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Delhi NCR News: दिल्ली हाईकोर्ट ने सेल को ब्रिटिश कंपनी को 213 करोड़ देने से रोका
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने ब्रिटिश मरीन पीएलसी को स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) द्वारा जमा 213 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी करने पर रोक लगाई। अदालत ने पाया कि मध्यस्थता अवॉर्ड पर स्टांप ड्यूटी नहीं लगी थी, इसलिए इसे लागू नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति विनोद कुमार ने कहा कि बिना स्टांप वाला अवॉर्ड निष्पादनीय नहीं होगा। अदालत ने ब्रिटिश मरीन को आवश्यक स्टांप ड्यूटी अदा कर नई याचिका दायर करने की अनुमति दी। सेल ने आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन एक्ट, 1996 की धारा 34 के तहत अवॉर्ड को चुनौती दी थी। सेल ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास 230.33 करोड़ रुपये जमा किए थे। इसमें से 17.09 करोड़ रुपये बैंक गारंटी के बदले ब्रिटिश मरीन को पहले ही जारी हो चुके थे। अदालत ने ब्रिटिश मरीन की 213.24 करोड़ रुपये जारी करने की याचिका खारिज की। साथ ही, 17.09 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भी निरस्त कर दी।
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नई दिल्ली।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने ब्रिटिश मरीन पीएलसी को स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) द्वारा जमा 213 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी करने पर रोक लगाई। अदालत ने पाया कि मध्यस्थता अवॉर्ड पर स्टांप ड्यूटी नहीं लगी थी, इसलिए इसे लागू नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति विनोद कुमार ने कहा कि बिना स्टांप वाला अवॉर्ड निष्पादनीय नहीं होगा। अदालत ने ब्रिटिश मरीन को आवश्यक स्टांप ड्यूटी अदा कर नई याचिका दायर करने की अनुमति दी। सेल ने आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन एक्ट, 1996 की धारा 34 के तहत अवॉर्ड को चुनौती दी थी। सेल ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास 230.33 करोड़ रुपये जमा किए थे। इसमें से 17.09 करोड़ रुपये बैंक गारंटी के बदले ब्रिटिश मरीन को पहले ही जारी हो चुके थे। अदालत ने ब्रिटिश मरीन की 213.24 करोड़ रुपये जारी करने की याचिका खारिज की। साथ ही, 17.09 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भी निरस्त कर दी।