जानिए, AAP के फ्रॉड मेम्बर के 5 दिलचस्प किस्से
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खुद को कभी नेता कभी जज तो कभी आला अधिकारी बताकर बड़े-बड़े काम कराने वाला यह जालसाज बहुत दिलचस्प है। आप के मेम्बर इस खास ठग ने आर्मी ऑफिसर्स के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के दौरान अफसरों से रौब झाड़ने की ट्रेनिंग ली है।
लोकपाल आंदोलन जा चुका है जेल
क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को पुलिस आफिस में तैनात सिपाही विवेक राणा के साथ सतीश नाम के ऐसे ठग को गिरफ्तार किया है, जो आम आदमी पार्टी का सदस्य है और जनलोकपाल आंदोलन में जेल भी जा चुका है।
खुद को जज, पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी और राजनीतिक पार्टी का पदाधिकारी बताकर अफसरों को फोन कॉल कर काम कराता था। चार सालों में 100 से ज्यादा पुलिसवालों के ट्रांसफर-पोस्टिंग करा चुका है।
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विवेक के अलावा उसके कहने से पोस्टिंग किए गए एक दरोगा और चार सिपाहियों को एसएसपी ने सस्पेंड कर दिया है। 13 और पुलिसवालों के नाम सामने आए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
अफसरों से ली है रौब झाड़ने की ट्रेनिंग
बीएड और एमएससी पास सतीश को सरकारी नौकरी नहीं मिली तो उसने बच्चों को पीसीएम का ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। उसने गाजियाबाद में तैनात रहे एक आईएएस और अन्य अधिकारियों के बच्चों को भी ट्यूशन पढ़ाया।
इस दौरान उसने वहां की गतिविधियों से सीखा कैसे अधिकारी बातें करते हैं। कैसे काम होते हैं, कैसे रौब जमाया जाता है। सिपाही विवेक की मदद से जाना कैसे पुलिसवालों की पकड़ से बचा जा सकता है।
इसके बाद उसने वर्ष 2010 से उसने इंटरनेट और पुलिसवालों से अधिकारियों, जजों और राजनीतिक पार्टी के पदाधिकारियों के नंबर लिए और फोन कॉल कर धमकाना और काम कराना शुरू कर दिया।
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इस तरह उसने मेरठ, अलीगढ़, हापुड़, सहारनपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, मथुरा, नोएडा सहित प्रदेश भर के विभिन्न विभागों के अधिकारियों केपास फर्जी अधिकारी, जज और राजनीतिक पार्टी का पदाधिकारी बताकर धमकाया।
ट्रांसफर-पोस्टिंग, मुकदमे और अन्य काम कराए। जिस भी अधिकारी से काम होता था, उससे बड़ा अधिकारी बनकर उसे कॉल कर देता था।
क्या-क्या कराया AAP के इस खास चोर ने?
इसने सिपाही का बागपत से हापुड़ ट्रांसफर, सिपाही का बुलंदशहर से नोएडा ट्रांसफर, जमानत के लिए जज को फोन, विजयनगर से सरकारी आवास दिलाना और ऐसे ही कई काम जो करने के लिए एक बार प्रशासनिक अधिकारी को भी सोचना पड़ेगा।
यहीं नहीं सिपाही का साउथ ईस्ट दिल्ली से नॉर्थ ईस्ट ट्रांसफर, अधिकारी अधीनस्थों पर रौब झाड़ना, इंटरनेट और पुलिसवालों की से मदद से लेकर अधिकारियों के नंबर जानना भी इसके खास तरीके थे।
इन्हीं कामों के चलते पिछले कुछ दिनों में सतीश ने 781 फोन कॉल की हैं।
कब बना आप का सदस्य?
सतीश के पास से मिली रसीद के मुताबिक, वह इसी साल दो दो जनवरी को आम आदमी पार्टी का सदस्य बना है। उसकी सदस्यता 1 जनवरी 2017 तक है।
वह अधिकारियों से बड़े काम निकलवाने के बाद सिम तोड़ देता था। सतीश अभी तक इसलिए पकड़ में नहीं आया था कि सिफारिश और धमकी भरी कॉल करने के बाद वह मोबाइल और सिम तोड़ देता था। फिर दूसरे अफसर को दूसरे मोबाइल सिम से कॉल करता था।
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वह मोबाइल की बजाय पीएनटी नंबर पर कॉल करता था। आप की सदस्यता पर्ची, एक राजनीतिक पार्टी का पैड, 9 जमीन के बैनामे और इकरारनामे से संबंधित कागजात, पैन कार्ड, कई बैंकों की पासबुक।
तो फिर कैसे आया पकड़ में?
क्राइम ब्रांच प्रभारी राजेश द्विवेदी ने बताया कि सतीश ने एसएसपी और एसओ विजयनगर को जिन मोबाइल नंबरों से कॉल की थी, उनकी लोकेशन महेंद्रा एंक्लेव आई। इसका अलावा पुराने संदिग्ध नंबरों की कॉल की गई, उनकी लोकेशन भी वहीं आई।
पुलिस ने बताया कि सतीश ने वर्ष 2010 में एक नामी अखबार का पत्रकार बताकर तत्कालीन एडीजी ब्रजलाल को फोन और फैक्स किया था, जिसमें उसने रितेश नामक सिपाही का बागपत से सोनभद्र किया ट्रांसफर रद्द कराने के लिए लिखा था।