पिंकी खुदखुशी मामला : 'आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उसे आत्महत्या करने के लिए उकसाया था'
2014 के बहुचर्चित पिंकी चौहान आत्महत्या मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद जल्द ही दोषियों की तस्वीर साफ हो सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने आईजी हिसार से दोबारा जांच के आदेश देते हुए तीन माह में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
पिंकी चौहान आत्मदाह मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद शनिवार को पिंकी के पैतृक गांव कासन में पंचायत का आयोजन किया गया जिसमें गुरुग्राम समेत आसपास के कई जिलों के लोग एकत्रित हुए।
पिंकी इंसाफ मंच के बैनर तले हुए पंचायत में बोलते हुए राजपूत महासभा के अरीदमन सिंह बिल्लू ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पिंकी को इंसाफ मिलने की फिर से उम्मीद बन गई है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि तत्कालीन सरकार ने इस मामले को पूरी तरह दबाने की कोशिश की नतीजा यह रहा कि वो दोबारा अपनी सरकार ही नहीं बना सके। इंसाफ की इस लड़ाई में सभी को साथ देने की जरुरत है ताकि कोर्ट दोषियों को कड़ी सजा दे सके। दलीप सिंह राघव ने कहा कि उन्हें माननीय कोर्ट पर पूरा विश्वास है आईजी हिसार को सौंपी जांच में पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।
आत्महत्या नहीं की थी...
पिंकी के भाई अरुण चौहान का आरोप है कि पिंकी ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उसे आत्महत्या करने के लिए उकसाया गया था। इसमें कॉलेज के महिला शिक्षिकाएं शामिल थे। भावुक होते हुए उसके भाई ने कहा कि उन्हें उसी दिन सुकुन मिलेगा जिस दिन पिंकी के हत्यारे सबके सामने आएंगे और उन्हें कड़ी सजा मिलेगी।
पंचायत में भोड़ाकलां, वजीरपुर, बास कुसला, हयातपुर, कासन, अलीयर ढाणा, खोह, मानेसर, नाहरपुर, कांकरौला, भांगरौला, खेड़कीदौला, गुरुग्राम, घामड़ौज, खांडसा, खटौला, सोहना, खेड़ला के अलावा हथीन, भिवानी और करनाल से भी लोग पहुंचे।
मालूम हो सितंबर 2014 में राजकीय महिला महाविद्यालय के सेमेस्टर परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ था। इसमें बीएससी दूसरे वर्ष की 356 छात्राओं में से 324 छात्राओं को फेल दर्शाया गया था। इस पर छात्राओं ने इसकी शिकायत स्कूल प्रिंसिपल से की थी, लेकिन प्रिंसिपल ने उनकी शिकायतों पर कार्रवाई करने की बजाय छात्राओं को फटकार लगा दी थी।
उनकी शिकायत पर कार्रवाई न होने से खफा छात्राओं ने 29 सितंबर 2014 को जाम लगा दिया था। आरोप था कि इस दौरान स्कूल में कुछ प्राध्यापकों द्वारा कुछ छात्राओं को क्लास रूम में ही बंद कर दिया था।
कुछ अपशब्दों का प्रयोग भी किया गया था जिससे खफा होकर छात्रा ने अपने उपर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली थी। इस घटना में वह बुरी तरह से झुलस गई थी। सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
परिजनों ने की मार्मिक अपील पंचायत में पिंकी के परिजनों ने मीडिया के
परिजनों का आरोप था कि मामले की जांच में गुरुग्राम पुलिस खानापूर्ति कर दोषियों को बचाना चाह रही है। इसको देखते हुए परिजनों ने मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने आईजी हिसार ने दोबारा मामले की जांच करने का आदेश देते हुए तीन महीने में जांच पूरी करने का कहा है।
माध्यम से मार्मिक अपील की। पिंकी के भाई अरुण चौहान ने कहा कि यह मेरी नहीं बल्कि सभी की बहन है। पिंकी को इंसाफ दिलाने के लिए सभी के सहयोग की जरुरत है।
इस मामले से जुड़ी कोई भी जानकारी या दस्तावेज है तो वो आईजी हिसार को इत्तला करे। अगर उन्हें किसी भी तरह का डर है तो वो हमें भी जानकारी दे सकते है उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।
जस्टिस फॉर पिंकी पेज फिर हुआ सक्रिय
पिंकी आत्मदाह मामले के दौरान फेसबुक पर बने जस्टिस फॉर पिंकी पेज हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर से सक्रिय हो गया है। पिंकी और उसके परिजनों से जुड़े लोग इस पेज पर लगातार दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने की मांग कर रहे है। इसके अलावा पेज पर लगातार पिंकी और उससे जुड़े पुराने वीडियो भी लोग शेयर कर रहे है।