फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   decision on e-rickshaw by delhi high cort.

दिल्ली में चलेगा या बंद होगा ई-रिक्शा, फैसला आज

Wed, 20 Aug 2014 04:18 PM IST
Updated Wed, 20 Aug 2014 04:18 PM IST
विज्ञापन
decision on e-rickshaw by delhi high cort.

दिल्ली में ई-रिक्शा चलेगा या बंद होगा इस पर आज फैसला हो सकता है। ई-रिक्शा प्रतिबंध पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला सुनने के लिए सुबह से ही ई-रिक्शा चालकों की भीड़ कोर्ट परिसर में जुटना शुरू हो गई थी।

विज्ञापन


इस दौरान आम आदमी पार्टी विधायक राकेश गर्ग भी वहां पहुंच गए। बढ़ती भीड़ देख पहले तो पुलिस ने लोगों को वहां से हटाने की कोशिश की। अव्यवस्था बढ़ने की आशंका में पुलिस ने आप विधायक राकेश गर्ग सहित कई ई-रिक्शा चालकों को गिरफ्तार कर तिलक नगर पुलिस थाने भेज दिया। इधर कोर्ट में लंच के बाद ई-रिक्शा मामले की सुनवाई होने की संभावना है।
विज्ञापन


गौरतलब है कि कोर्ट ने दिल्ली में ई-रिक्शा को बैन कर दिया है। भले ही ये वाहन सड़क पर चलते हों लेकिन इनके लिए किसी तरह का कोई कानून नहीं है। जबकि किसी भी अन्य वाहन के चलाए जाने के संबंध में स्पष्ट कानून हैं जिन्हें मोटर व्हिकल एक्ट के नाम से जाना जाता है। कोर्ट का मानना है कि जब तक ई-रिक्शा को किसी कानून के दायरे में नहीं लाया जाता उन्हें सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
विज्ञापन


आगे जानिए क्यों 50,000 ई-रिक्शों पर मंडरा रहा है एक बड़ा बड़ा खतरा...

बिना किसी अनुमति चल रहे ई-रिक्‍शा

decision on e-rickshaw by delhi high cort.

हाई कोर्ट जिस रेग्यूलेशन की बात कर रहा है उसके लागू होने के बाद भले ही ई-रिक्शों का चलन संभव हो जाए लेकिन, कानून के बनते ही 50,000 से ज्यादा ई-रिक्‍शों पर प्रतिबंध लग जाने का भी खतरा है।

दिल्ली में ई-रिक्‍शा चला तो दिया गया, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि राजधानी की सड़कों पर दौड़ रहे इन वाहनों को बिना किसी अनुमति के चलाया जा रहा है। आम लोगों के सुरक्षा की इस अनदेखी पर कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया और राजधानी में इनके परिचालन पर बैन लगा दिया।

इस सख्ती के बाद सरकार की नींद खुली और उसने कोर्ट से वादा किया कि जल्द ही ई रिक्‍शा को मोटर व्हीकल ऐक्ट के तहत लाया जाएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया के मु‌ताबिक अब ये बात साफ है कि राजधानी में चलने वाले सभी ई रिक्‍शा को न सिर्फ सुरक्षा जांच से गुजरना होगा, बल्कि सड़क सुरक्षा की दृष्टि से भी उनकी परख की जाएगी। अब बड़ा सवाल ये है कि उन ई रिक्‍शा का क्या होगा जो पहले से चल रहे हैं‍?

अनुमान के मुताबिक दिल्ली में पहले से चल रहे ई रिक्‍शा की संख्या 40,000 से 100,000 के करीब है। हालांकि अधिकांश का मानना है कि इनकी अनुमानित संख्या 40,000 से 50,000 के बीच है। इससे साफ है कि नियंत्रण की स्‍थाई व्यवस्‍था के बनने के बाद उन चालकों और परिवारों का क्या होगा जिनका परिवार इन्हीं के भरोसे अपनी आजीविका चला रहा है।

चालकों और यात्रियों के लिए घातक हैं ई-रिक्‍शा

decision on e-rickshaw by delhi high cort.

विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादातर ई रिक्‍शा सुरक्षा के लिए आवश्यक मानकों ‌की अनदेखी कर बनाए गए हैं। यही कारण है कि ई रिक्‍शा न सिर्फ चालकों और यात्रियों के लिए घातक हैं, बल्कि सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों के लिए भी खतरे का कारण बन सकते हैं।

पहले से चलने वाले ई रिक्‍शा को असुरक्षित मानने के कुछ ठोस कारण हैं:

- माना जाता है‌ कि देश में ई रिक्‍शा बनाने की कोई 40 कंपनियां हैं। इनमें से ज्यादातर दिल्ली में ही हैं।
- इनमें से ज्यादातर कं‌पनियां ई रिक्‍शा के पार्ट चीन से मंगवाते हैं और उन्हें असेंबल करने का उनका तरीका भी प्रामाणिक नहीं है।
- साफ है कि ई रिक्‍शा के बैटरी पॉवर से लेकर पहियों के आकार, भार और वाहन के ढांचे के निर्माण में किसी मानक का पालन नहीं किया जाता।
- यहां तक कि इन वाहनों में इस्तेमाल होने वाले फ्रेम और उनके वेल्डिंग की भी कोई स्‍थापित व्यवस्‍था नहीं है।

कोई नहीं दे सकता सुरक्षा की गारंटी

decision on e-rickshaw by delhi high cort.

एक बार मोटर व्हीकल ऐक्ट बन जाने के बाद किसी भी प्रकार के वाहन के निर्माण से पूर्व सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स से उसका टाइप अप्रूवल लेना जरूरी होता है। कानून के बनते ही यह निश्चित हो जाता है कि वाहन के प्रोटोटाइप को व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टे‌बलिशमेंट (VRDE) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) से अप्रूवल प्राप्त हो। ये दोनों ही संस्‍थाएं परिचालन और सुरक्षा जांच के बाद ही किसी वाहन को अप्रूवल देती हैं।

इन नियमों के अभाव में कोई भी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता। फिलहाल ई रिक्‍शा के निर्माण में कई कंपनियां काम कर रहीं हैं। ये सभी अपने-अपने मानकों के आधार पर ई रिक्‍शा का निर्माण करते हैं। ये बात चौंकाने वाली है कि अलग-अलग मानकों पर बने वाहन समान संख्या में सवारी ढोते हैं।

कोई नहीं जानता कि जितना भार ये वाहन उठा रहे हैं उन्हें उठाने की क्षमता इनमें है भी या नहीं। इनकी स्पीड को 25 किमी/घंटा तय किए जाने पर भी ऐसा ही संदेह है।

नहीं चा‌हिए ड्राइविंग लाइसेंस

decision on e-rickshaw by delhi high cort.

चिंता का विषय यह भी है कि फिलहाल ई रिक्‍शा को कोई भी चला सकता है क्योंकि इन्हें चलाने के लिए किसी प्रकार के ड्राइविंग लाइसेंस की अनिवार्यता नहीं है। ऐसे में गंभीर सवाल उठता है कि जिन लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई से ई रिक्‍शा खरीदे हैं उनका क्या होगा?

इस समस्या के समाधान में इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपार्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग (IFTRT) का सुझाव काबिले गौर है। संस्‍था का कहना है कि पहले से बने ई रिक्‍शों को सड़क पर नहीं चलने देना चाहिए और इनका निर्माण करने वाली कंपनियां रिक्‍शा मालिकों को मुआवजा दें। असल में गलती इन कंपनियों की है जिन्होंने बिना किसी अप्रूवल के इनका निर्माण किया।

आईएफटीआरटी के सीनियर फेला और कोआर्डिनेटर एस पी सिंह का कहना है कि ऐसा नहीं है कि इन कंपनियों को नियमों का पता नहीं था। ऐसे में इस गलती के लिए सरकार और कंपनियां दोनों सामूहिक रूप से जिम्मेदार हैं।

40 कंपनियां हो सकती हैं शिकार

decision on e-rickshaw by delhi high cort.

आईएफटीआरटी के सीनियर फेला और कोआर्डिनेटर एस पी सिंह ने कहा कि ऐसे ई रिक्‍शा का चलाया जाना केवल मोटर व्हीकल ऐक्ट का ही उल्लंघन नहीं है। ये उन लोगों के साथ भी धोखा है जिन्हें ये ई रिक्‍शा बेचे गए। उन्होंने ऐसे उत्पाद बेचे जिनके बारे में उन्हें पता था कि गैरकानूनी हैं। पहले से चल रहे ई रिक्‍शा की संख्या 50,000 के करीब है।

अगर इनकी औसत कीमत एक लाख मानी जाए तो कुल ई रिक्‍शा की कीमत 500 करोड़ होगी। लगभग 40 कंपनियां इनके निर्माण में लगी हैं। ये सभी मिलकर मुआवजा दे सकती हैं। अगर ऐसा नहीं होता है तो ये सरकार की जिम्मदारी है कि उन्हें मुआवजा दे। क्योंकि ऐसे वाहानों के निर्माण्‍ा और विक्रय के लिए सरकार भी जिम्मेदार है।

सरकार अगर गुड गवर्नेंस की बात कर रही है तो इसका असर कम से कम सड़क पर तो दिखना ही चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed