फर्जी सांसद बनकर करता था करोड़ों की ठगी, खुद को बताता था लालू यादव का करीबी
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने लोकसभा का सांसद बताकर करोड़ों की ठगी करने वाले शातिर बदमाश को दबोचा है। आरोपी की पहचान सीतामढ़ी (बिहार) निवासी प्रवीन कुमार सिंह (43) के रूप में हुई है। आरोपी ने देशभर के लोगों से रेलवे, एफसीआई और स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया में नौकरी दिलवाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी की।
पिछले पांच सालों से वह पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था। अपराध शाखा को 28 मई को सूचना मिली कि आरोपी हवाई जहाज से कोलकाता से दिल्ली आने वाला है। सूचना के बाद एयरपोर्ट से पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया।
उसके पास से सात मोबाइल, पांच डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 24 घड़ी, भारी मात्रा में बायोडाटा और सांसद का लेटर हेड बरामद हुआ है। अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव बलिया (उप्र) निवासी हर्ष देव तिवारी ने वर्ष 2014 में अपराध शाखा से ठगी की शिकायत दर्ज करवाई थी।
उन्होंने बताया कि बिहार के मुगलसराय रेलवे स्टेशन पर तैनात क्लर्क ने उनकी मुलाकात प्रवीन कुमार सिंह से करवाई थी। उसने खुद को पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव का करीब बताकर नौकरी दिलवाने की बात की।
फिर उसने बलिया के हर्ष समेत 10 लोगों को रेलवे के ग्रुप डी में नौकरी दिलवाने के नाम पर दिल्ली के बड़ौदा हाउस में ढाई-ढाई लाख रुपये ले लिए। इसके बाद उन्हें मेडिकल कराने का एक लेटर दे दिया गया।
बलिया के 10 लोगों से नौकरी के नाम पर ठगे 25 लाख
जब सभी लोग कोलकाता मेडिकल के लिए पहुंचे तो उन्हे अपने साथ ठगी का पता चला। अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। इसी तरह दिल्ली के मौजपुर निवासी रियाजुद्दीन व उसकी पत्नी से रेलवे में नौकरी के नाम पर आठ लाख रुपये की ठगी की गई।
इसके अलावा आरोपी ने दिल्ली, पंजाब, कोलकाता, मुंबई और उप्र में दर्जनों लोगों को नौकरी के नाम पर ठग लिया। कुछ मामलों में कंपनियों को सरकारी कांट्रैक्ट दिलवाने और कुछ लोकल नेताओं को राजनैतिक पार्टियों में ऊंचा पद दिलवाने का झांसा देकर ठगा गया। आरोपी बार-बार दिल्ली में अपने पते बदलकर पुलिस को झांसा देता रहा। करीब पांच साल तक उसने पुलिस की आंखों में धूल झोंकी।
50 हजार का इनाम था घोषित
पुलिस के मुताबिक, प्रवीन मूलरूप से सीतामढ़ी बिहार का रहने वाला है। शुरू में छोटा-मोटा काम करने के बाद 1999 में दिल्ली आ गया। यहां कई होटल में नेपकिन सप्लाई किए। वर्ष 2000 में उसने दिल्ली में दूसरी शादी करके उत्तम नगर में रहना शुरू कर दिया।
2008 के बाद उसने आरकेपुरम में अपना कंसलटेंसी का दफ्तर खोलकर झारखंड के कुछ युवाओं को स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया में नौकरी दिलवाने का झांसा देकर 30 लाख ठग लिए। दिल्ली पुलिस ने इसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार का इनाम घोषित किया था। वह हमेशा सफेद रंग के खादी कपड़े पहनता था। पुलिस से बचने के लिए उसने 10 से अधिक अपने पते बदले।