{"_id":"e36863cf0c86713224d3b4db7224a5d8","slug":"damayanti-goyal-died","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब नहीं सुनाई देगी वो दमदार आवाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब नहीं सुनाई देगी वो दमदार आवाज
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 04 Feb 2014 12:23 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मृदुभाषी और बातचीत की शैली से सबको अपना बनाने वाली आवाज शांत हो गई। दमयंती गोयल ने जिस वक्त महापौर का चुनाव लड़ा उस वक्त भाजपा की स्थिति शहर में अच्छी नहीं थी।
भाजपा की एक महिला विधायक प्रत्याशी और लोकसभा में दूसरे प्रत्याशी हार गए थे। मेयर की महिला सीट हो जाने के बाद पार्टी ने दमयंती गोयल को टिकट दिया तो वह मजबूती से चुनाव लडीं।
अन्य महिला प्रत्याशी मंच पर बोलने में भी संकोच करती थीं, वहीं दमयंती गोयल खुद चुनावी सभा को संबोधित करती थीं। इस छवि को निगम में भी बरकरार रखा। दमयंती गोयल (60) लंबे समय से बीमार थीं। वह अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़कर गई हैं।
विज्ञापन
कविनगर के सर्वोदय अस्पताल में उन्होंने शाम करीब सवा चार बजे अंतिम सांस ली। करीब डेढ़ साल पहले ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद से ही उनकी हालत खराब थी। उनके इकलौते बेटे मयंक गोयल ने बताया कि करीब चार महीने से उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई थी।
करीब आठ दिन से वह कविनगर के सर्वोदय अस्पताल में भर्ती थी। उनके निधन की खबर मिलते ही निगम अधिकारी, राजनीतिक, सामाजिक और शहर के गणमान्य लोगों की उनके आवास पर भीड़ लग गई
महापौर तेलूराम कांबोज, भाजपा पार्षद मुकेश त्यागी, सरदार एसपी सिंह, अशोक मोंगा, बलदेवराज शर्मा, अतुल गर्ग, दिनेश गोयल, ब्रजपाल तेवतिया, संजीव शर्मा, जगदीश साधना, आशु वर्मा, पृथ्वी सिंह, महेश अग्रवाल, सुंदरदास मक्कड़, मुरलीधर मल्होत्रा, मनोहर लाल गोगिया, मनवीर नागर आदि भी पहुंचे।
राजनीतिक सफरनामा
किशोर अवस्था से ही सामाजिक कार्यों में विशेष रुचि रखने वाली दमयंती ने वर्ष 2006 में सीधे महापौर पद से राजनीतिक सफर शुरू किया था। वह 2012 तक महापौर पद पर रहीं और तेजतर्रार मेयर के रूप में पहचान बनाई।
राजनीतिक शास्त्र और समाज शास्त्र से स्नातक की उपाधि हासिल करने के बाद से ही वह आरएसएस की महिला विंग राष्ट्र सेविका समिति से जुड़ी थीं। वह समिति की पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख के पद पर रहीं।
बच्चों से खास प्रेम के चलते उन्होंने वर्ष 1999 से 2004 तक अशोक नगर स्थित घर पर ही गरीब बच्चों के लिए अहिल्याबाई संस्कार केंद्र चलाया। यहां निशुल्क शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को संस्कार दिए।
पशुओं-प्रकृति से था खास लगाव
दमयंती गोयल के पति महेश चंद ने बताया कि शहर में आवारा पशुओं के लिए उन्होंने नंदी पार्क की स्थापना कराई। स्ट्रीट डॉग के लिए उन्होंने स्वान केंद्र बनवाया। हर वर्षा ऋतु में वह पौधारोपण को खास तवज्जो देती थी।
अधूरा रहा सपना
दमयंती गोयल का सपना था कि पक्का तालाब में जिस तरह पूर्व में रामलीला के दौरान केवट संवाद लीला का मंचन किया जाता था उसी तरह तालाब के जीर्णोद्धार करके रामलीला मंचन कराया जाए। तालाब का जीर्णोद्धार तो हो गया, लेकिन साफ पानी का इंतजाम न होने से लीला मंचन का सपना अधूरा रह गया।
हिंडन घाट पर आज होगा अंतिम संस्कार
