शक्तियों व अन्य में काफी अंतर है।
संविधान के अनुच्छेद 239एए में प्रदान किए गए विशेष प्रावधान (विशेषकर दिल्ली के लिए) में स्पष्ट किया गया है कि उस पर केंद्र सरकार का नियंत्रण रहेगा और वह हमेशा केंद्र शासित ही मानी जाएगी।
इसके अलावा स्पष्ट किया गया है कि केंद्र शासित राज्य पर राष्ट्रपति का नियंत्रण होगा और दिल्ली में उपराज्यपाल प्रशासक हैं। अदालत ने कहा कि इसी के तहत स्पष्ट है कि उपराज्यपाल मंत्रिपरिषद की राय मानने के लिए बाध्य नहीं है और भिन्न राय होने पर वह मामले को राष्ट्रपति को भेजेगा व लंबित निर्णय तक वह उचित कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है।