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जानिए दिल्ली गैंगरेप से जुड़ी घटना विस्तार से
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 13 Mar 2014 08:20 PM IST
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वसंत विहार गैंगरेप मामले के चार दरिंदों को मिली सजा-ए-मौत की सजा पर हाईकोर्ट ने भी मोहर लगा दी। अदालत ने कहा कि इन चारों के अपराध की गंभीरता बर्दाश्त करने की सभी सीमाओं से परे है। इन सभी ने पीड़िता से गैंगरेप के अलावा उसको अमानवीय तरीके से प्रताड़ित किया, ऐसे में उनका अपराध दुर्लभतम श्रेणी में आता है।
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अदालत ने कहा कि दोषियों ने जिस बर्बरता व अमानवीय तरीके से अपराध को अंजाम दिया उससे देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी को आघात लगा। ऐसे अपराध की एक मात्र सजा मौत है। न्यायमूर्ति रेवा खेत्रपाल व न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने अपने 340 पृष्ठों के फैसले में कहा कि वर्तमान में स्कूल, कॉलेज व कार्यस्थल पर यौन शोषण के मामलों में वृद्धि देखने को मिली है।
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युवा लड़कियां व महिलाओं के साथ सार्वजनिक अत्याचार बढ़ रहा है। इस मामले में दोषियों ने जिस प्रकार पीड़िता की अंतड़ियों को बाहर निकाला, सर्दी में नग्न हालत में पीड़िता व उसके दोस्त को सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया ऐसा अपराध मानव गरिमा के खिलाफ है।
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खंडपीठ ने कहा सभी तथ्यों को देखने से स्पष्ट है कि ऐसा विचित्र व भयंकर अपराध इससे पहले उनके सामने पहले कभी नहीं आया जिसमें इस प्रकार बबर्रता बरती गई हो। अभियोजन पक्ष बिना शक इन चारों का अपराध साबित करने में सफल रहा है।
खंडपीठ ने कहा कि दोषी विनय, पवन, मुकेश, अक्षय व उसके दो अन्य साथियों ने जिस जघन्य तरीके से पीड़िता के साथ गैंगरेप किया और उसकी हत्या कर दी, उसकी कोई तुलना नहीं है।
अदालत ने कहा सभी तथ्यों को देखने से स्पष्ट है कि यह मामला दुर्लभतम श्रेणी में आता है। ऐेसे में वे चारों को मिली मृत्युदंड की सजा की पुष्टी करते हुए सजा को बहाल रखते है। खंडपीठ ने कहा निचली अदालत ने सभी तथ्यों पर गहराई से अध्ययन करने के बाद ही यह सजा सुनाई है और वे उसमें किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को उचित नहीं मानते।
फांसी पर लटकाए जाने तक न्याय पूरा नहीं: अभिभावक
गैंगरेप के चार दरिंदों को फांसी की सजा सुनते ही अदालत में उपस्थित बिटिया के माता-पिता की आंखों में एक बार फिर खुशी देखने को मिली। उन्होंने कहा हमें न्यायपालिका पर विश्वास है और अब सर्वोच्च न्यायालय से भी इंसाफ ही मिलेगा। दोषियों ने बबर्रता से समाज को शर्मशार किया है इन्हें जो भी सजा मिले कम ही है।
पीड़िता के अदालत में पहुंचते ही सभी की निगाहें उनकी तरफ लग गई। बिटिया के माता-पिता ने अदालत का फैसला सुनते ही कहा कि उन्हें ऐसी ही आशा थी। उन्होंने कहा हमारे देश की न्यायपालिका व सिस्टम पर सभी को विश्वास है। उन्होंने कहा हमें तो निचली अदालत के फैसले के बाद ही विश्वास था कि अब दोषी कहीं भी चले जाए उनको फांसी की सजा तय है। दोषी सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे इस संबंध में क्या कहना है सवाल पर मां ने कहा सर्वोच्च न्यायालय में भी ऐसा ही फैसला आएगा।
पीड़िता के पिता ने कहा उन्हें उम्मीद से ज्यादा मिला है। उन्होंने कहा जब से अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था तभी से एक एक दिन गिन रहे थे। जब तक इन चारों को फांसी पर लटकाया नहीं जाता तब तक न्याय पूरा नहीं होगा।
हर किसी के चेहरे पर दिखी खुशी
सजा सुनते ही बिटिया के माता-पिता ही नहीं हर व्यक्ति के चेहरे खुशी की लहर देखने को मिली। अदालत में मौजूद मीडिया, पुलिसकर्मी, वकील व अदालती स्टाफ हर किसी ने फांसी की सजा मिलने पर राहत की सांस ली। मीडियाकर्मी ही नहीं हर कोई एक ने मिला है इंसाफ।
मुकेश व पवन के अधिवक्ता ने कहा सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे
दोषियों को फांसी की सजा पर मोहर संबंधी फैसले का सरकारी पक्ष ने स्वागत किया है। उनका मानना है कि पुलिस ने ईमानदारी से काम किया, जांच को अदालत ने ठीक माना। हमारा काम पीड़िता को इंसाफ दिलवाना था जो मिल गया। वहीं विनय व अक्षय के अधिवक्ता ने अदालत के फैसले को राजनीति से प्रेरित बताया है तो मुकेश व पवन के अधिवक्ता ने कहा कि हाईकोर्ट ने हमारे तर्को पर विचार नहीं किया। हम सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करेंगे।
