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पासपोर्ट की अवधि खत्म होने के बाद भी रह रहा था
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 09 Nov 2015 01:41 AM IST
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सिहानी गेट कोतवाली पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी मोती को गिरफ्तार किया है। इसके पास से बांग्लादेश का पासपोर्ट, भारत का डीएल, बैंक पासबुक और वोटर आईडी कार्ड आदि बरामद हुए।
उसके पासपोर्ट की वैलिडिटी अप्रैल 2013 में खत्म हो गई थी, फिर भी वह यहां रह रहा था। उसके दो पत्नियां हैं, एक बांग्लादेश में रहती है और दूसरी दिल्ली सीमापुरी में।
एसपी सिटी ने बताया कि मोती परिवार के साथ 1983 में दिल्ली आया था। उसका परिवार 1994 में वापस बांग्लादेश चला गया था, मगर मोती यहीं रह गया और कबाड़े का काम करने लगा।
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एलआईयू की सूचना पर सिहानी गेट पुलिस ने उसे पुराने बस अड्डे के पास से गिरफ्तार किया। मोती का कहना है कि उसके बढ़ते कारोबार से कुछ लोग खुन्नस खाते हैं, उन्होंने ही उसे पकड़वाया है।
उसने बताया कि बिना पासपोर्ट या पासपोर्ट वैलिडिटी खत्म होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले बहुत बांग्लादेशी हैं।
बांग्लादेशियों की पनाहगाह
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, लोनी, साहिबाबाद, खोड़ा, वसुंधरा, वैशाली, कौशांबी और इंदिरापुरम की झुग्गी-झोपड़ियों में बांग्लादेशी पनाह लिए हुए हैं।
इनके परिवार के लोग जहां छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों में दिहाड़ी मजदूरी का कार्य करते हैं। वहीं महिलाएं घरों में झाडू-पौंछा के अलावा कबाड़ बीनने के काम करती हैं।
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उसके पासपोर्ट की वैलिडिटी अप्रैल 2013 में खत्म हो गई थी, फिर भी वह यहां रह रहा था। उसके दो पत्नियां हैं, एक बांग्लादेश में रहती है और दूसरी दिल्ली सीमापुरी में।
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एसपी सिटी ने बताया कि मोती परिवार के साथ 1983 में दिल्ली आया था। उसका परिवार 1994 में वापस बांग्लादेश चला गया था, मगर मोती यहीं रह गया और कबाड़े का काम करने लगा।
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एलआईयू की सूचना पर सिहानी गेट पुलिस ने उसे पुराने बस अड्डे के पास से गिरफ्तार किया। मोती का कहना है कि उसके बढ़ते कारोबार से कुछ लोग खुन्नस खाते हैं, उन्होंने ही उसे पकड़वाया है।
उसने बताया कि बिना पासपोर्ट या पासपोर्ट वैलिडिटी खत्म होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले बहुत बांग्लादेशी हैं।
बांग्लादेशियों की पनाहगाह
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, लोनी, साहिबाबाद, खोड़ा, वसुंधरा, वैशाली, कौशांबी और इंदिरापुरम की झुग्गी-झोपड़ियों में बांग्लादेशी पनाह लिए हुए हैं।
इनके परिवार के लोग जहां छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों में दिहाड़ी मजदूरी का कार्य करते हैं। वहीं महिलाएं घरों में झाडू-पौंछा के अलावा कबाड़ बीनने के काम करती हैं।