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राजधानी के सभी 38 सरकारी अस्पतालों रिक्त पद स्वीकार्य नहीं, जल्द भरे सरकार : हाईकोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी के 38 सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों की गंभीर कमी पर चिंता जताते हुए दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह अनुबंध के आधार पर की जा रही भर्तियों के बजाय केंद्रीकृत और समयबद्ध तरीके से भर्ती प्रक्रिया अपनाए। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने यह आदेश दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने पाया कि अस्पतालों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर कोई एक समान मानव संसाधन नीति नहीं है, जिसके कारण पदों को भरने में भारी कठिनाई आ रही है ।
पीठ ने कहा, अनुबंधित रोजगार सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। अदालत ने चेतावनी दी कि अस्थायी कर्मचारियों पर निर्भरता से कर्मचारियों का पलायन बढ़ सकता है और मौजूदा कर्मचारियों के पदोन्नति के अवसर भी बाधित हो सकते हैं । अदालत ने कहा कि अस्पताल प्रशासन के शीर्ष से निचले स्तर तक खाली पदों को स्थायी, स्पष्ट और निरंतरता सुनिश्चित करने वाले तरीके से भरा जाना चाहिए । इसके अलावा, अदालत ने सभी 38 अस्पतालों में प्रत्येक स्तर पर स्वीकृत पदों, भरे गए पदों और रिक्तियों का एक व्यापक चार्ट तैयार करने और भर्ती के लिए एक सख्त समयसीमा निर्धारित करने का निर्देश दिया है।
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी के 38 सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों की गंभीर कमी पर चिंता जताते हुए दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह अनुबंध के आधार पर की जा रही भर्तियों के बजाय केंद्रीकृत और समयबद्ध तरीके से भर्ती प्रक्रिया अपनाए। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने यह आदेश दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने पाया कि अस्पतालों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर कोई एक समान मानव संसाधन नीति नहीं है, जिसके कारण पदों को भरने में भारी कठिनाई आ रही है ।
पीठ ने कहा, अनुबंधित रोजगार सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। अदालत ने चेतावनी दी कि अस्थायी कर्मचारियों पर निर्भरता से कर्मचारियों का पलायन बढ़ सकता है और मौजूदा कर्मचारियों के पदोन्नति के अवसर भी बाधित हो सकते हैं । अदालत ने कहा कि अस्पताल प्रशासन के शीर्ष से निचले स्तर तक खाली पदों को स्थायी, स्पष्ट और निरंतरता सुनिश्चित करने वाले तरीके से भरा जाना चाहिए । इसके अलावा, अदालत ने सभी 38 अस्पतालों में प्रत्येक स्तर पर स्वीकृत पदों, भरे गए पदों और रिक्तियों का एक व्यापक चार्ट तैयार करने और भर्ती के लिए एक सख्त समयसीमा निर्धारित करने का निर्देश दिया है।
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