Delhi High Court: सरकारी वकीलों के रिक्त पदों को भरने समेत अन्य बिंदुओं पर अदालत ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव के विरमानी ने मामले में उठाए गए मुद्दों की प्रगति और समय-समय पर हासिल की गई उपलब्धियों के बारे में न्यायालय को अवगत कराया। विरमानी ने बताया कि अपने अध्ययन और राजधानी की जिला अदालतों के दौरे के दौरान, उन्होंने विभिन्न कमियों को पाया है।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने सरकारी वकीलों के रिक्त पदों को भरने के साथ-साथ उन्हें उच्च वेतनमान देने के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ बिना किसी मुकदमे के 5-12 साल से जेल में बंद विचाराधीन कैदियों के मुद्दे पर स्वयं संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है।
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव के विरमानी ने मामले में उठाए गए मुद्दों की प्रगति और समय-समय पर हासिल की गई उपलब्धियों के बारे में न्यायालय को अवगत कराया। विरमानी ने बताया कि अपने अध्ययन और राजधानी की जिला अदालतों के दौरे के दौरान, उन्होंने विभिन्न कमियों को पाया। उन्होंने कहा निचली अदालतों में सरकारी वकीलों की भारी कमी है। उन्होंने अदालत को बताया कि हर तीन अदालतों के लिए एक वकील है। अदालत ने सरकार को इस पर गौर करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि बुनियादी ढांचे के मुद्दे पर कुछ काम किया गया है, हालांकि अदालतों में वकीलों के लिए बैठने के बुनियादी ढांचे की वर्तमान स्थिति को दर्शाने वाली कोई स्थिति रिपोर्ट नहीं है।
अधिवक्ता विरमानी के सरकारी वकीलों की रिक्तियों के बैकलॉग का मुद्दा उठाने पर दिल्ली सरकार के वकील ने मामले में समय मांगा। कोर्ट ने पहले निर्देश दिया था कि सहायक लोक अभियोजकों के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया के साथ-साथ अतिरिक्त लोक अभियोजकों की भर्ती नियमों के अनुसार की जाए। अदालत ने सभी तथ्यों को देखने के बाद दिल्ली सरकार के वकील को वकीलों की रिक्तियों और उन रिक्तियों को भरने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों के संबंध में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा स्थिति रिपोर्ट में उच्च वेतनमान प्रदान करने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदम की भी जानकारी मांगी है। अदालत ने मामले की सुनवाई 16 सितंबर तय की है।