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सम-विषम फार्मूला को यहां से मिली हरी झंडी
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 22 Jan 2016 06:20 AM IST
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सम-विषम फॉर्मूला लागू होने के तुरंत बाद बेशक राजधानी की आबोहवा में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। लेकिन इसके न होने पर स्थिति गंभीर हो सकती थी। हालांकि, दूसरे सप्ताह में मौसमी दशाओं के अनुकूल से योजना का बेहतर असर दिखा। इसका खुलासा सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट में हुआ है। बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में सीएसई ने माना है कि योजना लागू रहने के दौरान दिल्ली की आबोहवा में सुधार हुआ। खास बात यह कि योजना खत्म होने के बाद पहले सोमवार को पीएम स्तर में 57 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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दरअसल, सीएसई ने सम-विषम फार्मूले का असर मापने के लिये नवंबर से जनवरी तक के रीयल टाइम मॉनीटरिंंग स्टेशन के आंकड़ों की समीक्षा की। सीएसई का मानना है कि हालांकि, सम-विषम फार्मूले से आबोहवा साफ होने की सीमित संभावना थी, फिर भी विपरीत मौसमी दशाओं के बीच इससे बेहतर परिणाम मिला। फॉर्मूला लागू करते वक्त राजधानी में हवा बहुत धीमे-धीमे चल रहीं थी। वहीं, तापमान कम होने के साथ पश्चिमी विक्षोभ का भी असर था लेकिन योजना खत्म होते ही सारे फायदे बेकार हो गए।
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मसलन, 18 जनवरी को दिल्ली में धुल के स्तर में 57 फीसदी का इजाफा हुआ। बढ़ोत्तरी मंगलवार को भी जारी रही। बुधवार को इसमें थोड़ी सी कमी। खास बात यह कि एक जनवरी व 18 जनवरी की हवा समान थी। फिर भी, 18 जनवरी को पीएम का स्तर 80 फीसदी ज्यादा रहा।
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सीएसई के मुताबिक, योजना के दौरान सबसे बेहतर आबोहवा 15 जनवरी को रही। इस वक्त मौसम भी साथ दे रहा था। आखिरी दिन पीएम 2.5 के स्तर में 155 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की गिरावट दर्ज की गई। 5 नवंबर के बाद सर्दी के मौसम का यह सबसे बेहतर दिन था।
रिपोर्ट तैयार करने में सीएसई ने सेटेलाइट इमेज का भी आकलन किया। इसमें साफ दिखा कि एनसीआर के शहरों की तुलना में दिल्ली की आबोहवा ज्यादा साफ रही। पीक आवर्स की तुलना में नॉन पीक आवर्स में आबोहवा साफ रही। जबकि योजना खत्म होने के बाद पूरे दिन प्रदूषकों का स्तर अमूमन एक सा रहा।