नौकरी दिलाने के बहाने करते थे शारिरिक शोषण, फिर तस्करी में भेजते थे विदेश
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विदेशों में नौकरी दिलवाने के नाम पर मोटी रकम ऐंठकर नेपाली युवतियों को मानव तस्करी कर दिल्ली लाने वाले गिरोह के चार सदस्यों को अपराध शाखा ने दबोचा है। आरोपियों की पहचान नेपाल निवासी जॉन खड़का (46), पूर्णिमा (27), नीरा (39) और पिथौड़ागढ़ (उत्तराखंड) निवासी हरीश उर्फ फौजी (30) के रूप में हुई है।
पुलिस की मानें तो आरोपी गैंग न्यूजीलैंड जैसे देशों में नौकरी दिलवाने की बात कर 8 से 9 लाख रुपये लेकर नेपाल से लड़कियों को दिल्ली लाता था। बाद में इनका दिल्ली में शारीरिक शोषण कर विदेशों में भेज दिया जाता था।
पुलिस ने तीन नेपाली युवतियों को सकुशल मुक्त कराया है। वहीं आरोपियों के पास से 10 नेपाली पासपोर्ट और एक लैपटॉप बरामद किया है। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि शनिवार को नेपाली लोगों के लिए काम करने वाली एक एनजीओ के सदस्य राम खड़का अपराध शाखा के दफ्तर पहुंचे थे।
नेपाली युवतियों को तस्करी के लिए लाता था गिरोह
उन्होंने पुलिस को बताया कि मानव तस्करी कर लाई गई तीन लड़कियां किसी तरह मुक्त होकर उनके पास पहुंची हैं। तीनों को सागरपुर इलाके में बंधक बनाकर रखा गया था।
विदेश भेजने के नाम पर तीनों के साथ शारीरिक छेड़छाड़ भी की गई है। सूचना के बाद मामला दर्ज कर पुलिस ने सागरपुर स्थित जगह पर छापा मारा, जहां से जॉन खड़का, नीरा और हरीश को दबोच लिया गया। पूछताछ के दौरान सभी ने वारदात में अपना हाथ होने की बात कबूल कर ली।
आरोपियों ने बताया कि नेपाल में तीर्थराज नामक शख्स नेपाली युवतियों को विदेशों में नौकरी का झांसा देकर आठ से नौ लाख रुपये लेकर दिल्ली में जॉन खड़का के पास भेज देता है। फिर जॉन दिल्ली आई युवतियों को अपने पास बंधक बनाकर रख लेता और इनके पासपोर्ट लेकर वीजा के लिए पूर्णिमा नामक युवती के पास भेज देता।
इस मामले में तीर्थराज जॉन के पास चार से पांच लाख रुपये भेजता है। इधर, जॉन अपना कमीशन रखकर पूर्णिमा के पास पासपोर्ट भेजता है। आरोपी जॉन नेपाली लड़कियों का शारीरिक शोषण करने के बाद नौकरी के नाम पर उन्हें विदेश भेज देता है।
दिल्ली आने के बाद विरोध करने वाली लड़कियों से नीरा और हरीश निपटते हैं। पुलिस गैंग के सभी लोगों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।