गैंगरेप पीड़ित के परिवार ने दिया खुदकुशी का अल्टीमेटम
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बुलंदशहर गैंगरेप का पीड़ित परिवार शर्मिंदगी और लोक लाज के कारण खोड़ा स्थित घर छोड़ दिया। पीड़िता किशोरी के पिता जो ओला कैब चालक हैं, उन्होंने बताया कि घटना के बाद जब वह यहां पहुंचे तो उनकी हिम्मत नहीं हुई कि वह घर जाएं।
घर जाकर वह अपने पड़ोसियों से आंख कैसे मिलाएंगे। इतना ही नहीं इस घटना के बाद जब वह अपने एक दोस्त के घर गए तो उनके दोस्त ने उन्हें व उनके परिवार को अपने घर पर पनाह देने से साफ इनकार कर दिया।
हालांकि मौजूदा समय में वह अपने एक जानने वाले के यहां ही रुके हैं। घटना से सहमी उनकी बेटी ने दो दिन से खाना नहीं खाया, उसकी हालत काफी गंभीर है।
‘मुझे मारने की धमकी देते रहे और इज्जत लूटते रहे’
वह खुद भी इतनी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं कि वह अपनी पत्नी और बेटी से आंख मिला सकें। उनके सामने उनकी बेटी व पत्नी की इज्जत को लूटा जा रहा था और वह कुछ भी नहीं कर सके।
‘मुझे मारने की धमकी देते रहे और इज्जत लूटते रहे’
पीड़ित ओला कैब चालक ने बताया कि दो बदमाशों ने जिसमें एक का नाम असलम था, उन्होंने बड़े भाई, भतीजे व उन्हें गनप्वाइंट पर ले रखा था। वहीं गनप्वाइंट पर बदमाशों ने उनकी पत्नी व बेटी को ले रखा था।
'बेटी की चीख सहन नहीं हुई तो बदमाशों से बोला मुझे मार डाले'
बेटी ने जैसे ही बदमाशों का विरोध किया तो उन्होंने उसके पिता की हत्या करने की धमकी दी। पीड़ित ने बताया कि उन्हें मारने की धमकी दे कर उनकी पत्नी व बेटी की वह दरिंदे इज्जत लूटते रहे।
बेटी चीख रही थी। बेटी की चीख सहन नहीं हुई और मैने बदमाशों से बोल दिया कि वह मुझे मार डाले। मगर बदमाश लोहे की रॉड से पिटाई कर रहे थे। बदमाशों से पानी मांगा तो उन्होंने लोहे की रॉड से उनकी जमकर पिटाई की।
ट्रैक्टर लाने को बोला और भाग गए बदमाश
पीड़त का कहना है कि बदमाशों ने उन्हें, उनके बड़े भाई और भतीजे को एक तरफ गनप्वाइंट पर ले रखा था। वहीं दूसरी ओर खेत के भीतर बदमाश उनकी कार ले गए और पत्नी व बेटी के साथ रेप किया।
मोबाइल कार में ही छोड़कर बदमाश हुए फरार
यह बोल कर सात बदमाशों में से 6 चले गए। वहीं एक बदमाश असलम भी थोड़ी देर बाद निकल गया। बदमाशों के जाने के करीब 10 मिनट बाद जब उन्हें अहसास हुआ कि बदमाश फरार हो चुके हैं तब अपनी बेटी-पत्नी व भाभी को गाड़ी में बैठाया।
बदमाशों ने उनकी सारी नगदी, सोने के आभूषण लूट लिए थे। हालांकि बदमाश उन सब के मोबाइल छीने थे मगर जाने से पहले वह कार में ही छोड़ कर फरार हो गए।
'घंटी बजती रही, पुलिस कंट्रोल रूम में नहीं उठा फोन'
पीड़ित का कहना है कि पहली कॉल उन्होंने शनिवार सुबह के 4:01 बजे की, तब करीब 5 मिनट तक कंट्रोल रूम में कॉल नही लगी। फोन इंगेज जा रहा था। उसके बाद से 15 से 20 कॉल की तो फोन नहीं उठा।
थक हार कर उन्हें फौरन नोएडा स्थित अपने एक दोस्त को घटना के बारे में बताना पड़ा। जिसके बाद दोस्त ने यहां सूचना दी। जिसके 15 मिनट बाद बुलंदशहर मौके पर पहुंची।
पीड़ित का कहना है कि एक भी पीसीआर वैन हाईवे पर पेट्रोलिंग करते वक्त नहीं दिखी। हाईवे पर अंतिम बार सिकंदराबाद में एक पीसीआर वैन दिखी थी उसके बाद पुलिस दूर-दूर तक नहीं दिखी।
पीड़ित का कहना है कि मौके पर जब पुलिस पहुंची तो उसके बाद पुलिस ने मदद की। एसएसपी का बचाव करते वक्त पीड़ित परिवार ने कहा कि एसएसपी व उनकी टीम का रवैया उनके प्रति ठीक था।
.....नहीं तो परिवार समेत करूंगा खुदकुशी
तीन माह का समय पुलिस के पास है, नहीं तो परिवार समेत करूंगा खुदकुशी
पीड़ित का कहना है कि तीन माह का वक्त उनसे डीजीपी जावीद अहमद ने मांगा है। तीन माह के भीतर सभी आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। अगर पुलिस तीन माह के भीतर आरोपियों को नहीं पकड़ पाई तो वह परिवार समेत खुदकुशी कर लेंगे।
उन्होंने कहा कि ऐसा कानून बनना चाहिए जिससे लोगों में डर पैदा हो और आगे किसी की मां-बहन-बेटी को कोई दरिंदा छूने से पहले सहम जाए। उन्होंने सरकार से इंसाफ की गुहार लगाई है।
मुख्यमंत्री के आने की सूचना मिली, मगर आए नहीं
पीड़ित का कहना है कि उन्हें मीडिया के माध्यम से सूचना मिली कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उनका व परिवार का हाल जानने आ रहे हैं। मगर वह अब तक आएं नहीं। हालांकि पीड़ित का कहना है कि उन्हें तो बस इंसाफ चाहिए।