महापौर दमयंती गोयल का अंतिम संस्कार आज हिंडनघाट पर किया जाएगा। उनके अशोक नगर स्थित आवास से सुबह 10 बजे अंतिम यात्रा शुरू होगी। उनके संस्कार में राजनीतिक व सामाजिक हस्तियां मौजूद रहेंगी। भाजपा के कई बड़े नेता भी इसमें शामिल होने पहुंच सकते हैं।
विज्ञापन
भाजपा की एक महिला विधायक प्रत्याशी और लोकसभा में दूसरे प्रत्याशी हार गए थे। मेयर की महिला सीट हो जाने के बाद पार्टी ने दमयंती गोयल को टिकट दिया तो वह मजबूती से चुनाव लडीं।
विज्ञापन
अन्य महिला प्रत्याशी मंच पर बोलने में भी संकोच करती थीं, वहीं दमयंती गोयल खुद चुनावी सभा को संबोधित करती थीं। इस छवि को निगम में भी बरकरार रखा। दमयंती गोयल (60) लंबे समय से बीमार थीं। वह अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़कर गई हैं।
विज्ञापन
कविनगर के सर्वोदय अस्पताल में उन्होंने शाम करीब सवा चार बजे अंतिम सांस ली। करीब डेढ़ साल पहले ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद से ही उनकी हालत खराब थी। उनके इकलौते बेटे मयंक गोयल ने बताया कि करीब चार महीने से उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई थी।
करीब आठ दिन से वह कविनगर के सर्वोदय अस्पताल में भर्ती थी। उनके निधन की खबर मिलते ही निगम अधिकारी, राजनीतिक, सामाजिक और शहर के गणमान्य लोगों की उनके आवास पर भीड़ लग गई
महापौर तेलूराम कांबोज, भाजपा पार्षद मुकेश त्यागी, सरदार एसपी सिंह, अशोक मोंगा, बलदेवराज शर्मा, अतुल गर्ग, दिनेश गोयल, ब्रजपाल तेवतिया, संजीव शर्मा, जगदीश साधना, आशु वर्मा, पृथ्वी सिंह, महेश अग्रवाल, सुंदरदास मक्कड़, मुरलीधर मल्होत्रा, मनोहर लाल गोगिया, मनवीर नागर आदि भी पहुंचे।
राजनीतिक सफरनामा
किशोर अवस्था से ही सामाजिक कार्यों में विशेष रुचि रखने वाली दमयंती ने वर्ष 2006 में सीधे महापौर पद से राजनीतिक सफर शुरू किया था। वह 2012 तक महापौर पद पर रहीं और तेजतर्रार मेयर के रूप में पहचान बनाई।
राजनीतिक शास्त्र और समाज शास्त्र से स्नातक की उपाधि हासिल करने के बाद से ही वह आरएसएस की महिला विंग राष्ट्र सेविका समिति से जुड़ी थीं। वह समिति की पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख के पद पर रहीं।
बच्चों से खास प्रेम के चलते उन्होंने वर्ष 1999 से 2004 तक अशोक नगर स्थित घर पर ही गरीब बच्चों के लिए अहिल्याबाई संस्कार केंद्र चलाया। यहां निशुल्क शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को संस्कार दिए।
पशुओं-प्रकृति से था खास लगाव
दमयंती गोयल के पति महेश चंद ने बताया कि शहर में आवारा पशुओं के लिए उन्होंने नंदी पार्क की स्थापना कराई। स्ट्रीट डॉग के लिए उन्होंने स्वान केंद्र बनवाया। हर वर्षा ऋतु में वह पौधारोपण को खास तवज्जो देती थी।
अधूरा रहा सपना
दमयंती गोयल का सपना था कि पक्का तालाब में जिस तरह पूर्व में रामलीला के दौरान केवट संवाद लीला का मंचन किया जाता था उसी तरह तालाब के जीर्णोद्धार करके रामलीला मंचन कराया जाए। तालाब का जीर्णोद्धार तो हो गया, लेकिन साफ पानी का इंतजाम न होने से लीला मंचन का सपना अधूरा रह गया।
हिंडन घाट पर आज होगा अंतिम संस्कार
महापौर दमयंती गोयल का अंतिम संस्कार आज हिंडनघाट पर किया जाएगा। उनके अशोक नगर स्थित आवास से सुबह 10 बजे अंतिम यात्रा शुरू होगी। उनके संस्कार में राजनीतिक व सामाजिक हस्तियां मौजूद रहेंगी। भाजपा के कई बड़े नेता भी इसमें शामिल होने पहुंच सकते हैं।