फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Dark spots on roads in the capital will end with timer-rich smart LED

दिल्ली की सड़कों पर अब नहीं होगा अंधेरा: PWD का फैसला, लगने जा रही हैं टाइमर-युक्त स्मार्ट LED लाइटें

Wed, 03 Sep 2025 07:54 AM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 03 Sep 2025 07:54 AM IST
सार

दिल्ली में अब लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने सड़कों पर डार्क स्पॉट को खत्म करने का फैसला किया है। अब पुरानी लाइटों को हटाकर टाइमर-युक्त स्मार्ट एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी।

विज्ञापन
Dark spots on roads in the capital will end with timer-rich smart LED
दिल्ली आईजीआई रोड - फोटो : iStock

विस्तार

राजधानी की सड़कों पर अंधेरे का खतरा धीरे-धीरे खत्म होने जा रहा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने पुरानी पीली सोडियम वेपर स्ट्रीट लाइटों को हटाकर टाइमर-युक्त स्मार्ट एलईडी लाइटें लगाने का फैसला किया है।
विज्ञापन


विभाग का कहना है कि इससे शहर के डार्क स्पॉट पूरी तरह खत्म होंगे और खासतौर पर महिलाओं समेत आम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट एलईडी लाइटों में स्ट्रोनॉमिक टाइमर लगा होगा, जो खुद-ब-खुद अंधेरा होते ही लाइटें जला देगा और सूरज निकलते ही उन्हें बंद कर देगा। यह प्रणाली बिजली बचत के साथ सड़क पर रोशनी की उपलब्धता भी सुनिश्चित करेगी। 
विज्ञापन


एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एस्ट्रोनॉमिक एलईडी लाइटें लगाने की पहल पूर्ववर्ती आप सरकार ने करीब 4-5 साल पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की थी। उस समय 5,000 से 6,000 लाइटें लगाई गईं, जिनमें से ज्यादातर नई दिल्ली जिले में हैं। लेकिन प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। अब विभाग ने इसे पूरे शहर में लागू करने की तैयारी कर ली है।
विज्ञापन
विज्ञापन


डीपीसीसी फिर करेगा प्रदूषण कारकों का अध्ययन
नई दिल्ली। राजधानी के प्रदूषण के वास्तविक कारकों की सही तस्वीर सामने लाने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) फिर से स्रोत विभाजन अध्ययन (सोर्स अप्पॉर्शनमेंट स्टडी) शुरू करेगी। यह अध्ययन बताएगा कि दिल्ली में प्रदूषण के मुख्य कारक कौन से हैं। साथ ही, यह भी बताएगा कि प्रत्येक कारक का कितना योगदान है। यह रिपोर्ट प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में मददगार साबित होगी।

डीपीसीसी ने हाल ही में अपनी बोर्ड बैठक में इस आशय के एक प्रस्ताव को मंजूरी भी दी है। गौरतलब है कि दिल्ली में समस्या बन चुके प्रदूषण की सही प्रामाणिक स्थिति आज भी उपलब्ध नहीं है। आईआईटी कानपुर की एक रिपोर्ट एक दशक से भी पुरानी है, जबकि सफर इंडिया की रिपोर्ट पांच साल से भी ज्यादा पुरानी है। ऐसे में जब समस्या की जड़ ही स्पष्ट रूप से पता नहीं होगी, तो उसका समाधान भी संभव नहीं होगा। 

92 हजार लाइटें पीडब्ल्यूडी के अधीन
दिल्ली में कुल 2.8 लाख पीली सोडियम स्ट्रीट लाइटें हैं, जिनमें से 92,163 लाइटें पीडब्ल्यूडी के अधीन आती हैं। इनमें से 90,666 अभी कार्यरत हैं। अधिकारियों का कहना है कि पीली लाइटें न केवल कम रोशनी करती है बल्कि बिजली की खपत भी अधिक होता है। वहीं, स्मार्ट एलईडी लाइटें ज्यादा चमकदार होने के साथ ऊर्जा खपत भी कम करती हैं।


अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में 1,697 डार्क स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इनमें से 400 को ठीक किया जा चुका है, जबकि बाकी स्थानों पर सितंबर के अंत तक काम पूरा कर लिया जाएगा। नई स्मार्ट लाइटें क्षेत्रवार लगाई जाएंगी। पहले चरण में उत्तर, उत्तर पश्चिम और दक्षिण पश्चिम जिलों में करीब 40,000 एलईडी फिटिंग्स पुरानी लाइटों की जगह लगाई जाएंगी। इस काम के लिए जल्द ही टेंडर निकाले जाएंगे। परियोजना पर लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed