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घायल युवक की मौत पर अस्पताल में हंगामा, गुस्साए परिजनों ने लगाया  धोखा देने का आरोप

ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Fri, 19 May 2017 10:33 AM IST
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violence on death of a youth in faridabad

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एनआईटी पांच स्थित डॉक्टर टुडे आईवीएफ एंड मल्टीस्पेशलिटी क्लीनिक में भर्ती घायल युवक की बृहस्पतिवार दोपहर को मौत होने पर परिजनों ने हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर 102 एंबुलेंस चालकों से मिलीभगत और इलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की।
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पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। एसएचओ एनआईटी थाना इंस्पेक्टर मित्रपाल ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है, मामले की जांच मुजेसर थाने की पुलिस कर रही है।

 
निजी कंपनी में क्वालिटी इंस्पेक्टर पद पर तैनात हरेंद्र सिंह बुधवार शाम ड्यूटी के बाद बाइक से पर्वतीय कॉलोनी स्थित घर लौट रहा था। बाटा चौक पावर हाउस के पास अज्ञात वाहन की टक्कर लगने से हरेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया। ड्यूटी से लौट रहे कंपनी के अन्य कर्मचारियों ने उसे बीके सिविल अस्पताल पहुंचाया।

भाई मनोज कुमार ने बताया कि हालत नाजुक देख बीके के डॉक्टरों ने हरेंद्र को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रेफर कर दिया। आरोप है कि 102 एंबुलेंस का चालक  सफदरजंग न ले जाकर हरेंद्र को एनआईटी पांच स्थित डॉक्टर टुडे अस्पताल ले गया।

बृहस्पतिवार दोपहर करीब डेढ़ बजे डॉक्टरों ने हरेंद्र का सीटी स्कैन कराने के लिए उसे एंबुलेंस से बीके चौक स्थित एक डायग्नोस्टिक सेंटर भिजवाया। सीटी स्कैन करने वाले रेडियोलॉजिस्ट ने बताया कि हरेंद्र जिंदा नहीं है। मौत से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल पहुंच कर हंगामा किया।

लोगों का आरोप है कि डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही की और सीटी स्कैन के नाम पर धोखा किया। हंगामा बढ़ते देख अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस बुला ली। इस दौरान सूचना मिलने पर हरेंद्र की कंपनी के भी कर्मचारी अस्पताल पहुंच गए। मामले की जांच कर रहे मुजेसर थाने के एएसआई ओम प्रकाश ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।       
   
102 एंबुलेंस पर लगे कमीशनखोरी के आरोप       
मृतक के परिजनों ने सरकारी 102 एंबुलेंस सेवा पर कमीशनखोरी के आरोप लगाए। भाई हरबीर सिंह के मुताबिक बीके सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने हरेंद्र को सफदरजंग अस्पताल रेफर किया था। लेकिन, 102 एंबुलेंस चालक ने यह कह कर डराया कि सफदरजंग तक जाते-जाते हरेंद्र की सांसें थम जाएंगी।

उसने ही हरेंद्र को डॉक्टर टुडे ले जाने की सलाह दी। यह भी आरोप है कि चालक ने डॉक्टर टुडे अस्पताल में पहले ही फोन कर सूचना दे दी थी, यही वजह है कि एंबुलेंस पहुंचने से पहले ही वहां डॉक्टर मरीज के इंतजार में खड़े मिले।

डबुआ कॉलोनी निवासी सुधीर का आरोप है कि बीके सिविल अस्पताल में 102 एंबुलेंस चालक निजी अस्पतालों से कमीशन लेकर मरीज दिल्ली न ले जाकर इन अस्पतालों में पहुंचा देते हैं।

मृतक के परिजनों ने पुलिस से मांग की कि 102 एंबुलेंस से दिल्ली सफदरजंग अस्पताल भेजे जाने वाले मरीज वहां पहुंचते भी हैं या नहीं इसकी जांच की जाए। सीएमओ डॉ. गुलशन अरोड़ा से इस संबंध में जानकारी लेने के लिए संपर्क का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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