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Delhi Election Results 2020: सियासी पार्टियों में हार-जीत को लेकर दिनभर माथापच्ची 

Mon, 10 Feb 2020 05:54 PM IST
दुष्यंत शर्मा नवनीत शरण, नई दिल्ली
नवनीत शरण, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 10 Feb 2020 05:54 PM IST
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Delhi Vidhan Sabha Chunav Results 2020 discussion on victory defeat in parties after polling
दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम 2020 - फोटो : self

दिल्ली विधानसभा चुनाव में किस पार्टी की सरकार बनेगी, इसका फैसला मंगलवार यानी 11 फरवरी को नतीजे आने के साथ ही हो जाएगा।  लेकिन आठ फरवरी को हुए मतदान से लेकर नतीजों के बीच का समय नेताओं के लिए बेहद बेचैनी भरा नजर आ रहा है। मतदान के अगले दिन रविवार को सभी राजनीतिक पार्टियों में जीत-हार को लेकर दिनभर माथापच्ची होती रही। तीनों प्रमुख पार्टियां अपने-अपने गुना-गणित से जीत के दावे कर रही है। सभी दलों को एग्जिट पोल के आंकड़े पर विश्वास नहीं है।

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आम आदमी पार्टी जहां दिल्ली के विकास पर अपनी जीत सुनिश्चित मान कर चल रही है तो भाजपा हिंदुत्व कार्ड को लेकर आश्वस्त है। वहीं कांग्रेस भी खुद को रेस में मान रही है। यहां तक कि त्रिशंकु स्थिति में आप के साथ गठबंधन कर सरकार बनाने पर भी विचार कर रही है। क
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भाजपा को हिंदुत्व कार्ड का भरोसा
दोपहर ढलने के बाद वोटरों की बढ़ी तादाद पर सभी पार्टियों की निगाहे हैं। खासतौर पर भाजपा इस समय पड़ने वाले वोटर को अपने पक्ष में मान कर चल रही है। दरअसल भाजपा मान कर चल रही है कि इस दौरान हिंदुत्व कार्ड चला। जब दिल्ली की जनता ने देखा कि शाहीन बाग मुद्दे के समर्थन में वोट ज्यादा पड़ रहे है तो घर से निकल कर वोटरों ने देर शाम तक लाइन लगाकर भाजपा के पक्ष में वोट किया।
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संघ के तरफ से भी दोपहर ढलने के बाद निर्देश जारी किया गया था कि वोटिंग की सुस्त रफ्तार को तेज कराए। वहीं आम आदमी पार्टी का दावा है कि  विकास के नाम पर सुबह से शाम तक लोगों ने पिछले चुनाव की तरह ही वोट दिया। कांग्रेस पार्टी की माने तो एग्जिट पोल जो भी रहा हो लेकिन परंपरागत वोटर ने समर्थन दिया है। 

 आप जीत के प्रति आश्वस्त
पिछली बार की तरह वोट प्रतिशत और इसके बाद आए एग्जिट पोल से आम आदमी पार्टी अपनी जीत पक्की मान कर चल रही है। आम आदमी पार्टी के रणनीतिकारों की मानें तो दिल्ली वालों ने ज्यादा संख्या में वोट किया। यह वोट सत्ता वापसी का संकेत है।

वहीं, भाजपा की माने तो सत्ता विरोधी लहर के कारण बड़ी संख्या में वोटर अपने घर से निकले। जनता बदलाव के लिए निकली। जो अमूमन सरकार के खिलाफ ही होता है। दिल्ली के वोटरों का ध्रुवीकरण हुआ है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ा और पार्टी दूसरे स्थान पर रही, यही ट्रेंड विधानसभा का भी रहा।

यूथ वोटरों को अपने पक्ष में मान रही भाजपा

भाजपा यह मान कर चल रही है कि युवाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में वोटिंग की है। जबकि आप का तर्क है कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था के कारण युवाओं ने फिर से आप को समर्थन दिया है। महिला वोटरों को लेकर जहां आप आश्वस्त है कि डीटीसी में मुफ्त सफर का कार्ड बेहतर चला है। वहीं भाजपा यह मान कर चल रही है कि यह वर्ग अपने बच्चों की बेरोजगारी को लेकर भाजपा के पक्ष में वोट किया है। उधर कांग्रेस पार्टी मान कर चल रही है कि ज्यादा संख्या में प्रत्याशियों के चुनावी मैदान में होने और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विकास के काम पर वोट मिला है। 

झुग्गी झोपड़ी के वोटरों पर आप-भाजपा का दावा
झुग्गी झोपड़ी के वोटर को लेकर सभी पार्टियां अपने तरीके से परिभाषित कर रही है। भाजपा का दावा है कि झुग्गी और अनधिकृत कॉलोनियों के वोटरों का ध्रुवीकरण हुआ है। अनधिकृत कॉलोनी के लोगों ने अधिकृत कॉलोनी होने से खुश हैं। लिहाजा बड़ी संख्या में लोगों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया है। वहीं, आम आदमी पार्टी का दावा है कि झुग्गी व अनधिकृत कॉलोनी के लोगों ने झाड़ू को ही फिर से अपनाया है। इन इलाकों में वे बाजी मार रहे है। कांग्रेस भी अपने को पीछे मान कर नहीं चल रही है। इस इलाके में रहने वाले पूर्वांचली वोटरों पर भाजपा अपना दावा ठोक रही है।

अल्पसंख्यक वोटर
अल्पसंख्यक समुदाय के वोटरों को लेकर आम आदमी पार्टी अपनी जीत बता रही है। रणनीतिकार मान रहे है कि भाजपा के शाहीन बाग मुद्दे को हवा देने से जहां ना केवल बहुसंख्यक बल्कि अल्पसंख्यक वर्ग भी नाराज है। लिहाजा अन्य जगहों पर पड़े कम वोट इस कमी को पूरा करेगा। आप के रणनीतिकारों का कहना है कि कांग्रेस को अल्पसंख्यक आजमा चुके हैं। भाजपा के खिलाफ है। भाजपा ने फिलहाल इसे लेकर चुप्पी साध ली है। कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रत्याशी का दावा है कि यह वर्ग उनके पाले में लोकसभा चुनाव की तरह ही आया है।

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