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अगर मेड रख रहे हैं तो हो जाइए सावधान, अब जाना होगा पुलिस के पास

Mon, 26 Sep 2016 12:06 AM IST
मनोज कुमार/अमर उजाला, नोएडा
मनोज कुमार/अमर उजाला, नोएडा Updated Mon, 26 Sep 2016 12:06 AM IST
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If you are keeping careful Come, now will go to the police
मेड - फोटो : Demo Pic

केस वन-सेक्टर-61 निवासी अजय कुमार ने 14 अगस्त को सरिता विहार स्थित प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से एक मेड हायर की थी। मेड को प्रति माह करीब 5000 रुपये तनख्वाह देना तय हुआ। 

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इसके एवज में प्लसेमेंट एजेंसी ने कमीशन के रूप में 29,500 रुपये लिए थे। अगले दिन जब वह ऑफिस के काम से बाहर चले गए तो घर पर उनकी पत्नी और मेड ही थीं। दोपहर में अजय की पत्नी भी बाजार चली गई। 
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लौटने पर देखा कि घर में मेड नहीं थी और कुछ कीमती सामान गायब हो चुका था। 16 अगस्त को जब वह सरिता विहार स्थित प्लेसमेंट एजेंसी पर गए तो वहां से ऑफिस ही गायब मिला।  करीब एक माह तक मेड को तलाश करने पर जब कामयाबी नहीं मिली तो 15 सितंबर को अजय ने सेक्टर-58 कोतवाली  में रिपोर्ट दर्ज कराई। 
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केस-दो  सेक्टर-56 निवासी अमित काजी की मेड काम छोड़कर चली गई थी। करीब 10 दिन बाद किसी तरह एक कंपनी से संपर्क कर एक मेड हायर की। उसे एजेंसी को कमीशन के रुपये भी दिए थे। अगले दिन मेड पहुंची तो उसके साथ एक और मेड थी। पूछने पर बताया कि ज्यादा काम होगा, इसलिए सहयोग के लिए लाई है। दोनों मेड ने सुबह से शाम खूब अच्छा काम किया। 

If you are keeping careful Come, now will go to the police
यूपी पुलिस - फोटो : प्रतीकात्मक चित्र

इस दौरान उनकी पत्नी किसी काम से पड़ोस में चली गई। करीब एक घंटे बाद जब लौटी तो दोनों मेड गायब मिलीं। घर से रखे करीब साढे़ चार लाख रुपये के जेवर और 35 हजार रुपये चोरी जा चुके थे। 

जब अमित सेक्टर-20 स्थित प्लेसमेंट एजेंसी के ऑफिस गए तो पता फर्जी निकला और मेड के पते पर भी कोई भी नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने सेक्टर-58 कोतवाली में दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। केस-तीन इसी तरह सेक्टर-47 स्थित एक सोसायटी निवासी विवेक कुमार ने घर में दिल्ली की एक एजेंसी से मेड बुलाई थी।

उसे हर माह 3500 रुपये देने की बात तय हुई, जबकि एजेंसी को उन्होंने कमीशन के रूप में 35 हजार रुपये जमा कराए। 18 दिन काम करने के बाद मेड घर से कुछ सामान लेकर भाग गई, जिस वेबसाइट से विवेक ने प्लेसमेंट एजेंसी का नंबर लिया था, वह साइट और नंबर भी बंद मिले। 

इन घटनाओं से साफ है कि आपने अगर मेड रखने के बाद पुलिस से उसका सत्यापन नहीं कराया तो भविष्य में आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।  अगर आप सोचते हैं कि मेड मुहैया कराने वाली प्लेसमेंट एजेंसी आपकी मदद कर देगी तो यह मुगालता ही है, क्योंकि शिकायत लेकर पहुंचने पर कई एजेंसी भी गायब मिलती हैं।

जानिए कैसे चलता है गोरखधंधा 

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पु‌लिस - फोटो : file photo

कैसे चलता है गोरखधंधा 
प्लेसमेंट एजेंसी झारखंड, पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों से आर्थिक तंगी झेल रहे परिवारों की लड़कियों और महिलाओं को दिल्ली-एनसीआर में काम दिलाने के नाम पर लाते हैं। उन्हें कई दिन तक अपने ऑफिस आदि पर रखते हैं और रुपये भी नहीं देते। 

वह स्वयं भी उनका सत्यापन नहीं कराते हैं और जब उन्हें काम पर भेजा जाता है तो अक्सर मेड लेने वाले नागरिक भी सत्यापन के झंझट में नहीं फंसते हैं और इसी का फायदा उठाकर मेड सामान लेकर चंपत हो जाती हैं। 

कुछ लोगों का मानना है कि बहुत कम आमदनी और सत्यापन न होने के कारण ही इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस तरह की कुछ एजेंसियों का एजेंडा ही यह रहता है कि न तो वह अपना सत्यापन और रजिस्ट्रेशन कराते हैं और न ही मेड का, इससे रुपये ऐंठने में कामयाब हो जाते हैं। 

एनसीआर में कुछ एजेंसी तो मेड से ही चोरी और अन्य आपराधिक घटनाएं कराती हैं। बता दें कि जिले में 100 से अधिक  प्लेसमेंट एजेंसी काम कर रही हैं, जबकि  एनसीआर में यह संख्या हजारों को पार कर रही है। 

जिन एजेंसी के माध्यम से मेड को नौकरी पर रखवाया जाता है, वह मेड लेने वाले व्यक्ति से एक कांट्रैक्ट के तहत कम से कम 30 हजार रुपये या मेड की एक महीने की सैलरी का 10 गुना तक कमीशन लेते हैं। 

घर में मेड ही नहीं, बल्कि किसी भी काम के लिए कोई नया व्यक्ति रखने से पहले थाने से उसका सत्यापन जरूर कराएं। इससे मेड या ड्राइवर आदि कोई भी काम करने से पहले जरूर सोचेगा कि कोई वारदात करने के बाद उसका पकड़ा जाना तय है। शहर में जो भी वारदात मेड द्वारा अंजाम दी गई हैं, उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस तलाश ने उनकी शुरू कर दी है। इस तरह की वारदात को रोकने के लिए लोगों को खुद भी सतर्कऔर जागरूक रहना होगा। -धर्मेंद्र सिंह, एसएसपी 

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