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सुशांत आत्महत्या मामला : दो प्रोफेसरों का इस्तीफा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sun, 21 Aug 2016 09:17 AM IST
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एमिटी यूनिवर्सिटी की ओर से छात्र सुशांत रोहिल्ला की आत्महत्या के मामले में बनी कमेटी ने कॉलेज या कॉलेज प्रबंधन की गलती नहीं मानी है। कॉलेज की ओर से कई बार सुशांत को अपने परिजनों को बुलाने के लिए कहा गया था और परिजनों को ई-मेल के माध्यम से सूचना देकर प्रबंधन से मिलने के लिए भी कहा गया था।
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मगर परिजनों ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद भी जब सुशांत के परिजनों की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। छात्र को यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया।
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सुशांत की आत्महत्या की जांच के लिए एमिटी की सात सदस्सीय कमेटी ने अपने स्टॉफ और कॉलेज को दोषी नहीं माना है। जांच कमेटी के अध्यक्ष रिटायर्ड आईपीएस आरपी सिंह समेत सात लोगों की टीम ने हर पहलु की जांच की।
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छात्र की मात्र 29 फीसदी ही उपस्थिति थी। इसमें मूट कोर्ट और खेलकूद आदि को जोड़कर 43 फीसदी तक ही उपस्थिति हो सकती थी। फोन पर सुशांत के पिता से बात करके पूरी स्थिति की जानकारी दी गई थी। इसके बाद भी वह कॉलेज प्रबंधन से इस बारे में आकर नहीं मिले।
यूनिवर्सिटी की ओर से जारी कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार एमिटी लॉ स्कूल दिल्ली को जीजीएस आईपी यूनिवर्सिटी से 1999 में मान्यता मिली थी। इस कॉलेज में सभी नियम आईपी यूनिवर्सिटी के लागू होते हैं।
इसमें छात्र की कम से कम 70 फीसदी उपस्थिति होनी चाहिए। ऐसा न होने पर छात्र को परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाता। कमेटी ने बताया कि 11 मई को सूचना दी गई थी लेकिन जब कोई जवाब नहीं आया तो 13 मई से परीक्षाएं शुरू हो गईं।
छात्र के पहले सेमेस्टर में 42, दूसरे में 46, तीसरे में 51, चौथे में 62 और पांचवें सेमेस्टर में 30 फीसदी अंक ही आए थे। छात्र को छठे सेमेस्टर में दाखिला लेने के लिए 30 अक्तूबर तक सुझाव भी दिया गया था।
परीक्षा में न बैठने का फैसला कॉलेज का न होकर आईपी यूनिवर्सिटी का था। उपस्थिति कम होने की जानकारी कॉलेज स्टॉफ की ओर से 4 फरवरी को भी ईमेल के माध्यम से कॉलेज की प्रोफेसर केआर मीना ने भी दी थी।
कमेटी में आरपी सिंह के अलावा डॉबीबी सिंह, डॉ.तुषार के नाथ, आशीष सिंह, डॉ.अलका मुजाल, डॉ.अजय अस्थाना, एसबी सिंह एडवोकेट आदि मौजूद रहे।
प्रकरण से जुड़े दो प्रोफेसरों का इस्तीफा
सुशांत प्रकरण से जुड़े निदेशक डॉ. वीपीएस सहगल और प्रोफेसर डॉ. इशिता पर आरोप लग रहे थे कि इनका व्यवहार छात्रों के प्रति ठीक नहीं है। सुशांत का मामले के बाद दोनों ने एमिटी प्रबंधन को इस्तीफा सौंप दिया।