जेबीटी घोटाला: चौटाला समेत 55 दोषियों पर फैसला सुरक्षित
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हरियाणा जेबीटी भर्ती घोटाला मामले में सजा काट रहे पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला समेत 55 दोषियों की अपील पर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रख लिया।
दूसरी ओर हाईकोर्ट ने ओमप्रकाश चौटाला की अंतरिम जमानत 25 जुलाई तक बढ़ा दी है। विशेष सीबीआई अदालत ने जनवरी 2013 में दोषियों को सजा सुनाई थी। दोषियों ने सजा के खिलाफ 11 जुलाई 2013 को हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल के समक्ष जेबीटी भर्ती घोटाला मामले में दोषियों की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई पूरी हो गई। मामले में दोषी पूर्व आईएसएस संजीव कुमार के अधिवक्ता अरविंद निगम की बहस के बाद सुनवाई पूरी हुई।
कोर्ट ने खारिज कर दी ये दलील
अधिवक्ता निगम ने बहस के दौरान कहा कि उनके मुवक्किल संजीव कुमार ने ही इस घोटाले का पर्दाफाश किया था। इसलिए कोर्ट का फैसला आने तक उन्हें छोड़ दिया जाए।
अगर फैसला उनके खिलाफ आता है तो वह आत्मसमर्पण कर देंगे। कोर्ट ने उनकी इस मांग को खारिज करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया।
कोर्ट में एक साल चली सुनवाई के दौरान ओमप्रकाश चौटाला, अजय चौटाला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामजेठ मलानी, एन. हरीहरन समेत कई नामचीन वकीलों ने बहस की। बचाव पक्ष ने बहस के दौरान एक दूसरे के सिर पर घोटाले का दोष डाला था।
किसे कितनी मिली थी सजा
विशेष सीबीआई अदालत ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, उनके पुत्र अजय चौटाला सहित दस अभियुक्तों को दस-दस साल कैद की सजा सुनाई थी।
अदालत ने इसी मामले में लिप्त एक अभियुक्त को पांच साल की कैद व 44 अन्य अभियुक्तों को चार-चार साल की कैद की सजा सुनाई थी।
विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार ने ओमप्रकाश चौटाला, अजय चौटाला, अजय चौटाला, पूर्व आईएएस संजीव कुमार, पूर्व आईएएस विद्याधर, मौजूदा विधायक शेर सिंह बडशामी समेत सभी आरोपियों को 1999 व 2000 के दौरान 3206 जूनियर बेसिक टीचर (जेबीटी) की भर्ती में घोटाला का दोषी करार दिया था।
इन धाराओं में ठहराया था दोषी
अदालत ने ओमप्रकाश चौटाला, संजीव कुमार समेत सभी 55 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (अपराधिक साजिश), 418 (हित के संरक्षण के आबद्ध होने के बावजूद किसी के साथ छल कर हानि पहुंचाना), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति, बिल इत्यादि का फर्जीवाड़ा), 471 (फर्जी दस्तावेज का असली की तरह इस्तेमाल) व भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13 (2) व 13 (1)(डी) के तहत दोषी करार दिया था।
अदालत ने इस मामले में जुलाई 2011 में आरोप तय किए थे। एक आरोपी बृज मोहन को अदालत ने आरोप मुक्त कर दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान छह आरोपियों की मृत्यु हो गई।
कब हुआ था घोटाले का खुलासा
जेबीटी मामले का खुलासा सितंबर 2003 में पूर्व आईएएस व प्राथमिक शिक्षा निदेशक संजीव कुमार की सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर आदेश के बाद हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच करने का आदेश दिया था।
सीबीआई ने मामले की जांच बाद 2008 में 17 महिला समेत 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
सीबीआई का आरोप था कि आरोपियों ने 1999 व 2000 के दौरान 3206 जेबीटी टीचर भर्ती घोटाले की साजिश रची। योग्य उम्मीदवारों की सूचियों में हेरफेर कर उनमें घूस देने वाले उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए।