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दिल्ली: अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे परिजन, आग ने कई परिवारों को किया तबाह
Sun, 08 Dec 2019 02:50 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sun, 08 Dec 2019 02:50 PM IST
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दिल्ली अग्निकांड
- फोटो : PTI
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दिल्ली के अनाजमंडी इलाके में रविवार तड़के लगी भीषण आग में अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है। बताया जा रहा है कि संकरी गलियों में स्थित पैकेजिंग और बैग बनाने वाली फैक्ट्री में शार्ट सर्किट होने से आग लगी। आग में मारे गए श्रमिकों के परिवार वाले अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।
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पुलिस और फायर विभाग ने सभी झुलसे हुए लोगों और मृतकों को आरएमएल अस्पताल, एलएनजेपी और हिंदू राव अस्पताल भेजा है। लेकिन, यहां अपने रिश्तेदारों को ढूंढने के लिए पहुंचे लोगों को अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।
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सटीक जानकारी न मिलने के कारण परिजन एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं। कई परिवार ऐसे भी हैं जिनका अभी तक अपनों से संपर्क नहीं हो सका है।
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एलएनजेपी में अपने ससुर जसीमुद्दीन और अपने अन्य रिश्तेदार फैसक खान को ढूंढने पहुंचे मोहम्मद ताज अहम ने कहा कि उन्हें सुबह-सुबह दोनों के आग में फंसने की जानकारी मिली। वे अनाज मंडी इलाके में कपड़े की एक फैक्ट्री में काम करते थे। मैं अनाज मंडी पहुंचा लेकिन पुलिस प्रतिबंध और बचाव अभियान जारी होने के कारण अपने रिश्तेदारों को नहीं ढूंढ पाया।
उन्होंने कहा कि इसके बाद में एलएनजेपी गया लेकिन पुलिस और अस्पताल के कर्मचारियों ने कुछ नहीं बताया। आखिरी बार उनसे कल दोपहर तीन बजे बात हुई थी लेकिन अब कोई फोन नहीं उठा रहा है।
मोहम्मद आसिफ ने कहा कि उनके रिश्ते के भाई इमरान और इकरम थैले बनाने की फैक्ट्री में काम करते थे और हादसे में झुलस गए। दोनों उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि मैं भजनपुरा में रहता हूं । सुबह करीब छह बजे मुझे मुरादाबाद से मेरे भाईयों के घायल होने की जानकारी देने के लिए फोन आया। मैं अनाज मंडी पहुंचा लेकिन पुलिस की भारी तैनाती की वजह से उन्हें कहीं ढूंढ नहीं पाया। पुलिस ने हमें बताया कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया है लेकिन किस अस्पताल यह नहीं पता। हमने यहां (एलएनजेपी) उन्हें ढूंढा, लेकिन उनको यहां लाए जाने की पुष्टि नहीं हो पाई है।
बिहार के बेगूसराय के रहने वाले 23 वर्षीय मनोज ने बताया कि उनका 18 साल का भाई इस हैंडबैग बनाने वाली इकाई में काम करता है। उन्होंने कहा कि मेरे भाई के दोस्त से मुझे जानकारी मिली कि वह इस घटना में झुलस गया है। मुझे कोई जानकारी नहीं है कि उसे किस अस्पताल में ले जाया गया है। ’’