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मुन्ना बजरंगी पहुंचा चार साल के लिए अंदर

Fri, 06 May 2016 01:17 AM IST
धीरज बेनीवाल/अमर उजाला, नई दिल्ली।
धीरज बेनीवाल/अमर उजाला, नई दिल्ली। Updated Fri, 06 May 2016 01:17 AM IST
सार

  • शार्प शूटर मुन्ना बजरंगी को 4 साल कैद
  •  1998 में मुकरबा चौक के नजदीक मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया था  
  •  छाती में अभी तक धंसी है गोली, साथी को पुलिस ने कर दिया था ढेर

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munna bajrangi four yrs imprisonment
पिस्टल - फोटो : amar ujala

विस्तार

मुकरबा चौक मुठभेड़ मामले में शार्प शूटर मुन्ना बजरंगी को चार साल कैद की सजा सुनाई गई है।  मुठभेड़ में दिल्ली व यूपी पुलिस की संयुक्त टीम ने मुन्ना बजरंगी को जिंदा पकड़ा था। जबकि, उसका साथी गैंगस्टर गोलीबारी में मारा गया था।  मुठभेड़ सितंबर 1998 में मुकरबा चौक के नजदीक हुई थी। मुठभेड़ में मुन्ना बजरंगी की छाती में गोली लगी थी, जो आज तक वहीं फंसी हुई है।

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थाना समयपुर बादली पुलिस ने इस बाबत एफआईआर दर्ज की थी। उधर, पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ करने के आरोप बजरंगी के परिजनों ने लगाए थे।  रोहिणी जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनोज जैन ने प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी को सरकारी काम में बाधा, पुलिस पर गोली चलाने, घातक रूप से चोट पहुंचाने व हत्या की कोशिश की धाराओं में दोषी ठहराया है।
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उसे चार साल कैद व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।  अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में कामयाब रहा है। यूपी पुलिस सरगर्मी से मुन्ना बजरंगी की तलाश कर रही थी। पुलिस ने उसे घेर लिया था। उसे पता था कि पुलिस उसका पीछा कर रही है। इसके बाद भी उसने व उसके साथी ने रुकने की बजाय पुलिस पर हत्या की मंशा से गोली चलाई। इस फायरिंग में दिल्ली पुलिस का सिपाही देवेंद्र जख्मी हुआ था। 
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यूपी-दिल्ली पुलिस ने चलाया था ज्वाइंट ऑपरेशन 
यूपी पुलिस एसटीएफ के अतिरिक्त अधीक्षक सत्यबीर सिंह शार्प शूटर मुन्ना बजरंगी की तलाश में दिल्ली में थे।  सूचना मिली कि बजरंगी करनाल में छिपा है और काली एस्टीम में एक या दो लोगों के साथ दिल्ली आता है। 11 सितंबर 1998 को दिल्ली व यूपी पुलिस की संयुक्त टीम करनाल के लिए रवाना हुई। टीम में शामिल दिल्ली पुलिस के एसीपी राजबीर सिंह ने पानीपत ट्रैफिक सिग्नल पर काली एस्टीम को पहचान लिया। फिर दिल्ली तक पीछा करने के बाद गाड़ी को समयपुर बादली इलाके में गांव नगली पूना के नजदीक रोका।


तभी मुन्ना बजरंगी व यतिंदर ने पुलिस पर गोलियां चला दीं। मुठभेड़ में मुन्ना बजरंगी गोली लगने से घायल हो गया और यतिंदर की मौत हो गई।  पुलिस ने मन्ना बजरंगी को जख्मी हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया। इलाज बाद उसे 15 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। कुछ दिन बाद अदालत से जमानत मिलने पर वह फिर से फरार हो गया। इसके बाद उसे भगौड़ा घोषित कर दिया गया। 2010 में वह दोबारा पुलिस के हत्थे चढ़ा। 

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