फांसी की सजा के लिए जोरदार तरीके से जिरह करने वाले विशेष सरकारी वकील दयान कृष्णन ने कहा कि हम पीड़िता को इंसाफ दिलवाने के लिए लड़े। हमने कुछ नया नहीं किया बल्कि अपने काम को सही ढंग से अंजाम दिया। देश की भावनाएं पीड़िता से जुड़ी थी। पीड़िता को इंसाफ मिला इससे खुशी है। दोषी को सजा दिलवाना ही सरकारी पक्ष का काम है। जब काम का सही फल मिलता है तो खुशी होती ही है।
फांसी की सजा मानवाधिकार के खिलाफ
दोषी विनय व अक्षय के अधिवक्ता ए.पी.सिंह सजा का फैसला सुनते ही भरी अदालत में खंडपीठ से कहा फैसला ठीक नहीं है। फांसी की सजा मानवाधिकार के खिलाफ है, लेकिन जजों ने उनकी बात पर ध्यान ही नहीं दिया व फैसला सुनाते ही चैंबर में चले गए।
सिंह ने अदालत से बाहर भी कहा अदालत पर राजनीतिक दवाब था और उन्होंने उसी दवाब में सही फैसला नहीं दिया। उन्होंने कहा पहला फैसला विधानसभा चुनावों से पूर्व आया अब फैसला ठीक लोकसभा चुनावों से पहले किया गया है।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने भी कहा था कि जब हम किसी को जिंदगी दे नहीं सकते तो किसी की जान लेने का भी अधिकार नहीं है। ऐसे में फांसी की सजा देना उचित नहीं है। इसके अलावा हमने अदालत के समक्ष जो तथ्य रखे उन पर विचार ही नहीं किया गया। अब सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करेंगे।
मुकेश व पवन के अधिवक्ता एमएल शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा खंडपीठ ने उनक पक्ष पर विचार ही नहीं किया अब सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करेंगे।
एपी सिंह विरोधी लगे नारे
अक्षय व विनय के अधिवक्ता द्वारा लिखी किताब दामिनी एक पॉलिटीकल मर्डर पर आपत्ति जताते हुए काफी लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिवक्ता सिंह ने अपनी पुस्तक में काफी आपत्तिजनक टिप्पणियां की है। उन्होंने नारी का सम्मान नहीं किया उसी का विरोध कर रहे है।
अदालत में कब आया फैसला
बृहस्पतिवार को फैसला तय नहीं था, खंडपीठ ने प्रात: 13.30 बजे तय किया कि आज ही फैसला दिया जाएगा। आनन फानन में बचाव पक्ष, सरकारी पक्ष व पत्रकारों को जानकारी दी गई कि फैसला दोपहर 2.15 बजे सुनाया जाएगा।
2 बजे वकीलों को अदालत में आने की मिली अनुमति
2 बजे सभी पत्रकार व पीड़िता के माता-पिता भी अदालत में पहुंचे
2.25 बजे जज अदालत में पंहुचे व कहा फैसला तीन बजे सुनाया जाएगा।
2.59 मिनट पर पुन: जज अदालत में पहुंचे
3.00 बजे उन्होंने फैसला पढ़ना शुरू किया
3.05 बजे तक मुख्य अंश पढ़ने के बाद कहा चारों को फांसी की सजा बहाल
किस धारा में क्या मिली थी सजा
धारा 302: चारों दोषियों को मृत्यु तक फांसी पर लटकाने का आदेश। सभी पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना अदा न करने पर एक-एक माह कैद की सजा।
धारा 120बी: चारों को आजीवन कारावास, पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना-जुर्माना अदा न करने पर एक-एक माह की अतिरिक्त कैद।
धारा 365: चारों को सात-सात वर्ष की कैद व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना-जुर्माना अदा न करने पर एक-एक माह की अतिरिक्त कैद।
धारा 366: चारों को सात-सात वर्ष की कैद व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना-जुर्माना अदा न करने पर एक-एक माह की अतिरिक्त कैद।
धारा 376 (2) (जी): चारों को आजीवन कारावास, पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना-जुर्माना अदा न करने पर एक-एक माह की अतिरिक्त कैद।
धारा 377: चारों को दस-दस वर्ष की कैद, पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना-जुर्माना अदा न करने पर एक-एक माह की अतिरिक्त कैद।
धारा 307: चारों को सात-सात वर्ष की कैद व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना-जुर्माना अदा न करने पर एक-एक माह की अतिरिक्त कैद।
धारा 201: चारों को सात-सात वर्ष की कैद व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना-जुर्माना अदा न करने पर एक-एक माह की अतिरिक्त कैद।
धारा 395 व 397: चारों को दस-दस वर्ष की कैद, पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना-जुर्माना अदा न करने पर एक-एक माह की अतिरिक्त कैद।
धारा 412: चारों को दस-दस वर्ष की कैद, पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना-जुर्माना अदा न करने पर एक-एक माह की अतिरिक्त कैद।
अदालत के निर्देशनुसार चारों दोषियों पर कुल 55-55 हजार रुपये जुर्माना किया गया है।