संघ के लिए इज्जत का सवाल बनी दिल्ली
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इस बार का लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के लिए ही नहीं, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लिए भी इज्जत का सवाल बन गया है।
राजधानी में भले ही लोकसभा की सात सीटें हैं, लेकिन संघ पूरी मुस्तैदी के साथ चुनाव प्रबंधन के लिए कमर कस चुका है।
नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए संघ कार्यकर्ता चप्पे-चप्पे पर अपने वोटरों पर तो नजर रखेंगे ही, साथ ही ऐसे वोटर पर उनकी नजर और भी पैनी है जो ऐन वक्त पर किसी उम्मीदवार को वोट देने का मन बनाते हैं।
हवा के रुख से चलते हैं ये वोटर
चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशी अंतिम क्षणों तक फ्लोटिंग वोटरों के सहारे होते है। ये वोटर, वोट करने तक असमंजश की स्थिति में होते हैं। हवा जिधर की होती है, उधर ही अपना रूख कर लेते है।
अमूमन यही वोटर प्रत्याशियों की जीत की कुंजी भी होते है। लिहाजा संघ कार्यकर्ता दिल्ली की 1759 बस्तियों में 50-50 के ग्रुप में बंटकर दिनभर इन पर नजर रखेंगे।
राजधानी में करीब 20-22 प्रतिशत फ्लोटिंग वोटर है जो किसी पार्टी से नहीं जुड़े होते। ये वोटर इसलिए भी अहम है क्योंकि पहली बार आम आदमी पार्टी भी मैदान में है।
AAP बिगाड़ेगी बीजेपी-कांग्रेस का खेल
दिल्ली विधानसभा चुनाव में देखा गया था कि इस तरह के ज्यादातर मतदाताओं का रुझान आम आदमी पार्टी की तरफ ही रहा। लिहाजा इन वोटरों के मिजाज पर ही हार-जीत का आंकड़ा तय होने की उम्मीद है।
यही देखते हुए राजनीतिक पार्टियों ने बुधवार को भी डोर टू डोर कैंपेन किया। रणनीतिकारों की माने तो चुनाव के एक सप्ताह पहले 29 प्रतिशत वोटर अपना मन बना लेते है कि किस पार्टी को वोट करना है।
इसी तरह 40 प्रतिशत वैसे वोट है जो परंपरागत होते है यानी काडर वोट हैं। इस काडर वोट पर सिर्फ इतना फोकस करना होता है कि वे वोट के दिन मतदान स्थल पर पहुंच सके। कांग्रेस व भाजपा के इन वोटरों का प्रतिशत बराबर है।