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पूर्वोत्तर में प्रोजेक्ट के नाम पर करोड़ों की ठगी, सरगना ने खुद को बताया आईएएस

Tue, 01 Oct 2019 05:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजीव कुमार, नई दिल्ली
राजीव कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 01 Oct 2019 05:56 AM IST
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Crores cheated in the name of the project in the Northeast
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नगालैंड और मणिपुर में एलईडी लाइट प्रोजेक्ट दिलाने के नाम पर आंध्र प्रदेश की एक कंपनी से करोड़ों रुपये की ठगी कर ली गई। ठगों के सरगना ने खुद को आईएएस अधिकारी बता कंपनी को फर्जी संविदा दिलाई। 

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संविदा के फर्जी होने की बात पता चली तो कंपनी के मालिक ने कथित आईएएस समेत छह लोगों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में शिकायत की है।

जानकारी के मुताबिक, मूलत: आंध्र प्रदेश के नेल्लोर निवासी एसके मुश्ताक की एलईडी लाइटिंग प्रोडक्ट बनाने की कंपनी है। कंपनी के आंध्र और तेलंगाना में कई डीलर और डिस्टीब्यूटर हैं। कंपनी के कार्यालय नेल्लोर और दिल्ली में हैं। 
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मुश्ताक ने ईओडब्ल्यू को दी शिकायत में कहा कि वर्ष 2017 में हैदराबाद निवासी जोजी रेड्डी नाम का व्यक्ति उनसे मिला। उसने बताया कि नगालैंड और मणिपुर सरकार को एलईडी प्रोजेक्ट के लिए कंपनी की जरूरत है। 
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वह एक आईपीएस प्रेम रतन शर्मा को जानते हैं, जो पूर्वोत्तर राज्यों की सरकारों के प्रोजेक्ट दिलाते हैं। जोजी रेड्डी व और उसके सहयोगी नजीर अहमद उस प्रोजेक्ट को लेकर लगातार मुश्ताक के संपर्क में थे। 28 जून 2017 को दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन में बैठक हुई, जिसमें जोजी रेड्डी, नजीर अहमद, महेंद्र पाल अरोड़ा व सिद्धार्थ जैन ने प्रोजेक्ट के भुगतान और सेवा शर्तों को लेकर बातचीत की।

अगले दिन खुद को नार्थ ईस्ट राज्य का आईएएस बताने वाले प्रेम रतन शर्मा के साथ बैठक हुई। कथित प्रेम रतन ने कहा कि उनकी कंपनी का प्रोफाइल ठीक नहीं है। इसलिए उन्होंने एक अन्य कंपनी को प्रोजेक्ट में जोड़ लिया। इसके बाद उसने नगालैंड के लिए 58.49 करोड़ और मणिपुर के लिए 27.40 करोड़ एलईडी बल्ब की सप्लाई का ऑर्डर कंपनी को दे दिया। 

उसने कंपनी को प्रोजेक्ट पाने के लिए 10 फीसदी राशि धरोहर के रूप में जमा कराने को कहा। कंपनी ने प्रेम रतन शर्मा के बैंक खातेे में 6.5 करोड़ रुपये अलग-अलग दिनों में जमा कर दिए। उसके बाद प्रेम रतन शर्मा ने साउथ एक्सटेंशन में दोनों राज्यों के कथित प्रोजेक्ट की कॉपी मुश्ताक को सौंप दी। वादे के मुताबिक, कंपनी को 15 दिन के काम के बाद 50 फीसदी रकम मिलनी थी। 


भुगतान नहीं मिला तो मुश्ताक ने प्रेम रतन से संपर्क साधा। उसने फोन नहीं उठाया तो मुश्ताक ने वर्क ऑर्डर की जांच की। वह फर्जी निकला। ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने इस मामले की जांच चलने की बात कहकर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

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