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‘दिल्ली सरकार ने नियम तोड़ा, कानून व वित्त विभाग से नहीं ली सलाह'

Sat, 18 Jun 2016 01:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 18 Jun 2016 01:02 AM IST
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"Delhi government broke the law,  did not take the advice of the Finance and law Department '
केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला

प्रीमियम ऐप बस सेवा शुरू करने की योजना पर दिल्ली सरकार को घेरने के लिए भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता व सांसद मीनाक्षी लेखी भी मैदान में कूद पड़ी हैं। उन्होंने शुक्रवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि ऐप आधारित प्रीमियम बस सेवा का अनुमोदन करके दिल्ली सरकार ने कानून के अनिवार्य प्रावधानों का उल्लंघन किया है।

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इसके अलावा जानबूझ कर भ्रष्टाचार और दुर्भावनापूर्ण इरादे से कानून विभाग व वित्त विभाग से सलाह नहीं की। उन्होंने एप आधारित प्रीमियम बस सेवा मामले का नया रहस्योद्घाटन करते हुए उसे तुगलकी दरबार और टोपी सरकार की मनमानी का नया नमूना होने की संज्ञा दी।
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उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल ने ऐप आधारित प्रीमियम बस सेवा को शुरू करने की अनुमति अभी तक नहीं दी है, किंतु केजरीवाल सरकार ने गत 20 मई को एक अधिसूचना जारी की जिसमें कहा गया है कि उपराज्यपाल ने प्रीमियम बस सेवा को अनुमति प्रदान कर दी है।

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यह अपने आप में एक अपराध है

"Delhi government broke the law,  did not take the advice of the Finance and law Department '
दिल्ली बस सेवा - फोटो : फाइल फोटो

यह अपने आप में एक अपराध है। इसी तरह इस सेवा के लिए शीघ्र अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 का उल्लंघन किया। सरकार ने अधिनियम की धारा 66 की उपधारा (3) के खंड (एन) के अधीन आपात प्रावधानों का सहारा लिया है, जबकि ऐसी स्थिति नहीं है।

दूसरी ओर उन्होंने कहा कि पांच सितंबर 2013 को हाईकोर्ट ने दिल्ली में कोई नई क्लस्टर बस सेवा शुरू करने से पहले प्रस्ताव उसके समक्ष रखने का आदेश दिया था, लेकिन सरकार ने कोर्ट के निर्देश की अनदेखी की है।

इस सेवा से संबंधित नोट भी किसी विशेष कॉरपोरेट एग्रीगेटर से तैयार कराया हुआ लगाता, क्योंकि उन्हें जानकारी मिली है कि इस मामले में दिल्ली सरकार की ओर से बुलाई गई बैठक के दौरान एक एग्रीगेटर को छोड़कर सभी ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 का हवाला देते हुए इस योजना का विरोध किया था। इतना ही नहीं, सरकार ने किराया निर्धारित करने का अधिकार भी बस ऑपरेटर के ऊपर छोड़ दिया गया।

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