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साइबर एक्सपर्ट ही हो गए साइबर क्राइम के शिकार
सौरभ श्रीवास्तव/अमर उजाला, नोएडा
Updated Thu, 26 Feb 2015 08:12 PM IST
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साइबर क्राइम पर बड़े-बड़े लेक्चर देने और इसके खात्मे की तरकीब निकालने वाले साइबर एक्सपर्ट अनुज अग्रवाल खुद ही इसके शिकार हो गए। खास बात यह है कि जिस समय वे नोएडा में साइबर क्राइम पर लेक्चर दे रहे थे, उसी दौरान यह घटना हुई। बिना उनकी अनुमति के चेन्नई की एक कंपनी ने उनका ई-इंश्योरेंस ऑनलाइन अकाउंट खोल दिया। उनके सभी गोपनीय रिकार्ड इस कंपनी के पास हैं जिनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने मामले की शिकायत साइबर सेल में की है।
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पुलिस के अनुसार, कंप्यूटर सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अनुज 13 फरवरी सेक्टर-62, बी-30, सीडैक कॉलेज में साइबर एक्सपर्ट के साथ लेक्चर दे रहे थे। इस दौरान उन्हें चेन्नई की एक कंपनी से ई-मेल आया, जिसमें लिखा था कि उनके विभिन्न इंश्योरेंस के कागजात को सुरक्षित रखने के लिए ई-इंश्योरेंस अकाउंट खोल दिया गया है।
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मेल देखते ही उनके होश उड़ गए, क्योंकि उन्हें ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) तक दे दिया गया था। उन्होंने मेल के जरिये कंपनी से पूछा कि बिना अनुमति के उनका अकाउंट कैसे खोला गया तो कंपनी की तरफ से जवाब आया कि उनकी सारी गोपनीय जानकारी उनके पास है जिससे अकाउंट खोला गया है। वे अकाउंट के जरिये कोई भी लेन-देन कर सकते हैं। अनुज ने बताया कि कंपनी ने उन्हें जो मेल भेजा था, उसमें उनका पूरा नाम, जन्मतिथि, पैन कार्ड नंबर व अन्य ई-मेल आईडी तक लिखा हुआ था, चूंकि वे साइबर एक्सपर्ट हैं तो ऐसे साइबर क्राइम के हानियों को वे अच्छी तरह से समझते हैं।
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ईरडा (इंश्योरेंस रेगुलेरिटी डेवलेपमेंट अथॉरिटी) के नियमों के तहत केवाईसी (नो योर कस्टमर) कराना हर बैंक व ऑनलाइन अकाउंट खोलने वाले संस्थान को जरूरी है। इस नियम का उल्लंघन करने पर आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है। केवाईसी के तहत संबंधित व्यक्ति जिसका ऑनलाइन अकाउंट खोलना होता है, उसे संबंधित बैंक या संस्थान के समक्ष मूल दस्तावेज के साथ प्रस्तुत होना पड़ता है। इसके बाद ग्राहक की सहमति लेकर अकाउंट खोला जाता है। यहां पर केवाईसी तो दूर बिना उनकी अनुमति के सभी गोपनीय रिकार्ड चोरी करके अकाउंट खोल दिया गया।