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दिल्ली हाईकोर्ट: राजनीतिक दलों के आंतरिक चुनावों में आदर्श प्रक्रिया संबधी याचिका पर जवाब दे निर्वाचन आयोग

Thu, 28 Oct 2021 05:13 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 28 Oct 2021 05:13 PM IST
सार

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि आयोग ने 1996 में सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के साथ-साथ पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दलों को एक पत्र जारी करके कहा था कि वे अपने संगठनात्मक चुनावों से संबंधित विभिन्न प्रावधानों का पालन नहीं कर रहे हैं।

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delhi high court seeks reply from election commission on plea demanding direction for code of conduct
चुनाव आयोग - फोटो : social media

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार दिन में एक याचिका की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। दरअसल इस याचिका में चुनाव आयोग को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि आयोग अंतर-पार्टी चुनावों के लिए एक आदर्श प्रक्रिया तैयार करे और इसे देश के सभी राजनीतिक दलों के संविधान में शामिल करवाए।
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चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने आयोग को नोटिस जारी किया और उससे अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 दिसंबर की तारीख तय की है।
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याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि उसने इस संबंध में नई याचिका दायर की है, क्योंकि उसकी रिपोर्ट पर आयोग का पहले दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं था। याचिकाकर्ता ने पहले भी याचिका दायर की थी। अदालत ने तब आयोग को निर्देश दिया था कि वह इस याचिका को प्रतिवेदन समझकर इस पर फैसला करे। इसी के साथ अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया था।
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कमल हासन के राजनीतिक दल ‘मक्कल निधि मय्यम’ (एमएनएम) के संस्थापक सदस्यों में शामिल एवं वकील सी राजशेखरन ने यह याचिका दायर की है। राजशेखरन ने दावा किया कि राजनीतिक दलों के आंतरिक चुनावों में नियामक के तौर पर आयोग की निगरानी का अभाव है।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि आयोग ने 1996 में सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के साथ-साथ पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दलों को एक पत्र जारी करके कहा था कि वे अपने संगठनात्मक चुनावों से संबंधित विभिन्न प्रावधानों का पालन नहीं कर रहे हैं। आयोग ने उनसे आंतरिक चुनावों से संबंधित अपने-अपने संविधानों का ईमानदारी से पालन करने का आह्वान किया था।


याचिका में कहा गया है, ‘अन्य निजी संगठनों/संस्थानों के विपरीत राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव है और इसका काफी असर देश के शासन पर पड़ता है, क्योंकि जब ये राजनीतिक दल सत्ता में आते हैं, तो उनमें पादर्शिता और आंतरिक लोकतंत्र का अभाव उनके गैर लोकतांत्रिक शासन मॉडल में भी प्रतिबिंबित होता है।’
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