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विदेशी मदद से नकली सिक्कों की फैक्ट्री चलाने का शक, जांच में जुटीं एजेंसियां

Tue, 04 Oct 2016 12:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 04 Oct 2016 12:27 AM IST
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Suspected counterfeit coins with foreign help run the factory, met in investigation agencies
नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री पकड़ी - फोटो : अमर उजाला

बवाना औद्योगिक क्षेत्र में नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद देश की कई एजेंसियां मामले की जांच में जुट गई हैं। आशंका है कि जिस तरह से भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने के लिए देश के बाहर से नकली नोट भारत पहुंचाए जाते हैं।

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इसी तरह नकली सिक्के बनाने के पीछे भी किसी दूसरे देश का हाथ हो सकता है। दिल्ली पुलिस के साथ एनआईए ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए छानबीन शुरू कर दी है।
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माना जा रहा है कि मामले से जुड़ी कुछ बड़ी मछलियों पर पुलिस व जांच एजेंसियां शिकंजा कसेंगी। पुलिस अधिकारियों की मानें, तो नकली नोटों का धंधा करने वाले अपराधियों पर पिछले कुछ दिनों में हुई कार्रवाई के बाद विदेशों से होने वाले इस धंधे में नुकसान हो रहा था। 

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मालिक फोन के जरिये करते थे कारोबार

Suspected counterfeit coins with foreign help run the factory, met in investigation agencies
नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री पकड़ी - फोटो : अमर उजाला

पुलिस किसी न किसी तरह नकली नोटों का कारोबार करने वालों को पकड़ लेती थी। ऐसे में भारत में ही नकली सिक्कों का निर्माण कर देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास किया जाने लगा। 

इसके पीछे असल में कौन लोग हैं, कब से नकली सिक्कों का धंधा चल रहा है, इन सिक्कों को कहां-कहां भेजा जाता था, फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इसकी पड़ताल में लगी हैं।

मालिक फोन के जरिये करते थे कारोबार
पुलिस की गिरफ्त में आए नरेश ने खुलासा किया है कि सोनू और राजू नाम के दोनों मालिक फोन के जरिये ही इस धंधे को चलाते थे। दोनों आरोपी झज्जर, हरियाणा के बताए जा रहे हैं। 

एक लाख मूल्य के सिक्के पर मिलते थे पांच हजार

Suspected counterfeit coins with foreign help run the factory, met in investigation agencies
सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री पकड़ी - फोटो : अमर उजाला

दोनों कभी फैक्ट्री में नहीं आते थे। उनका मैनेजर राजेश ही सारी जिम्मेदारी संभालता था। नरेश के मुताबिक, काफी पहले उसकी मालिकों से मुलाकात हुई थी। फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि उन्हें यह भी नहीं पता कि फैक्ट्री का मालिक कौन है। 

एक लाख मूल्य के सिक्के पर मिलते थे पांच हजार
जांच में पता चला है कि सिक्कों की सप्लाई करने वाले नरेश को एक लाख रुपये मूल्य के सिक्के बाजार में चलाने पर पांच हजार रुपये मिलते थे। उसने बताया कि वह रोज तीस से चालीस हजार रुपये मूल्य के सिक्के फैक्ट्री से लेकर निकलता था। 

उसके मुताबिक, फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों को बंधक बनाकर रखा जाता था। उन्हें फैक्ट्री से बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी। पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में दबिश दे रही है।

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