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दिल्ली: करोड़ों रुपये के घोटाले में आम्रपाली समूह के पूर्व निदेशक को उच्च न्यायालय ने जमानत देने से किया इनकार

Tue, 17 May 2022 02:35 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 17 May 2022 02:35 AM IST
सार

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह मानना मुश्किल हो सकता है कि याचिकाकर्ता मून बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के निवेश और 26 फ्लैटों के आवंटन के बारे में अनजान था, इस तथ्य के बावजूद कि टॉवर जी -1 को नोएडा प्राधिकरण द्वारा कभी मंजूरी नहीं दी गई थी।

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delhi high court refuses to grant bail to former director of amrapali group
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उच्च न्यायालय ने आम्रपाली समूह के पूर्व निदेशक को जमानत देने से इनकार कर दिया है। उसे करोड़ों के घोटाले में गिरफ्तार किया गया था।

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न्यायमूर्ति अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने अजय कुमार की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी के जमानत मिलने पर भागने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि आम्रपाली सिलिकॉन सिटी में टॉवर जी -1 को नोएडा प्राधिकरण द्वारा कभी भी मंजूरी नहीं दी गई और एक आपराधिक साजिश में आरोपी व्यक्तियों ने शिकायतकर्ता अनुभव जैन को 26 फ्लैट बेचे थे।
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अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में मेरा विचार है कि जमानत के लिए कोई आधार नहीं बनता है।

शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने परियोजना में निवेश करने के लिए सहमति व्यक्त की और नवंबर 2011 में उक्त फ्लैटों के लिए 6.60 करोड़ रुपये का पूर्ण और अंतिम भुगतान किया। 
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याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि प्राथमिकी आम्रपाली ड्रीम वैली प्राइवेट लिमिटेड के सह-आरोपी और सीएमडी के खिलाफ दर्ज की गई थी न कि उनके मुवक्किल के खिलाफ। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में आम्रपाली ग्रुप ऑफ कंपनीज में याचिकाकर्ता की भूमिका स्थापित की जानी चाहिए।


अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता आम्रपाली सिलिकॉन सिटी प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक है और मूल कंपनी अल्ट्रा होम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के शेयरधारकों और निदेशकों में से एक है। याचिकाकर्ता बैंक खातों में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता है और उसने मून बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में सुनिश्चित रिटर्न और मूल राशि के चेक पर हस्ताक्षर किए थे।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह मानना मुश्किल हो सकता है कि याचिकाकर्ता मून बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के निवेश और 26 फ्लैटों के आवंटन के बारे में अनजान था, इस तथ्य के बावजूद कि टॉवर जी -1 को नोएडा प्राधिकरण द्वारा कभी मंजूरी नहीं दी गई थी।

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